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शरीर से नहीं विचारों से युवा होने की जरूरत
संतमोरारी बापू ने नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि मां के सभी स्वरूप कल्याणकारी हैं तथा मां सबका भला करती है।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति शरीर से नहीं बल्कि विचारों से युवा कहलाते हैं, जो व्यक्ति कथा सुनने पहुंचे हैं, वे सभी युवा हैं। इसलिए किसी भी युवा को नवरात्रि के नौ दिनों में कोई भी बुरा कर्म नहीं करना चाहिए। बापू ने रामकथा पंडाल को प्रयोगशाला बताते हुए कहा कि एक सच्चा साधक, जहां पर चलता है जिस दिशा की ओर जाता है, वह सच्चा मार्ग बन जाता है। सच्चा साधक एक रास्ते पर चलते हुए अपना निशान भी मिटा देता है ताकि यह घिसी पिटी प्रथा बन जाए।
हरबात पर दें धन्यवाद : उन्होंनेकहा कि धन्यवाद का मतलब साधारण नहीं है, इस शब्द में बहुत शक्ति है। उन्होंने एक संस्मरण भी सुनाया। कथा के बाद भट्टड़ मध्यानी परिवार ने आरती की। मौके पर सांसद ताम्रध्वज साहू, प्रताप मध्यानी, चैनसुख भट्टड़, संतोष रूंगटा, चतुर्भुज राठी मौजूद थे।
शुक्रवार को बड़ी संख्या में प्रवचन सुनने पहुंची महिलाएं।
समाज के पहले आत्मकल्याण हो
मोरारीबापू ने कहा कि समाज कल्याण करने से पहले आत्मकल्याण करना चाहिए। इसके बिना वह समाज का कल्याण नहीं कर सकता। राम के महत्व के बारे में कहा कि शिवजी भी राम नाम के महामंत्र को जपते हैं। शिवजी ने पार्वती को उपदेश दिया कि रामनाम का जप सहस्त्रनामों के बराबर है और जो व्यक्ति राम का जप करता है, उसका सदैव कल्याण होता है। 21वीं सदी की कल्पना पर बापू ने कहा कि आज देश मंगलयान को उसकी कक्षा में पहुंचाकर बड़ी शक्ति के रूप में स्थापित हुआ है।