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किवार कंपनी के दफ्तर को वार्ड की महिलाओं ने कराया खाली, मुख्य द्वार पर लगाया ताला

7 वर्ष पहले
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गयानगरवार्ड के दाई-दीदी भवन को मोहल्ले की करीब डेढ़ सौ से ज्यादा महिलाओं ने पार्षद दिनेश देवांगन के नेतृत्व में किवार कंपनी से खाली करवा लिया। साथ ही मुख्य द्वार पर अपना ताला जड़ दिया। बताया गया कि किवार लगभग डेढ़ साल से कब्जा कर इस भवन में अपना दफ्तर चला रहा था।

महिलाएं अनिता राजपूत, सरस्वती शर्मा, तीजन बाई मानिकपुरी, उर्मिला साहू, सीता ठाकुर, विजय लक्ष्मी चौहान. अमेरिका बाई निर्मलकर, बुधिया बाई यादव, गीता देवांगन, नीता निर्मलकर ने बताया कि किवार के कर्मचारियों की वजह से परेशानी महसूस कर रही थी। पार्षद देवांगन ने बताया कि कंपनी ने तत्कालीन आयुक्त डीके सिंह की अनुमति से 6 महीने के लिए दफ्तर की मांग की थी। इसके बाद अलग से व्यवस्था करने का वादा किया था लेकिन करीब डेढ़ साल बाद भी दफ्तर खाली नहीं कर रहे थे। यही नहीं पूरे परिसर को कबाड़ बना दिया था, जिससे मोहल्ले की महिलाओं को परेशानी हो रही थी। आखिर तंग आकर उनके नेतृत्व में महिलाओं ने कंपनी का बोर्ड एवं पूरा सामान बाहर फेंक दिया और मुख्य गेट पर ताला लगा दिया। यह कार्रवाई सुबह 7.30 बजे से 10 बजे तक चली। जहां पर कंपनी दफ्तर चला रही थी, वह करीब 25 साल पहले मुक्तिधाम रहा है। अब सालों से पार्षद निधि से एक अच्छा पार्क बनाया गया है एवं महिलाओं के मनोरंजन के लिए सामुदायिक भवन दाई-दीदी बनाया गया है।

एक-दो महीने के लिए ही भवन दिया गया था

^किवारकंपनी को अस्थायी तौर पर दफ्तर संचालन के लिए एक-दो महीने के लिए भवन दिया गया था, उन्हें पहले ही दफ्तर खाली कर देना चाहिए था। आदित्य नगर में उन्हें आफिशियली दिया गया है।\\\'\\\' एसकेसुंदरानी, आयुक्तनगर निगम दुर्ग

मुझे पता नहीं क्या बताऊंगा

^गयानगरमें कंपनी का दफ्तर खाली करने के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। जब मुझे कुछ पता ही नहीं तो मैं क्या बताऊंगा।\\\'\\\' मनीषकुमार, प्रभारीकिवार कंपनी

परिसर में बड़ी गाड़ियां ठेला भी रखा जा रहा था

दाई-दीदीपरिसर में कंपनी की बड़ी गाड़ियां कूड़ा-करकट रखने का ठेला भी रखा जा रहा था। परिसर में बदबू से भी परेशानी होती रही। भवन के पंखे, लाइट भी खराब हो गए। कंपनी ने निगम को कभी किराया भी नहीं दिया। कब्जे के कारण मोहल्ले में शादी या पार्टी भी नहीं हो पाती थी। पार्षद ने बताया कि दफ्तर खाली कराने से पहले कंपनी के सुपरवाइजर से भी चार महीने बात की गई तब सुपरवाइजर