पार्षदों के टिकट कटे तो चलाए तीखे वाण
जनाधार क्यों दरकिनार
सिटी रिपोर्टर|दुर्ग. भाजपाके 16 पार्षदों का टिकट कट गया है। कोई गुटबाजी का शिकार हुआ, तो आरक्षण की चपेट में गया। वजह चाहे जो हो पर टिकट कटने से असंतोष उभर रहा है। वे आगे क्या कदम उठाने वाले हैं यह तो अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन फिलहाल पार्टी के इस फैसले पर उनकी जो प्रतिक्रियाएं हैं, वह काफी रोचक हैं। कोई नेताओं पर शब्दों के तीखे बाण चला रहा है तो उन पर व्यंग्य कस रहा है। कुछ की तो आक्रामक प्रतिक्रियाएं हैं।
क्या गलती हुई पता नहीं
मैंपार्टी के कार्यकमों के लिए सुबह से लेकर रात झंडा लगाती रही। हर चुनाव में पार्टी को जिताने के लिए रात दिन एक दिया। मुझसे क्या गलती हुई मुझे नहीं मालूम। मैं तो इसका पता भी लगवा रहीं हूं कि आखिर ये कैसे हो गया। मैं 20साल से पार्टी से जुड़ी हूं। यदि मेरा वार्ड आरक्षण की चपेट में आता तो मैं खुद ही टिकट नहीं मागती।
हर चुनाव जिताया
मैंनेअपने वार्ड विधानसभा, लोकसभा चुनाव जिताया। लगातार पांच साल तक सक्रिय रहा। संगठन के हर आदेश का पालन किया। चुनावों में मेरे साथ कोई कोई खास कार्यकर्ता भी नहीं होते थे, लेकिन कभी हार नहीं माना। लगातार सक्रिय रहा और पार्टी को जिताकर दिखाया। टिकट मिलना इसी सब का इनाम है।
आरक्षण की लगी मार
वार्डपिछड़ा पुरुष के लिए आरक्षित हो गया है। आरक्षण एेसा है कि मेरे परिवार को कोई लड़ भी नहीं सकता था। मुझे संगठन का फैसला भी शिरोधार्य है। मैं पार्टी के लिए काम करूंगी। {(पहलेवार्ड सामान्य महिला के लिए आरक्षित था। इसलिए पार्टी ने पूर्व पार्षद गजेंद्र यादव को लाया। गजेंद्र राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के प्रांत सर संघ संचालक हैं।
आरक्षण की चपेट में आए
मेरावार्ड ही पिछड़ा महिला के लिए आरक्षित हो गया। मैं या मेरे परिवार का कोई चुनाव नहीं लड़ सकता था। मैं भी चाहता था कि मेरे वार्ड से पार्टी किसी बेहतर व्यक्ति को प्रत्याशी बनाए। {(पार्टीमें अलग थलग हो गए थे। पार्टी ने पूर्व पार्षद विनोद ताम्रकार की प|ी सरिता ताम्रकार पर विश्वास जताया)
बेच दिया टिकट
मेरेवार्ड में पार्टी के कई कायकर्ताओं ने टिकट मांगा था। लेकिन तो मुझे दिया और उन्हें दिया। वार्ड में मेरा जनाधार, विकास के कार्य जगजाहिर हैं। मैं ही नहीं, कई लोग कह रहे हैं कि मेरे वार्ड में भाजपा का टिकट पैसा लेकर दिया गया है। मुझे तो ये भी लगता है कि इस