मां किसी की बलि नहीं मांगती
नई कार में नींबू और मिर्च लगाना करें बंद : मोरारी बापू
रामकथा के तीसरे दिन मोरारी बापू ने कहा कि इस पंडाल में कोई सोता नहीं है बल्कि सभी श्रोता हैं। उन्होंने कहा- ‘रामकथा चंद्रमा की किरणों के समान कोमल है। उसी तरह मन को भी कोमल कहा जाता है तो इसमें इतनी उग्रता क्यों रहती हैω जो व्यक्ति राम नाम का जितना जाप करेगा है उसका मन उतना ही कोमल शांत रहेगा। बापू ने एक सूत्र दिया-‘शिकायती चित (मन) आध्यात्म यात्रा नहीं कर सकता। उन्होंनेे कहा कि जो शिकायत या आलोचना करता है उसकी तरफ ध्यान दें क्योंकि-‘कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना’ आप बस शांत मन से अाध्यात्म की यात्रा करें।
नींबूलगाने मिर्ची लगाएं : उन्होंनेबढ़ रहे अंधविश्वास घटनाओं पर कटाक्ष करते हुए विभिन्न किस्म के ‘बाबाओं’ के बारे में कहा- ‘मनुष्य धार्मिक लोभ या भय के कारण धार्मिक होता जा रहा है, जबकि धर्म का अर्थ आस्था, विश्वास है। कुछ लोग नई गाड़ी में नींबू मिर्च लगाते हैं, इस तरह के अंधविश्वास से दूर रहने बचने की जरूरत है।
कथा स्थल पर गरबा हुआ। गीतों भजन के सुरों पर नाच उठे श्रद्धालु।
गरबे पर नाच उठे श्रोता: गरबेगीत श्रोता नाच उठे। रामकथा सुनने स्पीकर गौरीशंकर अग्रवाल, दयाराम साहू, आईजी मुकेश गुप्ता, कलेक्टर आर शंगीता, एसपी डॉ. आनंद छाबड़ा, कांतिलाल बोथरा आदि मौजूद थे।
गुण अवगुण दोनों जरूरी : संसारके सृजन के लिए गुण अवगुण दोनों का होना जरूरी है। क्योंकि शुद्ध सोना से बना आभूषण भी टूट जाता है। महिलाओं से नशाखोरी रोकने आगे आने का आह्वान किया।
बापू ने मनोकामना पूरी होने पर बलि चढ़ाने की प्रथा परंपरा को गलत बताते हुए कहा कि नवरात्रि पर लोग संकल्प लें कि वे किसी भी स्थिति में बलि नहीं चढ़ाएंगे। इस पुरानी परंपरा को बंद करने की जरूरत है। जहां पर शक्तिपीठ है वहां पर तो पशु की बलि या नरबलि देनेे की प्रथा चली रही है इसे रोकने की जरूरत है। मां अपने बच्चों की बलि नहीं चाहती। पशु बलि तो बिल्कुल ही नहीं। बलिदान शराब चढ़ाने की प्रथा पर आपत्ति करते हुए इसे बंद करने कहा।
राम नाम जपने वाले का मन कोमल होता है, क्योंकि रामकथा चंद्रमा के समान कोमल है
रामकथा