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टोकन सिस्टम की जानकारी नहीं है..

7 वर्ष पहले
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(मुंजालगोंदी चेक पोस्ट पर टोकन दिखता ट्रक ड्राइवर।)
भिलाई। आरटीओ कांड के बाद निकुंज और पूरी टीम का तबादला कर दिया गया। यह दिखाने की कोशिश की गई कि व्यवस्था को बदल कर मामले को सुधारने की कोशिश की जा रही है। लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। टोकन सिस्टम अब भी धड़ल्ले से जारी है। ओवरलोडेड गाड़ियों को पासिंग मिल रही है। यानि कि भ्रष्टाचार का सिस्टम जस का तस है। उसमें कोई बदलाव नहीं। दुर्ग से लेकर राजनांदगांव के पाटेकोहरा बैरियर और कांकेर के चरामा बॉर्डर तक यही हाल है।
इसमें दूसरी महत्वपूर्ण बात यह कि दुर्ग में आरटीओ कांड उजागर होने के बाद परिवहन मंत्री से लेकर एडिशनल ट्रांसपोर्ट कमिश्नर तक ने जांच और व्यवस्था की बात कही थी। यह भी कहा था कि दोषियों को जल्द आइडेंटिफाई किया जाएगा और उनपर सख्त कार्रवाई की जाएगी। दरअसल उन्होंने झूठ कहा था। जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हुई। तो टोकन सिस्टम को बदलने के लिए कुछ किया गया। ही अवैध तरीके से संचालित उड़नदस्ता ऑफिस को बदलने के लिए कुछ किया गया। और ही अन्य गड़बड़ियों को सुधारने की पहल की गई। गुरूवार को हमने मंत्री राजेश मूणत सहित सभी बड़े अफसरों से बातचीत की। सभी सारे प्रकरणों से अन्जान बनते दिखे। रही बात जांच की तो वह करने की बात कही जा रही है। लेकिन उसका स्टेटस बता सकने की स्थिति में तो परिवहन मंत्री हैं और ही आरटीओ विभाग के अफसर।

6तारीख से शुरू होती है कार्रवाई: एक वाहन चालक ने बताया कि 6 तारीख के बाद आरटीओ का उड़नदस्ता कार्रवाई शुरू करता है। ओवर लोड होने पर 60 से 70 हजार तक पेनाल्टी वसूला जाता है। इसमें भी हैरान करने वाली बात यह है कि किसी प्रभावशाली व्यक्ति का फोन आने पर अधिकारी पेनाल्टी की रसीद जारी करने के बाद भी बिना वसूली यह कहते हुए उस वाहन को जाने देते हैं कि पेनाल्टी की रकम वे जमा कर देंगे। इतना ही नहीं दबाव पड़ने पर उड़नदस्ता का अमला पेनाल्टी की रसीद में लिखी रकम से कम लेकर भी वाहन छोड़ देते हैं। प्रत्येक क्षेत्र में उड़नदस्ता के टोकन का खास कोड होता है। जिसे विभागीय अमला ही समझ सकता है।
मुंजालगोंदी चेकपोस्ट, बालोद
भास्कर संवाददाता मुंजालगोंदी से ट्रक में बैठकर चारामा पहुंचा। इस बीच उसके चालक राजेश कुमार निषाद से टोकन और आरटीओ के संबंध में बातचीत की। फिर क्या था, वह तो पहले से आरटीओ से प्रताड़ित था, सबकुछ एक्सपोज कर दिया, राजेश की जुबानी, क्या बताए भैया
आरटीओ वाले परेशान करके रखे हैं। बिना टोकन के यहां से गाड़ी नहीं चला सकते। रेत की रायल्टी पर्ची लेना भूल जाएंगे, लेकिन टोकन साथ में रखना नहीं भूलते। वैसे हमारे सेठ जी ने आरटीओ को सेठ करके रखा है। तो हमें दिक्कत बहुत कम होती है। आप भी यहां गाड़ी चलाने वाले हो तो पहले उनके साहब से बात कर लेना। सेटिंग करके ही इस रूट में गाड़ी चलाना। इस रूट में सिर्फ एक चीज पर कार्रवाई होती है, वह है बिना टोकन के। आप यहां एक बार उनके जेब में पैसे डाल दो, इसके बाद आप यहां से जीतना चाहे माल निकाल सकते हैं। ओवरलोड का नो टेंशन...। इधर जब मुंजालगोंदी चेकपोस्ट का नजार देखा तो वहां भी भ्रष्टाचार की कहानी चल रही थी। आने-जाने वाली ओवरलोडेड गाड़ियों को रोका जा रहा था। जिनके पास टोकन था, उन्हें जाने दे रहे थे। जिनके पास नहीं थे उनका चालान काटा जा रहा था।
भिलाई-राजनांदगांव बायपास, टोल प्लाजा
गुरुवार की सुबह 7.30 बजे। दो घंटे तक भास्कर रिपोर्टर और फोटो जर्नलिस्ट ने बाफना टोल प्लाजा में चल रहे इस अवैध वसूली के खेल को देखा। नागपुर और रायपुर जाने वाले वाहनों को चेक करने के लिए आरटीओ के दो उड़नदस्ता की जीपें खड़ी थी। इनमें केवल दो लोग ही
विभाग की खाकी वर्दी में थे बाकी 4 से 5 युवक सिविल ड्रेस में सड़क से गुजरने वाले वाहनों से टोकन दिखाने का इशारा कर रहे थे। जिनके पास टोकन नहीं था उड़नदस्ता द्वारा ओवर लोड की चालानी कार्रवाई करने की बजाए अवैध वसूली कर टोकन जारी किया जा रहा था। टोकन दिखाने
वाले का वाहन बिना चेक किए जाने दिया गया। ऐसा ही एक चालक जो राजस्थान से भिलाई आ रहा था, उसने बताया कि टोकन पर ही हर महीने छत्तीसगढ़ के अलग-अलग आरटीओ को 10 से 20 हजार रुपए देना पड़ता है। यह सिस्टम राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा कहीं नहीं
है। केवल मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ में ही चल रहा है। बाकी तो इनका कोई कुछ नहीं कर सकता। आप लोगों को ही इसे रुकवाने में कुछ कर सकते हैं। आठ बजे भ्रष्टाचार कर रही टीम की शिफ्ट खत्म हुई। उसके बाद दूसरी टीम आ गई। अगले 12 घंटे तक भ्रष्टाचार उनके हवाले।
राजनांदगांव, पाटेकोहरा बैरियर
दोपहर 12.55 बजे। दस्तावेज जांच काउंटर के पास। महाराष्ट्र का ट्रक ड्राइवर कागजात लेकर पहुंचा। बोला, कितने का चालान कटेगा? सामने से आवाज आई, 1500 रुपए और 900 का स्टिकर। ड्राइवर ने पांच-पांच सौ के तीन नोट दिए और कहा, स्टिकर नहीं चाहिए। काउंटर में बैठे
शख्स ने तीनों नोट वैसे ही वापस कर दिए। वो तो देना ही पड़ेगा, वरना एंट्री नहीं मिलेगी। ड्राइवर ने अपने मालिक से फोन पर बात की और काउंटर में पूरी राशि जमा कराई। दोपहर 12.55 से 1.20 बजे तक ऐसी आठ से दस गाड़ियां पार हुईं। ट्रक ड्राइवर गाड़ी के कागजात दिखाते, इंट्री कराते और स्टिकर के पैसे देकर वापस जाते। कुछ देर बाद काउंटर के पास आया रायपुर निवासी चालक संजय यादव। उसने बताया कि वह पहली बार नहीं आया है। उसके ट्रक की इंट्री पहले से ही है। वहां खड़े अनूप नामक शख्स ने बताया कि यहां तो रोज का काम है। महीने की
30 तारीख को ज्यादा गहमा-गहमी रहती है। यह दूसरे महीने की पांच तारीख तक चलती है। इन्हीं पांच से छह दिनों में वारा न्यारा होता है। जमकर वसूली होती है और कोई देखने वाला भी नहीं रहता। भारी वाहनों के हिसाब से चालान काटे जाते हैं और स्टिकर के रेट भी फिक्स हैं।
सीधी बात : राजेश मूणत, परिवहन मंत
अच्छा.. ऐसा है क्या.. फिर तो गंभीर बात है.. देखना पड़ेगा
- आपको तो पता ही होगा कि पूरे प्रदेश में टोकन
का खेल अभी भी चल रहा है ?
- क्या मतलब ?
- मतलब ये कि आपके परिवहन विभाग का अमला अभी भी टोकन बेचकर रोज लाखों रुपए की अवैध उगाही कर रहा है....क्या है ये?
- कौन अवैध उगाही कर रहा है। मैं कैसे मान लूं।
- हमारे पास अवैध उगाही की लाइव रिपोर्ट है, हमने प्रदेश भर में एक साथ कई चेक पोस्ट पर
इसकी लाइव रिपोर्टिंग की है। इसके सबूत भी हैं।
अब क्या कहना है?
- ऐसा क्या। तब तो गंभीर बात है। देखना पड़ेगा।
- क्या देखेंगे? इंस्पेक्टर निकुम ने कहा था कि मंत्री तक पैसा पहुंचता है और आपने अभी तक देखना भी शुरू नहीं किया?
फिर ये क्यों मान लेना चाहिए कि सबकुछ आपकी जानकारी में हो रहा है?
- गलती करने वाले अधिकारी कुछ भी बोल देते हैं। रहा सवाल मेरी जानकारी में कुछ होने का तो
अगर जानकारी में होती तो अभी तक कार्रवाई हो चुकी होती।
- मतलब इतना बड़ा मामला उजागर होने के बाद अमले को दोबारा भ्रष्टाचार करने की छूट दे दी
है?
केवल प्यादे बदले हैं खेल वही खेला जा रहा है। उड़ने दस्ते के कामकाज की कामकाज की
निगरानी क्यों नहीं करवा रहे हैं?
- नजर रखी जा रही है।
- किस काम की? अवैध उगाही ठीक से हो रही है या नहीं इसकी या काम फेयर हो रहा या नहीं इसकी?
- अरे भाई कामकाज पर निगरानी रखी जा रही है।
- फिर ये सब चल कैसे रहा है?
- जो गलत कर रहा होगा, उस पर तो कार्रवाई होगी ही।
- कैसे, जब निगरानी ही नहीं की जा रही है?
: मैं दिखवाता हूं। पता तो चल ही जाएगा। किसी को नहीं छोड़ा जाएगा।
-क्या करेंगे, एकाध प्यादा बदल देंगे?
- नहीं पूरे सिस्टम को चेक करवाऊंगा।
- उसके बाद क्या होगा? सबकुछ वैसा ही चलता रहेगा, जैसे अभी चल रहा है?
- ऐसा कुछ नहीं होगा।
सीधी बात : हेमकृष्ण राठौर, अतिरिक्त परिवहन आयुक्त
आप टीआई से बात करो, वही बताएंगा
प्रदेश में आरटीओ के अधिकारी व कर्मचारियों द्वारा चेकपोस्ट पर ही टोकन बेचा जा रहा है, क्या आपको पता है?
- मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। आपके माध्यम से पता चल रहा है। मैं पता करवाता हूं।
- जिन वाहन चालकों के पास टोकन नहीं है, उन्हें चेकपोस्ट से गुजरने नहीं दिया जा रहा है, ऐसा क्यों?
- टोकन वाला कोई सिस्टम नहीं है। आपने देखा होगा तो मैं जरूर पता करवाता हूं। आप आरटीओ के टीआई से बात करों।

- चेक पोस्ट पर सिर्फ एक जवान मिला, बाकी सब वहीं के ग्रामीण थे, क्या आप उन्हें सैलरी देते हैं क्या?
- चेक पोस्ट पर आरटीओ के जवान होने चाहिए। प्राइवेट लोगों से हम कोई सेवा नहीं लेते तो उन्हें सैलरी क्यों देंगे।

आरटीओ टीआई से ही बात करों, वो ही बताएंगे। {वाहन चालक बता रहे हैं कि महीने में एक बार आरटीओ को पैसे दे दो इसके बाद ओवरलोड वाहन आसानी से चला सकते हैं, ऐसा कब से चल रहा है?
- ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई होती है और जिन्हें पैसे मिलते हैं, उनसे ही पूछ लो, आप मुझे फोन लगाकर क्यों परेशान कर रहे हो। (इसके बाद फोन डिस्कनेक्ट)
सीधी बात : असीम माथुर, रीजनल टीआई, दुर्ग उड़नदस्ता प्रभारी
असीम जी दुर्ग में आपने अभी तक क्या देखा...?
- अभी तो मुझे ज्यादा कुछ नहीं दिखा। पुरानी घटनाओं को छोड़ दे तो सबकुछ ठीक है।
- आज हमने बालोद जिले के मुंजालगोंदी में उड़नदस्ता की टीम टोकन बेचते हुए देखा, टोकन नहीं खरीदने वालों से रुपए की वसूली हो रही है?

- यह मेरी जानकारी में नहीं है। इस पर रोक लगाई जाएगी।
- निकुंज जी के जाने और आपके आने से स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं आया...? क्या भ्रष्टाचार आपके सिस्टम का हिस्सा है?
- जो भी आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए, वह कर रहे हैं। सभी से समन्वय बनाकर काम किया जा रहा है।
-जिनके पास टोकन नहीं होते है, उनसे रुपए की डिमांड की जाती है, सिस्टम ऐसा ही चलता है क्या?
- टोकन वाला मामला मेरे समझ नहीं आ रहा है। यह कौन और कैसे आपरेट कर रहा है। मैं पता करवाता हूं।
-कहीं ऐसा तो नहीं कि आपको सिर्फ डैमेज कंट्रोल करने भेजा गया है, ताकि आरटीओ कांड को दबाया जा सके?
- ये तो विभाग का रोटेशन है। हर छह महीने में बदलते रहते हैंं। ऐसी कोई बात नहीं है।
(कंटेंट: निर्मलसाहू, मनोज अग्रवाल, उमेश निवल, दिलबर मानिकपुरी, यशवंत साहू, प्राकृत शरण सिंह, फोटो: अजीतसिंह भाटिया, कोमल वर्मा )