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बजट : उच्च शिक्षा के लिए दिए जाएंगे हजार करोड़

6 वर्ष पहले
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साल2015-16 के लिए उच्च शिक्षा विभाग के बजट में एक हजार करोड़ रु. का प्रावधान किया जा रहा है। राज्य में उच्च शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए दूर-दराज के शासकीय कॉलेजों को पीपीपी मॉडल पर संचालित करने के साथ-साथ आवासीय कॉलेज भी स्थापित किए जाएंगे।

राज्य गठन के बाद से अन्य प्रशासनिक इकाइयों का तो गठन किया गया किंतु नये कॉलेजों की स्थापना कम ही हुई। इससे वर्तमान शासकीय कॉलेजों पर छात्र-छात्राओं का दबाव बढ़ा। इनमें प्रवेश से वंचितों ने महंगी फीस वाले निजी कॉलेजों की ओर रुख किया। इसे देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने साल 15-16 में महाविद्यालयीन शिक्षा के गुणात्मक सुधार के लिए एक हजार करोड़ की महती योजना बनायी है। सूत्रों के अनुसार दूर-दराज के जिला मुख्यालयों में स्थापित कॉलजों को पीपीपी मॉडल पर राष्ट्रीय स्तर के कोचिंग या अन्य शैक्षणिक संस्थाओं से संचालित करने का निर्णय लिया है। इनमें सुकमा नारायणपुर, दंतेवाड़ा, भोपालपट्‌टनम, बीजापुर जिले के कॉलेज चिन्हित किए गए हैं। इसी तरह से जगदलपुर, कांकेर, राजनांदगांव, दुर्ग रायपुर में एक-एक आवासीय मॉडल कॉलेज खोले जाएंगे। जहां छात्र प्राध्यापक एक साथ रहकर अध्ययन-अध्यापन कर सकेंगे। इसके लिए केंद्र ने 12-12 करोड़ रु. मंजूर किए है। इन कॉलेजों के लिए पद राज्य के बजट से दिए जाएंगे।

लैब और लायब्रेरी को मजबूत किया जाएगा

सूत्रोंके अनुसार प्रदेश के 250 से अधिक शासकीय कॉलेजों में प्रयोगशालाओं लायब्रेरी को भी मजबूत किया जाएगा। अतिथि शिक्षकों की अनुपलब्धता से निपटने विभाग द्वारा प्रदेश-देश के शीर्षस्थ विषय विशेषज्ञों के व्याख्यान सीडी एवं पेन-ड्राइव के जरिए विद्यार्थियों को दिए जाएंगे।

प्रमुख बातें

{900से अधिक सहायक प्राध्यापकों की नियुक्तियां कर नए सत्र से कमी दूर की जाएगी। {ई-लायब्रेरी तकनीक से देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों-महाविद्यालयों से सीधा संपर्क {पीपीपी मोड पर देश की प्रसिद्ध कोचिंग शैक्षणिक संस्थाओं से टाइअप। {प्रयोगशालाओं को भी मजबूत किया जाएगा। {ई-लैंग्वेज लैब स्थापित किए जाएंगे। {पेन ड्राइव सीडी पर देश के शीर्षस्थ प्राध्यापकों के लेक्चर्स भेजे जाएंगे।

प्रदेश के कॉलेजों में बीए, बीकॉम, बीएससी के परंपरागत पाठ्यक्रम के अलावा 3 वर्षीय बैचलर इन वोकेशनल कोर्सेस शुरू किये जाएंगे। इसमें 26 विषयों के पाठ्यक्रम शामिल किए जा रहे हैं। एक वर्षीय कोर्स में उत्तीर्ण को डिप्लोमा 2 वर्षीय को एडवांस डिप्लोमा तथा 3 वर्ष में डिग्री दी जाएगी। प्रवेश 12 वीं के बाद ही दिया जाएगा।