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बेडौल ब्रेकर हटाना तो दूर, अब तक निगम अफसरों ने सर्वे भी नहीं किया

7 वर्ष पहले
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(दुर्ग शहर में बेडौल स्पीड ब्रेकर)
दुर्ग। शहर में 500 से ज्यादा बेडौल स्पीड ब्रेकरों को हटाने नगर निगम प्रशासन ने अभी तक अभियान शुरू नहीं किया है। एक माह पहले कमिश्नर एसके सुंदरानी ने बेडौल ब्रेकरों को हटाने का अभियान शुरू करने की जानकारी दी थी। 28 अगस्त को दोबारा कमिश्नर ने कहा कि 15 दिनों के भीतर ब्रेकर हटाने का अभियान शुरू होगा। ये काम आज तक शुरू नहीं हुआ है।
कॉलोनियों की सड़कों पर बने बेडौल ब्रेकरों से लगातार लोगों के एक्सीडेंट हो रहे हैं। कई लोगों की जान जा चुकी है। इन ब्रेकरों को हटाने निगम ने आज तक अभियान शुरू नहीं किया। हाल ये है कि निगम अफसरों ने खतरनाक ब्रेकरों का सर्वे करने की प्लानिंग भी नहीं की।

नियमानुसार स्पीड ब्रेकरों का निर्माण इंडियन रोड कांग्रेस की गाइडलाइन के अनुसार होना चाहिए। गाइडलाइन के अनुसार ब्रेकर की अधिकतम ऊंचाई 10 सेंटीमीटर होना चाहिए। लेकिन शहर में बने ब्रेकरों की ऊंचाई 15 से 20 सेंटीमीटर तक है। इसका निर्माण 3.7 मीटर रेडियस के राउंडेड हंप के शेप में होना चाहिए। शहर में एक भी ब्रेकर का निर्माण गाइडलाइन के अनुसार नहीं हुआ है। इसके कारण वाहन चालकों के एक्सीडेंट हो रहे हैं।

ज्यादातर ब्रेकरों का निर्माण अनाड़ी लेबरों ने किया है
ज्यादातरब्रेकरों का निर्माण सीमेंटीकरण या डामरीकरण के दौरान अनाड़ी लेबरों ने किया है। इंजीनियरों ने कहीं भी ब्रेकरों का निर्माण इंडियन रोड कांग्रेस के नॉर्म्स के अनुसार नहीं कराया। हालत ये रही कि कहीं भी मनमर्जी से ब्रेकरों का निर्माण करवा दिया गया। कुछ स्थानों पर रोड बनने के कई महीने बाद स्थानीय लोगों ने खुद निर्माण सामग्री की व्यवस्था कर लेबरों से ब्रेकर बनवा लिए।

कमिश्नर करते कुछ नहीं : निगम कमिश्नर सिर्फ काम करने की बातें करते हैं, पर करते कुछ नहीं। स्पीड ब्रेकरों का निर्माण व्यवस्थित और नियंत्रित आवागमन के लिए होना चाहिए, लेकिन बेडौल ब्रेकरों से लोगों की मुसीबत बढ़ रही है। कमिश्नर अगर ये मामूली काम भी नहीं कर सकते तो उनसे किसी काम की उम्मीद कर पाना बेकार है।'' राजेश शर्मा, नेताप्रतिपक्ष, नगर निगम दुर्ग
निगम अफसरों की लापरवाही : गाइडलाइन के अनुसार ब्रेकर का निर्माण निगम अफसरों को करना चाहिए। इस विषय पर कई बार बैठक में कहा जा चुका है। निगम अफसरों की लापरवाही के कारण ब्रेकरों से एक्सीडेंट की शिकायतें बढ़ रही है। बेडौल ब्रेकरों को तोड़कर गाइडलाइन के अनुसार निर्धारित शेप साइज में ब्रेकर का निर्माण होना चाहिए।'' जयश्री जोशी, प्रभारी,लोक कर्म विभाग, नगर निगम, दुर्ग ।

काम होगा लेकिन कब तक हो पाएगा कह नहीं सकता ।
सीधी बात : एसके सुंदरानी, कमिश्नर,नगर निगम दुर्ग
- एक माह पहले बेडौल स्पीड ब्रेकर हटाने का अभियान शुरू करने वाले थे, ये काम क्यों नहीं हुआ।
- अभी नहीं कर पाए हैं। करेंगे।
- एक माह पहले भी आपने यही कहा था। कब करेंगे।
- इसमें टाइम लगेगा। कह नहीं सकता कि ये काम कब तक हो पाएगा।
- बेडौल स्पीड ब्रेकरों को हटाने के लिए निगम ने आज तक सर्वे तक नहीं किया है।
- कुछ स्थानों पर सर्वे किया गया है। मैंने भी कई जगहों पर बेडौल ब्रेकर देखे हैं। इन्हें हटाया जाएगा।

सड़कों पर जगह-जगह बेडौल ब्रेकर से ये खतरे : सड़कों पर जगह-जगह बेडौल ब्रेकर का निर्माण होने के कारण दुपहिया वाहन चालकों के वाहनों का बैलेंस बिगड़ता है। इससे वाहन चालक दूसरे वाहनों से टकरा जाते हैं। वाहन की गति धीमी रखने के बावजूद कई बार बाइक साइकिल या दुपहिया वाहनों में सवार लोग गिर जाते हैं।,
बेडौल ब्रेकरों के कारण वाहन सवारों और पीछे बैठने वाले लोगों को बैक बोन अन्य समस्याएं भी हो रही है। कई घटनाओं में एक्सीडेंट से लोगों की मौत भी हो चुकी है। नॉर्म्स के अनुसार स्पीड ब्रेकर बनने पर इन समस्याओं से लोगों को राहत मिलेगी।

गाइडलाइन के अनुसार ब्रेकर की अधिकतम ऊंचाई 10 सेंटीमीटर होनी चाहिए
शहर में एक भी ब्रेकर का निर्माण गाइडलाइन के अनुसार नहीं हुआ है।

घटिया ब्रेकर टि्वनसिटी को नहीं चाहिए

पब्लिक डिमांड से बनते हैं ब्रेकर : सड़कों पर मनमर्जी से बनाए गए बेडौल ब्रेकरों के लिए निगम अफसर आम जनता को जिम्मेदार मानते हैं। अफसरों का कहना है कि पब्लिक डिमांड पर स्पीड ब्रेकर बनाए जाते हैं। कई बार रोड पर बेडौल ब्रेकरों का निर्माण हो जाता है और निगम अफसरों को इसकी जानकारी भी नहीं मिल पाती है।

बेडौल ब्रेकर हटाना तो दूर, अब तक निगम अफसरों ने सर्वे भी नहीं किया ।
ऐसा है हाल | एक माह में दो बार डेंजर ब्रेकरों को हटाने वादा कर चुके कमिश्नर, पर कुछ नहीं किया।
5 सौ से ज्यादा हैं बेडौल ब्रेकर। कॉलोनियों की सड़क पर लगातार हो रही दुर्घटना से कई मौतों के बावजूद नहीं सुधर रही व्यवस्था।