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दीक्षा समारोह: सतनाम को धर्म की मान्यता दें
गुरुघासीदास विचार शोध संस्था और गुरु घासीदास सेवादार संघ के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को सतनाम धर्म दीक्षा समारोह का आयोजन हुआ। जिसमें सतनाम को बतौर धर्म कानूनी मान्यता देने की मांग की गई। जय बूढ़ादेव देवालय परिसर सिविल लाइन में आयोजित समारोह में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से सतनाम समाज के लोग शामिल हुए।
समारोह में मुख्य वक्ता जीवीएसएस के अध्यक्ष लखनलाल कुर्रे और विशेष अतिथि संस्थापक भुवन लाल रात्रे थे। कार्यक्रम का संचालन बीएम मारकंडेय और बीएम माहेश्वरी ने किया। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय इतिहास की मुख्य धारा के अखिल भारतीय पाठ्य क्रम में गुरु घासीदास सतनाम के शोधित इतिहास को दर्ज कर सतनाम धर्म को विधिक मान्यता देनी चाहिए। साथ ही भंडार पुरी, तेलसीबाड़ा, गिरौदपुरी, चटूआधाम, कुटेलाधाम, गुढ़ियारी बाड़ा, बोडसराबाड़ा, खडुआधाम जैसे सतनाम धर्म स्थलों को निजी सरकारी हाथों से मुक्त कर सतनाम धर्म के निर्वाचित प्रतिनिधियों को सौंपने संसद और विधानसभा में सतनाम धर्म स्थल कानून बनाने की मांग की गई। इसके लिए संस्था के सदस्यों ने सिक्ख धर्म के लिए पारित शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी एक्ट का भी उदाहरण दिया। जिसके माध्यम से सरकार ने 1920 25 में सिक्ख धर्म को संवैधानिक मान्यता दी थी।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे एमडी सतनाम ने बताया कि ऐसा ही दीक्षा समारोह सर्वप्रथम गोंडवाना भवन टिकरापारा रायपुर में और व्यापार विहार बिलासपुर में हो चुका है। जिसमें बड़ी संख्या में लाेगों ने दीक्षा ली थी। इसी क्रम में प्रदेश के गांव-गांव मेें सतनाम धर्म दीक्षा समारोह होगा। कार्यक्रम में बिलासपुर से जेपी डहरे, बेमेतरा से तामेश्वर अनंत, रायपुर से दिनेश सतनाम, दुर्ग से पुनारद जोशी, बलौदा बाजार से संतोष कुर्रे, कोरबा से रेखा जांगड़े सहित अन्य जिलो के प्रतिनिधि और सदस्य उपस्थित थे।
बूढ़ादेव देवालय परिसर सिविल लाइन में हुए कार्यक्रम में शामिल सतनामी समाज के लोग।