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तेवर देख भागे कलेक्टर महापौर

7 वर्ष पहले
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{रसूखदारों को आवास देने का कर रहे थे विरोध

{दैनिक भास्कर ने किया गड़बड़ी का खुलासा

सिटीरिपोर्टर|दुर्ग

आईएचएसडीपीआवास आवंटन में गड़बड़ी पात्रों को मकान नहीं मिलने से नाराज लोग शुक्रवार की शाम कलेक्टोरेट पहुंच गए। उन्होंने पहले सभागार के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। जहां बैठक चल रही थी। बाद में नीचे उतरकर जमकर कलेक्टर आर शंगीता निगम के खिलाफ नारेबाजी की। इतना ही नहीं कलेक्टर महापौर चंद्रिका चंद्राकर के वाहनों को भी उन्होंने परिसर से बाहर निकलने रोक दिया। बढ़ता आक्रोश देखकर कलेक्टर आर शंगीता महापौर ने गाड़ी से उतरना तक मुनासिब नहीं समझा। उनके द्वारा तेज रफ्तार में गाड़ी बढ़ा दी गई। इसके बाद भी लोगों का विरोध जारी रहा। खास बात यह है मौके पर लगभग सभी दुर्ग निगम के सभी पार्षद मौजूद थे, लेकिन किसी ने भी इस मसले में आवाज बुलंद नहीं की। ही उक्त लोगों का साथ दिया।

शुक्रवार को वे पुन: निगम पहुंचे। महापौर निगम आयुक्त के नहीं मिलने पर उन्होंने कलेक्टर में धावा बोल दिया। शाम करीब चार बजे से वे शाम करीब साढ़े छह बजे तक कलेक्टोरेट में ही जमे रहे। इस बीच कलेक्टर महापौर जब बाहर निकले, तो उन्होंने उनके समक्ष विरोध दर्ज कराया। इस दौरान देवनारायण भारद्वाज, उस्मान खान, अब्दुल खान, शेख अमीन, लीला सिन्हा, आबेदा बेगम, उषा ठाकुर, अवतार सिंह, संजय सिंह, परमजीत सिंह, श्याम कुंवारी विश्वकर्मा सहित अन्य मौजूद थे।

पहले भी हुए हैं हंगामे: ऐसापहली बार नहीं हुआ। मुद्दे पर विधानसभा चुनाव से पहले भी हंगामा हुआ था। तब विधायक वोरा पर राजनीति के आरोप लगे थे।

महापौर और पार्षदों की बैठक के बाद हुई पूरी घटना

कलेक्टोरेटमें शाम करीब सवा छह बजे हुई यह अपनी तरह की संभवत: पहली घटना है, जब लोगों के विरोध के चलते कलेक्टर महापौर को वहां से भागना पड़ा। उन्होंने उतरकर लोगों की समस्या तक नहीं सुनी। कलेक्टर ने पार्षदों, एमआईसी सदस्यों महापौर की बैठक बुलाई थी। बैठक खत्म होने के बाद कलेक्टर महापौर लगभग एक साथ नीचे उतरे। वे जैसे ही अपने वाहनों में सवार हुए। लोगों का हुजूम उनके पास गया। दोनों के वाहनों को लोगों ने रोक दिया। विरोध करने लगे। इधर उसी समय महापौर भी अपने वाहन से गुजरने लगी। इसके चलते लोग दो फड़ों में विभक्त हो गए। मौका देखकर कलेक्टर महापौर के वाहन के ड्रायवरों ने वाहन को आगे बढ़ा दिया। दोनों वहां से निकल गए।

जानिए... आखिर क्यों हो रहा इतना हंगामा

गौरतलबहै कि आईएसडीपी आवासों में आवंटन में पिछले दिनों गड़बड़ी सामने आई। मामले की जांच निगम अधिकारी अमरनाथ दुबे द्वारा की जा रही है। आवास आवंटन में एक ही परिवार के पांच सदस्यों को मकान आवंटित किए जाने, महापौर के पुत्र के नाम पर भी आवास आवंटन के लिए राशि जमा कराए जाने जैसे कई मामले सामने आए। शहर के जेल तिराहा सहित कई अन्य जगहों पर लोगों को विस्थापित कर जयंती नगर स्थिति आईएचएसडीपी योजना के तहत मकानों में विस्थापित किया गया है। इनमें से कई लोगों की दस्तावेजी प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो पाई है। वहीं करीब 46 लोगों को मकान का आवंटन नहीं किया है। वे लगातार निगम दफ्तर के चक्कर लगा रहे हैं। वहीं आठ लोग ऐसे हैं, जिन्होंने राशि भी जमा करा दी। बावजूद आवंटन अब तक नहीं हो पाया। इधर पिछले करीब दो साल से वे मकान में रह रहे हैं। पिछले दिनों बिजली कंपनी ने अवैध कनेक्शन कहकर उनकी बिजली काट दी। गुस्सा इसी बात को लेकर है।

मौके पर जमे रहे बड़े अफसर पुलिस जवान

कलेक्टोरेटमें तनाव को देखते हुए पुलिस प्रशासनिक अफसर मौके पर जमे रहे। एडीएम सुनील जैन, आयुक्त एसके सुंदरानी, सीएसपी एनपी उपाध्याय, टीआई राजेश साहू, निगम अधिकारी अमरनाथ दुबे सहित अन्य मौके पर मौजूद थे। उनके द्वारा लगातार आक्रोशित लोगों को समझाने की कोशिश की गई, लेकिन लोगों का आक्रोश शांत नहीं हुआ। इस दौरान प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे नारायण भारद्वाज को पुलिस ने गिरफ्तार करने की भी कोशिश की, लेकिन महिलाएं पुलिस से भिड़ गई। मजबूरी में पुलिस को उन्हें छोड़ना पड़ा। इधर थोड़े समय बाद प्रदर्शन करने वाले मौके से लौट गए।

एक भी पार्षद समस्या सुनने नहीं आए....

इसमामले में आवास में रह रहे करीब 50 परिवारों के सदस्य पूरे समय पुलिस जिला प्रशासन का विरोध करते नजर आए। लेकिन बैठक से बाहर आए एक भी पार्षद, एमआईसी सदस्य ने तनिक भी उनका साथ नहीं दिया। खास बात यह रही है, कि वे सभी मौका देखकर वहां से बारी-बारी निकलते रहे। हालांकि सरस्वती नगर से पार्षद कन्या ढीमर ने थोड़े समय के लिए अवश्य उनके साथ नजर आईं। इसके अलावा शहर के 60 वार्डों के पार्षदों एमआईसी सदस्यों में से किसी ने भी उनका समर्थन नहीं किया। कई ऐसे रहे, जो मीडिया से नजर बचाकर मौके से भाग निकले। कुछ तमाशबीन बने रहे।

कलेक्टर नाराज, सबको मकानों से जल्द खदेड़ेंगे

एसके सुंदरानी, आयुक्त निगम दुर्ग

{आईएचएसडीपी आवास आवंटन को लेकर इतना तीखा विरोध प्रदर्शन हुआ क्यों। {{ जिन लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया, उनमें से 35 लोग अपात्र की श्रेणी में है। केवल सात या आठ लोग पात्र हैं, उन्होंने भी शपथ पत्र नहीं दिया है।

{ उनका कहना है कि सर्वे सूची में नाम है, सौ से अधिक लोगों से पैसे लिए गए हैं। {{ यह बिल्कुल गलत बात है। मामले में हमारे द्वारा वैसे भी जांच कराई जा रही है।

{ कलेक्टर ने क्यों उन लोगों से मुलाकात नहीं की, जिसके चलते आक्रोश फूट पड़ा। {{ कलेक्टर ने पहले ही अधिकारियों को भेजकर उनका आवेदन ले लिया था। भरोसा दिलाया था कि कार्रवाई होगी। फिर भी वे अड़े हुए थे।

{ लोगों का कहना था कि उनकी बात नहीं सुनी गई। {{ ऐसा नहीं है। आज हुए घटनाक्रम से कलेक्टर काफी नाराज है। उन्होंने सख्ती से निपटने कहा है। अपात्रों को मकानों से बाहर किया जाएगा।

इस मामले में कलेक्टर आर शंगीता की कार्य प्रणाली पर विरोधियों ने सवाल खड़े किए हैं। नेता प्रतिपक्ष राजेश शर्मा ने कहा कि जनता से चुने हुए एक जनप्रतिनिधि नौकरशाह की जिम्मेदारी बनती है, कि वह जनता की बातें सुनी। जितने लोग भी विरोध करने पहुंचे थे, उनमें से एक आदमी भी राजनीतिज्ञ नहीं था। सभी निगम के सताए हुए लोग थे, जिन्हें लगातार निगम के अधिकारी बेवकूफ बनाते रहे हैं। जांच कार्रवाई का भरोसा देने के बजाए उनसे भागना पूरी तरह से गलत है।

कलेक्टर आर शंगीता के साथ भी यही कहानी दोहराई गई।

महापौर जैसे ही निकलीं.. गाड़ी को लोगों ने घेर लिया। कहा-पहले हमारी बात सुनो, नहीं तो जाने नहीं देंगे।