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डाउनलोड करेंदुर्ग। उपभोक्ताओं के साथ रसोई गैस सिलेंडर से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने नए निर्देश जारी किए हैं। साथ ही हादसा होने पर मिलने वाले लाभ को लेकर गैस एजेंसी संचालकों को सभी उपभोक्ताओं को दुर्घटना होने पर दिए जाने वाली आर्थिक सहायता के बारे में बताना अनिवार्य कर दिया है। हालांकि, व्यवस्था पुरानी है, लेकिन उपभोक्ताओं को इसके बारे में जानकारी नहीं है। जिले की एजेंसियों के माध्यम से लाखों उपभोक्ताओं को रोजाना रसोई गैस की आपूर्ति की जाती है। इन उपभोक्ताओं से एजेंसियां तय समय पर मेंटेनेंस दूसरे चार्ज भी वसूलती हैं, लेकिन योजनाओं का लाभ शायद ही किसी को मिला हो। खराब होने पर नहीं चलता पता : एजेंसी द्वारा की जाने वाली जांच में मेकेनिक उपभोक्ता को एलपीजी गैस से होने वाली दुर्घटनाओं से बचने के लिए उपाय बताता है। रेगुलेटर के खराब होने का कई बार उपभोक्ता को पता ही नहीं लगता है। जिस कारण कई बार बड़ी दुर्घटनाएं हो जाती हैं। नए उपभोक्ता को कनेक्शन लेते समय ही इस बारे में जानकारी देने का निर्देश है। जबकि पुराने उपभोक्ताओं को सिलेंडर लेकर जाने वाले डिलीवरी मैन से सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं। मात्र पांच रुपए से की गई थी योजना कर शुरुआत : योजनाका शुभारंभ मात्र पांच रुपए में किया गया था। उस समय नुकसान की राशि करीब 10 लाख रुपए रखी गई थी। उस समय रसोई गैस नई-नई आई थी लोगों को सही जानकारी नहीं थी। लोग लेने से बचते थे। इसके बाद इस बीमा की राशि के लिए 40 रुपए वसूले जाने लगे। अब इसकी कीमत 75 रुपए है और दुर्घटना राशि 40 लाख रुपए कर दी गई है। हालांकि इसका लाभ आज तक जिले में एक भी व्यक्ति को नहीं मिला है। आपका जागरूक होना बेहद जरूरी : ''पेट्रोलियममंत्रालय की ओर से उपभोक्ताओं के हित में कार्य करने के निर्देश है। आवेदक को शर्तों को ध्यान में रखकर क्लेम करना चाहिए। गैस एजेंसी संचालकों उपभोक्ताओं को जानकारी देने का प्रयास किया जाता है। लेकिन उपभोक्ता किसी भी मामले को लेकर गंभीरता नहीं दिखाते। अशोक शर्मा, संचालक भारत गैस एजेंसी । |
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