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सरकार ने माना, रायपुर में पीलिया से हुई 18 लोगों की मौत

6 वर्ष पहले
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राज्यशासन ने सोमवार को हाईकोर्ट में माना कि रायपुर में जून 2014 तक पीलिया से 18 मौतें हुईं। नगरीय प्रशासन सचिव ने हाईकोर्ट में पेश जवाब में स्वीकार किया है कि राजधानी रायपुर के कई वार्डों में गंदी नालियों और कचरों के ढेर से होकर गुजरी पाइप लाइन पीलिया का कारण बना है। हाईकोर्ट ने प्रभावित इलाकोंं में साफ-सफाई पर खास ध्यान देने, पर्याप्त मात्रा में दवाइयां मुहैया करवाने और योग्य डॉक्टर तैनात करने के निर्देश दिए हैं। मामले पर अब 5 मार्च को सुनवाई होगी। शेष|पेज10







क्याहै मामला

रायपुर के लाखे नगर में रहने वाले मुकेश कुमार देवांगन ने हाईकोर्ट में जून 2014 में जनहित याचिका लगाई। इसमें कहा गया है कि राज्य में पीलिया (हेपेटाइटिस-ई) की वजह से 50 से अधिक मौतें हुई हैं। राजधानी रायपुर सहित बिलासपुर, दुर्ग, चांपा सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक मल से दूषित पानी के कारण हेपेटाइटिस होता है। छत्तीसगढ़ के जिन शहरों में पीलिया का ज्यादा असर है, वहां सीवरेज और पानी सप्लाई की व्यवस्था बेहद खराब है। जगह-जगह पानी की सप्लाई के लिए बिछाए गए पाइप लाइन में लीकेज है। नालियों के बीच से पाइप लाइन गुजरी है। शौचालयों का अभाव भी इसका प्रमुख कारण है। जून में हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी और जल संसाधन विभाग के सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा था।

ये थी याचिकाकर्ता की मांगें

0 प्रभावित लोगों खासकर गर्भवती महिलाओं को चिन्हित कर मुफ्त इलाज करने

0 कमेटी का गठन कर पीलिया के कारणों का विश्लेषण कर रोकथाम के ठोस उपाय करने

0 पानी सीवेज की व्यवस्था में सुधार, दोषी अफसरों पर सख्त कार्रवाई

0 वार्डों और घरों में क्लोरिन टेबलेट का वितरण सुनिश्चित करने

0 पीलिया की वजह से मृत लोगों के परिजनों को 20 लाख रुपए देने

0 प्रभावित लोगों को 5 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की गई थी