खामोश खबर
आरटीओ में आपसी कलह का संबंध तो मंत्री जी से है..
दुर्ग में आरटीओ कांड हुआ तो सब अनुमान लगाने जुट गए कि ऐसा क्यों हुआ। सब इसी निष्कर्ष पर पहुंचे कि लेन-देन का मामला जमा नहीं। इसलिए एक्सपोज हो गए। लेकिन असल बात तो कुछ और ही है। दरअसल छग शासन के एक प्रभावी मंत्री का आदमी दुर्ग में पकड़ा गया। उसके पास वीआईपी टोकन था। उड़नदस्ता वालों ने उस पर कार्रवाई कर दी। इसकी शिकायत मंत्री तक पहुंची। मंत्री जी ने धोखे से उड़नदस्ता टीम को लताड़ने के बजाए आरटीओ प्रमुख को तबियत से चमकाया। जल्दबाजी इतनी हुई कि ताबड़तोड़ कुछ गाड़ियों के चालान कट गए। इसके लपेटे में आए ट्रांसपोर्टरों को लगा कि ये तो गलत हो रहा है। टोकन खरीदने के बाद भी उन पर आरटीओ कार्रवाई कर रहा है। बस फिर क्या था। जिस सिस्टम को गोपनीय रखने की हिदायतें सभी देते थे। वह सबके सामने एक्सपोज हो गया। उसके बाद क्या हुआ.. नतीजा सामने है।