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बजट सिमटा केवल कागजों तक

5 वर्ष पहले
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निगम कर्मियों को नहीं मिल रहा वेतन
पिछले बजट के कार्यों के लिए शासन से नहीं मिला फंड, अब नए की तैयारी
नगर निगम में नए वित्तीय वर्ष 2016-17 के बजट को लेकर कवायद शुरू हो गई है। पार्षदों से सुझाव मांगे गए हैं, कि विकास के लिए जरूरी योजनाओं व जरूरतों से अवगत कराएं। इधर वित्तीय वर्ष 2015-16 के पारित बजट व योजनाओं को लेकर राज्य शासन ने एक ढेला नहीं दिया है। इसके कारण सारे प्रोजेक्ट अटके हैं। खास बात यह है कि एक वर्ष में राज्य शासन ने महज 15 करोड़ रुपए ही उपलब्ध कराया है। वह भी पिछले परिषद में स्वीकृत कामों के है।

दैनिक भास्कर की पड़ताल में इसका पता चला है। नवंबर 2014 में सड़क, नाली, सामुदायिक भवन व पाइप लाइन बिछाने को लेकर 20 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई। इसमें से करीब दस करोड़ शासन ने दिए। इसके अलावा पीलिया प्रभावित क्षेत्रों में नई पाइप लाइन बिछाने के नाम पर करीब नौ करोड़ रुपए की स्वीकृति मुख्यमंत्री ने दी। इसमें केवल पांच करोड़ रुपए की राशि उपलब्ध कराई गई। इस प्रकार कुल 15 करोड़ रुपए निगम को दिए गए। वह भी पिछले कार्यकाल के कामों का है। नई परिषद के गठन के बाद जितने प्रोजेक्ट बने या बजट प्रस्ताव भेजे गए। उनमें से एक भी योजना की फंडिंग शासन ने नहीं की। इसके अलावा पूरे साल सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच विवादों के कारण मामला अटकता रहा। मामले की शिकायत भी शासन-प्रशासन से हुई, लेकिन व्यवस्था में सुधार अब तक नहीं हुआ।

दो बैठकें में सत्तापक्ष का बहिर्गमन

नई परिषद के कार्यकाल को करीब 14 महीने होने जा रहे हैं, इस दौरान गिनती की सामान्य सभा हुई। वहीं सत्तापक्ष व विपक्ष का विवाद चरम पर रहा। आलम यह रहा कि 31 मार्च 2015 को बजट बैठक में ही विवाद हुआ। जिसके कारण सभा स्थगित करनी पड़ी। चार अप्रैल को सामान्य सभा बुलाई गई। सत्तापक्ष के पार्षद, महापौर परिषद व महापौर स्वयं बैठक में नहीं पहुंचे। इसके चलते बजट प्रस्ताव तीन महीने अटका रहा। इस वर्ष 21 जनवरी को सामान्य सभा बुलाई गई। इसमें एजेंडे से पहले संपत्तिकर सहित अन्य विषयों पर चर्चा को लेकर फिर सत्तापक्ष ने बहिर्गमन किया। मामला पुन: अटक गया। हालांकि सभा का संचालन हुआ। प्रस्ताव पारित भी हुए, लेकिन मामले को लेकर फिर राज्य शासन से शिकायत हुई।

जानिए, आखिर क्यों नहीं मिल पाई बजट की राशि
बजट को पारित कराने में सबसे पहले निगम ने देरी की। पहली बजट बैठक 31 मार्च को बुलाई गई, जो स्थगित हुई। इसके बाद बैठक चार अप्रैल को बुलाई गई, तो सत्तापक्ष के नहीं पहुंचने की वजह से नहीं हो सकी। इसके बाद 30 मई को सामान्य सभा बैठक बुलाई गई, जिसमें बजट को पारित किया गया। खास बात यह है कि जो बजट पारित किया गया, वह भी त्रुटिपूर्ण रहा। आय और व्यय दोनों ही मदों में व्यवहार में काफी चूक हुई। सुधार में ही छह माह गुजर गया। इस कारण शासन से राशि नहीं मिल पाई।

आयुक्त को है सामान्य सभा बुलाने का अधिकार
नगर पालिक निगम एक्ट 1956 की धारा 29 के मुताबिक सामान्य सभा बुलाने का अधिकार अध्यक्ष का होता है। उनके असमर्थ होने की स्थिति में यह अधिकार महापौर का है। दोनों ही किन्हीं कारणों से सामान्य सभा बुलाने में असमर्थ हो, तो आयुक्त को अधिकार है कि वह राज्य शासन से मार्ग दर्शन प्राप्त कर सामान्य सभा बुलाए। सूचना सदस्यों को निर्धारित समय में दे।

सामंजस्य की नहीं होने से पिछड़ रहा दुर्ग का विकास
महापौर चंद्रिका चंद्राकर बीजेपी से हैं और सभापति राजकुमार नारायणी कांग्रेस से। संख्या बल में कांग्रेस सदन में अधिक है। इसके चलते सामान्य सभा में हर समय विवाद की स्थिति बन रही है। आलम यह है कि समय पर सामान्य सभा भी नहीं हो पा रहा। दोनों में आपसी सामंजस्य नहीं बैठने की वजह से लगातार दुर्ग का विकास पिछड़ रहा है।

नई परिषद के गठन के बाद हुई चार सामान्य सभा
नई परिषद गठन के बाद चार सामान्य सभा हुई। यथा संभव प्रति दो महीने सामान्य सभा कराना अनिवार्य है। न ही सभापति राजकुमार नारायणी ने सामान्य सभा को गंभीरता से लिया। न ही महापौर चंद्रिका चंद्राकर ने कभी रुचि दिखाई। 7 जनवरी 2015 को महापौर ने पदभार ग्रहण किया। 15 जनवरी को कलेक्टोरेट में सभापति का चुनाव हुआ।

इधर दुर्ग निगम की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। निगम अपने 14 सौ अधिकारी व कर्मचारियों को नियमित रूप से वेतन का भुगतान नहीं कर पा रहा। जनवरी माह का वेतन महीने की 12 तारीख गुजरने के बाद भी जारी नहीं हो पाई है। कमोबेश हर बार इसी प्रकार की स्थिति बन रही है। आपत्ति पर निगम के खाते में पैसा नहीं होने की बात कही जाती।

जनता को बजट से आस
दैनिक भास्कर ने निगम की कार्यप्रणाली को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों से सौ लोगों से बातचीत की। इसमें 65 फीसदी लोगों को आस है कि इस वित्तीय बजट में दुर्ग को कुछ अच्छा मिलेगा। 25 फीसदी ने पुराने ढर्रे पर ही व्यवस्था चलने की बात कही। दस प्रतिशत ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।

शहर के विकास ये बड़े काम जो अटके हैं सालभर से
नल घर शॉपिंग काम्प्लेक्स लागत करीब नौ करोड़।

गंजमंडी काम्प्लेक्स लागत करीब सवा तीन करोड़।

वायशेप ब्रिज के नीचे दुकानों का निर्माण लागत करीब दो करोड़।

बैगापारा में गोबर गैस प्लांट

इंदिरा मार्केट में मल्टीलेवल पार्किंग, केवल कंसलटेंट तय।

कुछ जगहों पर वाईफाई जोन का निर्माण, केवल निगम में सुविधा।

पुलगांव में रिसाइक्लिंग प्लांट, केवल प्रस्ताव।

महमरा एनीकट का कायाकल्प, नौकाविहार व पाथवे निर्माण।

रेलवे लाइन के समानांतर नाले का निर्माण, केवल प्रस्ताव।

शंकर नाला सुदृढ़ीकरण लागत करीब आठ करोड़

रायपुर नाका, उरला व पोटिया में मुक्तिधाम निर्माण, काम जारी।

स्लॉटर हाउस दो करोड़ की लागत।

स्वीमिंग पूल का निर्माण करीब एक करोड़ लागत।

पूरे साल सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विवादों के कारण सामान्य सभा में अटकता रहा शहरी विकास
शहर में हो रहा विकास
शहर में विकास हो रहा है। शासन ने हमें 15 करोड़ की राशि उपलब्ध कराई है। रही बात बजट की योजनाओं की राशि, तो अमृत मिशन में योजनाओं को जोड़ा गया है। इससे करीब 67 करोड़ रुपए निगम को मिलना है। अकेले 47 करोड़ रुपए स्वच्छता, पाइप लाइन व सीवरेज सिस्टम के लिए है। आने वाले दिनों में शहर का और भी तेजी से विकास होगा। इस बजट के लिए हमने पार्षदों व जनता से सुझाव मांगे हैं। इसके आधार पर प्लानिंग की जाएगी। चंद्रिका चंद्राकर, महापौर नगर निगम दुर्ग

सामंजस्य का किया प्रयास

मैं कांग्रेस पार्टी से हूं, लेकिन जब सदन का संचालन करना होता है, तो तटस्थ रहता हूं। दोनों पक्षों में सामंजस्य बनाने का भी मैंने प्रयास किया। विकास पर अड़ंगा कोई नहीं चाहता। सदन में बहस होने पर ही बेहतर कार्ययोजना बनती है। ऐसा मेरा मानना है इसे लेकर ही मैं काम करता हूं। सभी को सदन में बोलने का मौका देता हूं। विवाद जैसी कोई बात नहीं है। राजकुमार नारायणी, सभापति नगर निगम

ढेले का काम नहीं हुआ

नई परिषद आने के बाद एक ढेले का काम नहीं हुआ। जो राशि शासन ने दी है, वह पूर्व में स्वीकृत कामों के हैं। महापौर व उनकी परिषद फेल हैं। बजट स्वीकृति के बाद भी राशि शासन ने नहीं दी, यह उनकी कमजोरी है। अब आगामी वित्तीय बजट के लिए सुझाव मांगे गए हैं। जब काम ही नहीं कराया तो सुझाव कैसा। महापौर को चाहिए कि विकास कराएं। राजेश शर्मा, नेता प्रतिपक्ष नगर निगम दुर्ग

घाटा
76 लाख 17 हजार 681 Rs.
व्यय
02 अरब 25 करोड़ 42 लाख 17 हजार 681 Rs.
आय
02 अरब 24 करोड़ 66 लाख 69 हजार 319 Rs.
नगर निगम में 21 जनवरी हंगामे की फाइल फोटो

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