कीटाणु मुक्त उपकरण से होंगे ऑपरेशन
ऑपरेशनके लिए उपयोग आने वाले औजारों को बेहतर तरीके से कीटाणु रहित बनाने के लिए 430 बिस्तर वाले प्रदेश के मॉडल का दर्जा प्राप्त दुर्ग जिला अस्पताल में सेंट्रल स्टरलाइजेशन सप्लाई डिपार्टमेंट बनाया जाएगा।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 28.85 लाख रुपए की लागत से इसे विकसित किया जाएगा। खास बात यह है कि राज्य शासन ने इसे मंजूरी दे दी है। केंद्र से मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। वहां से मंजूरी के बाद अप्रैल से इस पर काम शुरू हो जाएगा। आधुनिक संसाधनों के लेस दुर्ग जिला अस्पताल में एक और नई सौगात होगी।
डिपार्टमेंट के बनने से ऑपरेशन में उपयोग आने वाले औजारों को बेहतर तरीके से कीटाणु रहित बनाया जाएगा। इसका पूरा सेटअप तैयार किया गया है। वर्तमान में अस्पताल के हर वार्डों में ऑपरेशन के इन औजारों को वार्ड में ही निश्चित तापमान में बॉयल कर कीटाणु रहित बनाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसकी कोई मॉनीटरिंग नहीं होती है। इसके कारण ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर को हर समय भय बना रहता है। नई व्यवस्था के तहत बॉयल की पूरी प्रक्रिया एक डिपार्टमेंट करेगा। जहां विशेषज्ञ डॉक्टर की निगरानी में औजार गर्म किए जाएंगे। औजारों में कहीं किसी प्रकार से कीटाणु होने पर जिम्मेदारी संबंधित डिपार्टमेंट के अधिकारी की होगी। जीवन दीप समिति में पिछले दिनों इस प्रस्ताव को रखा गया।
कलेक्टर ने भी इसे मंजूरी दे दी। जहां से राज्य शासन को भेजा गया। राज्य शासन ने भी हरी झंडी दे दी है। अप्रैल तक केंद्र से भी मंजूरी मिलने की बात कही जा रही है। फिर इस पर काम शुरू होगा। इसके बाद स्टरलाइजेशन के उपकरण की खरीदी होगी।
प्रदेश का पहला होगा हमारा डिपार्टमेंट...
^राज्यशासन ने इसे मंजूरी मिल चुकी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत इस डिपार्टमेंट को खोला जाना है। अप्रैल तक केंद्र से भी मंजूरी मिल जाएगी। इसके बाद इसे शुरू करने की दिशा में काम होगा। ्रदेश के किसी भी सरकारी अस्पताल में यह सुविधा नहीं है। दुर्ग प्रदेश का पहला जिला होगा, जहां यह सुविधा होगी। संदीपताम्रकार, जिला परियोजना अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग, दुर्ग
ऑपरेशन फेल की मुख्य वजह है उपयोग में आने वाले औजार
डॉक्टर्सकी मानें, तो कई मामलों में ऑपरेशन के फेल होने की मुख्य वजह औजार होते हैं। उनका निश्चित तापमान पर स्टरलाइजेशन नहीं हो पाता। इसका असर ऑपरेशन पर पड़ता है। कई मामलों में मरीजों की मौत तक हो जाती है। पिछले दिनों नसबंदी के कई मामलों में स्टरलाइजेशन में लापरवाही सामने आई, लेकिन जिम्मेदारी तय नहीं होने की वजह से कार्रवाई नहीं हो सकी। अब नई व्यवस्था के तहत जिला अस्पताल में इसे शुरू किया जा रहा है। ताकि अस्पताल में होने वाले हर ऑपरेशन में उपयोग आने वाले औजार पूरी तरह सुरक्षित हों।