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आफत के ब्रेकर

7 वर्ष पहले
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भिलाई। शहर में समस्याओं का अंबार है। जिम्मेदारों को भी अच्छे से यह बात पता है। वे स्थिति को सुधारने के दावे भी कर चुके हैं। लेकिन हालात बिल्कुल नहीं बदल रहे। ऐसा प्रतीत होता है कि शासन-प्रशासन को पब्लिक से कोई लेना-देना ही नहीं। घर से बाहर कदम रखते ही आम आदमी को समस्याएं घेर लेती हैं।
कहीं आवारा मवेशी दुर्घटनाओं और ट्रैफिक जाम के कारक बने हुए हैं तो कहीं आवारा कुत्तों ने आतंक मचा रखा है। बेडौल ब्रेकर एक महीने के आश्वासन के बाद भी सुडौल होने का इंतजार कर रहे हैं। सड़कें डेंजर जोन में तब्दील हो गई है।
ऑटो चालकों और स्कूल बसों की मनमर्जी बदस्तूर जारी है। वे स्कूली बच्चों को ठूंस-ठूंसकर ला-ले जा रहे हैं। इधर चोरी का सिलसिला थम नहीं रहा। सरे राह चेन स्नेचिंग हो रही हैं। शहर के जिम्मेदारों को सब पता है। जनप्रतिनिधियों को। सरकारी नुमाइंदों को भी। बावजूद वे हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। शासन और प्रशासनिक विभागों के बीच तालमेल नहीं होने का खामियाजा शहर की जनता को भुगतना पड़ रहा है।
जनता की समस्याओं के लिए समय नहीं

बैठक में फटकार, पर काम भी तो हो..
टीएलबैठक में भिलाई और दुर्ग दोनों नगर निगम के आयुक्त नहीं पहुंचे। जब ढेरों अफसर अनुपस्थित नजर आए तो कलेक्टर बिफर पड़ीं। कहा- हर मंगलवार को लोगों का बीपी और शुगर क्यों बढ़ जाता है। और फिर कड़े शब्दों में कहा कि यह बिल्कुल नहीं होना चाहिए। पर बड़ा सवाल ये कि काम कब होगा? समस्या का समाधान कब होगा?

कलेक्टर ने कहा बिजी हूं, कल बात करेंगे
जनतासे जुड़ी समस्याओं के समाधान को लेकर जब हमने जिले की मुखिया कलेक्टर आर शंगीता से बात करने की कोशिश की तो तो उन्होंने कहा कि व्यस्त हैं। हमने जब याद दिलाया कि मामला पब्लिक की समस्याओं से जुड़ा है तो उनका कहना था कि कल ही इस पर बात करेंगे। भास्कर इस मामले में जिला प्रशासन का पक्ष आपको आज विस्तार से बताएगा।

अब कह रहे : आईजी प्रदीप गुप्ता ने कहा-प्लान बना रहे हैं।

शहर में लगातार चोरियां हो रही है। सेामवार की रात बैकुंठधाम मंदिर में बड़ी चोरी हुई। चोर मंदिर से एक लाख रुपए के जेवर पार कर दिए। उसी दिन दो स्थानों पर एक ही तर्ज पर चेन स्नेचिंग हुई।
दावा किया था : एसपीने दावा किया था कि चोरी रोकने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे और गश्त तेज की जाएगी।

दावा किया था : एआरटीओजेके ध्रुव ने कहा था कि स्कूल बसों पर कार्रवाई की है। ऑटो में क्षमता से अधिक बच्चे ले जाने की शिकायत मिली है। कार्रवाई करेंगे। इस मामले में आरटीओ से बात नहीं हो सकी।
ऑटो चालक बच्चों को जानवरों की तरह ठूंस-ठूंसकर स्कूल ले जा रहे हैं। प्रशासन को परवाह है स्कूल प्रबंधन को। महीना बीत गया, एआरटीओ ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। ट्रैफिक पुलिस और शिक्षा विभाग भी सोए हुए हैं।

दावा किया था : बेडौलस्पीड ब्रेकर को इंडियन रोड कांग्रेस की गाइड लाइन के तहत बनाने की बात दोनों नगर निगम के इंजीनियर्स ने की थी। आज तक कार्यवाही का पता नहीं है। इस मामले में तो सर्वे तक नहीं किया जा सका।

दावा किया था: दुग्गाने कहा था कि आवारा कुत्तों से लोगों को हो रही परेशानी मैं समझ रहा हूं।
एक दिन आवारा कुत्ते जरूर नियंत्रित होंगे। नसबंदी अभियान चलाया जा रहा है। इसका असर अभी नहीं दिखेगा लेकिन अगले साल तो काम ही जाएगा।
दावा किया था : दुग्गाने कहा था कि आवारा कुत्तों से लोगों को हो रही परेशानी मैं समझ रहा हूं। एक दिन आवारा कुत्ते जरूर नियंत्रित होंगे। नसबंदी अभियान चलाया जा रहा है। इसका असर अभी नहीं दिखेगा लेकिन अगले साल तो काम ही जाएगा।

पीडब्ल्यूडी और भिलाई नगर निगम ने अभी तक कोई सुध नहीं ली है। दुर्ग निगम के आयुक्त सुंदरानी का कहना है कि नार्म्स के मुताबिक ब्रेकर नहीं बन सकता, लेकिन लोगों की मांग पर बनाना पड़ता है। जरूरी और गैर जरूरी ब्रेकर का सर्वे करा रहे हैं। इसके बाद सुधारने हटाने की कार्यवाही की जाएगी।

नसबंदी अभियान शुरू हो गया है। कैंप क्षेत्र में कुत्तों की धरपकड़ जारी है। तत्काल तो नहीं, लेकिन संख्या में गिरावट जरूर आएगी। दुर्ग नगर निगम के कमिश्नर एसके सुंदरानी बताते हैं कि उन्होंने मार्च 2015 तक दुर्ग को रैबीज फ्री सिटी करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए तीन एकड़ में डॉग हाउस बना रहे हैं।

नसबंदी अभियान शुरू हो गया है। कैंप क्षेत्र में कुत्तों की धरपकड़ जारी है। तत्काल तो नहीं, लेकिन संख्या में गिरावट जरूर आएगी। दुर्ग नगर निगम के कमिश्नर एसके सुंदरानी बताते हैं कि उन्होंने मार्च 2015 तक दुर्ग को रैबीज फ्री सिटी करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए तीन एकड़ में डॉग हाउस बना रहे हैं।

शहर में ऐसे सैकड़ों बेडौल स्पीड ब्रेकर हैं जो लोगों की जान पर बन आई है। झटका लगने से लोग बीमार हो रहे हैं। बैक पेन की शिकायत आम बात है। हेड इंज्युरी हो रही है। पहले बने स्पीड ब्रेकर हटाने में तो नाकाम रहे, अब नए-नए बनते जा रहे हैं। जहां मर्जी लोग ब्रेकर बना दे रहे हैं।
शहर में आवारा कुत्तों का आतंक जारी है। मंगलवार को दुर्ग में फिर एक बच्चा को काटा। भिलाई में टाउनशिप की सड़कों और पटरी पार कुत्तों के झुंड देखे जा सकते हैं। नगर निगम भिलाई ने नसबंदी अभियान शुरू कर दिया है, हालांकि जिस तरीके से अभियान जारी है, लगता नहीं समाधान होगा।

हमने 100 लोगों से बातचीत की। दूसरा सवाल हमने पूछा कि काम के लिए नेताओं और अफसरों को कितने नंबर देंगे। तो 98 प्रतिशत लोगों ने 3 से कम नंबर दिए। एक प्रतिशत ने 3 से चार अंक दिए। एक प्रतिशत ने पांच।

हमें इस पर कुछ भी नहीं कहना।
हालात बदले हैं। काम हो रहा है।
हालात में थोड़ा सुधार हुआ है।
बिल्कुल नहीं। सब जस का तस है।
कुत्तों का
आतंक
कुत्तों का आतंक
सड़क पर ढोर
भास्कर सर्वे : क्या नेता और अफसर जिम्मेदारी निभा रहे हैं ?
90 % बिल्कुल नहीं, सब जस का तस
4 % हालत में थोड़ा सुधार
4 % हालात बदले हैं, काम हो रहा है
2% हमें इस पर कुछ भी नहीं कहना है।
हमने 100 लोगों से बातचीत की। दूसरा सवाल हमने पूछा कि काम के लिए नेताओं और अफसरों को कितने नंबर देंगे। तो 98 प्रतिशत लोगों ने 3 से कम नंबर दिए। एक प्रतिशत ने 3 से चार अंक दिए। एक प्रतिशत ने पांच।
परेशानी पब्लिक की, सारे जिम्मेदारों को जानकारी, दावे करने में आगे लेकिन काम बिल्कुल भी नहीं कर रहे
भास्कर पड़ताल|शहर की समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं अफसर और जनप्रतिनिधि, जनता को अच्छे दिन का इंतजार

घटिया ब्रेकर टि्वनसिटी को नहीं चाहिए
शहर में आवारा कुत्तों का आतंक जारी है। मंगलवार को दुर्ग में फिर एक बच्चा को काटा। भिलाई में टाउनशिप की सड़कों और पटरी पार कुत्तों के झुंड देखे जा सकते हैं। नगर निगम भिलाई ने नसबंदी अभियान शुरू कर दिया है, हालांकि जिस तरीके से अभियान जारी है, लगता नहीं कि काम होगा।

जानिए, आपकी-हमारी समस्या का स्टेटस क्या