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सामाजिक-आर्थिक बदलाव की राह पर कुछ जरूरी कदम

7 वर्ष पहले
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जिलाअस्पताल दुर्ग। 15 साल का आदित्य अस्पताल के एक कोने में एक साल से उपेक्षित पड़ा। दैनिक भास्कर की नजर उस पर जून में पड़ी। जब पड़ताल की तो पता चला माता-पिता बचपन में गुजर गए थे। 2012 में एक बाइक एक्सीडेंट में आदित्य के रीढ़ की हड्‌डी टूट गई। रिश्तेदारों ने अस्पताल में भर्ती तो कराया पर देखभाल के लिए रुक नहीं सके। भास्कर ने पहल की। इसे एक अभियान का रूप दिया। आज आदित्य बिस्तर से व्हीलचेयर पर बैठ चलने के सपने देख रहा है।

साझा की संवेदनाएं

मानवीयसंवेदनाओं की तमाम कहानियों में दैनिक भास्कर शहरवासियों के साथ खड़ा रहा। नवंबर 2013 में जिला अस्पताल से बच्चा चोरी होने की घटनाएं लगातार हुईं। भास्कर ने पहल की और महज 14 दिन में मां को चोरी हुए बच्चे से मिलाया। दुर्ग की एक बुजुर्ग महिला महाराजी बाई जब 20 साल से मुआवजे के लिए प्रशासन से भिड़ती नजर आईं तो भास्कर ने साथ देने का बीड़ा उठाया। ये चंद उदाहरण हैं। किस्से और भी हैं।

जरूरत को समझा

बीससाल पहले तक गर्मी के दिनों में पटरी पार बूंद-बूंद पानी के लिए तरसता था। टैंकर आने के इंतजार में लोगों को रतजगा करना पड़ता था। रोज सिर फुटव्वल होती थी। दैनिक भास्कर प्रमुखता से लोगों की इस समस्या का उठाता रहा। अंतत: जनप्रतिनिधियों और शासन ने इसमें रुचि ली। 1984 से लंबित वृहद पेयजल योजना पर फिर से काम शुरू हुआ। लगभग 112 करोड़ की यह योजना अंतत: पूरी हुई। भिलाई के 95 प्रतिशत घरों में नल कनेक्शन है।

विजनरी एप्रोच

दिवंगतबीआर जैन। इनका नाम बड़े सम्मान से लिया जाता है। वजह भी खास है। इन्होंने शहर को बिजनेस करना सिखाया। शून्य से शुरूआत कर 10 हजार कामगारों का कुनबा खड़ा किया। आज उनके द्वारा शुरू किया गया सिंप्लेक्स ग्रुप का कारोबार पूरे देश में फैला हुआ है। बिजनेस लगातार ग्रूम कर रहा है। इनके बारे में जानकारी रखने वाले बताते हैं कि इन्होंने शुरूआत तब की थी जब भिलाई का स्ट्रक्चर शहरी नहीं था।

जीवन बदला

गुंडरदेहीकी 6000 महिलाएं। जीवन यापन का जरिया मजदूरी। शमशाद बेगम सामने आईं। इन महिलाओं की जरूरत को बारीकी से समझा। छोटे-छोटे समूह में बांटकर सहकारिता का पाठ पढ़ाया। थोड़े बहुत प्रयासों के बाद नाबार्ड से लोन मिला। इसने पूरी तस्वीर बदल दी। ये मजदूर महिलाएं सम्मानित किसान बन गईं। खुद नहीं पढ़ पाईं लेकिन बच्चे अब अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में पढ़ रहे हैं।