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नहीं... बीएमओ जिम्मेदार नहीं

6 वर्ष पहले
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दस माह से धांधली, गड़बड़ी में शामिल था पूरा स्टाफ

पेंड्रीउपस्वास्थ्य केंद्र में संस्थागत प्रसव के नाम पर अस्पताल स्टाफ द्वारा किए गए फर्जीवाड़ा में एक और खुलासा हुआ है। इससे जिले के स्वास्थ्य केंद्रों के प्रति जिला स्वास्थ्य विभाग के प्रशासनिक कसावट पर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं मामले की जांच की जिम्मेदारी धमधा ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. एमपी ठाकुर को दी गई है। जो स्वयं भी कहीं कहीं फर्जीवाड़े के लिए जिम्मेदार हैं।

ज्ञात हो कि 3 फरवरी को डीपीएम संदीप तिवारी एनआरएचएम के कार्यक्रमों की समीक्षा करने धमधा ब्लॉक के पेंड्रावन स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत आने वाले पेंड्री उपस्वास्थ्य केंद्र पहुंचे थे। तब मामले का खुलासा हुआ।

सभी निकले एक थैली के चट्टे बट्टे

डीपीएम संदीप ताम्रकार ने बताया कि इतने लंबे समय तक फर्जीवाड़ा की भनक इसलिए नहीं लग पाई, क्योंकि उप स्वास्थ्य केंद्र पेंड्री में पदस्थ सभी अधिकारी और कर्मचारी एक ही थाली के चट्टे बट्टे हैं। एएनए सावित्री यादव दुर्ग से आती हैं तो आरएमए रश्मि बलोटे कोहका से पेंड्री आना-जाना करते हैं। वहीं पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ता दिनेश खरे को तो गांव वालों ने कभी देखा ही नहीं है। इन लोगों के वहां नहीं रहने के कारण केंद्र मरीजों को ज्यादातर समय बंद ही मिलता है। अस्पताल स्टाफ ने अप्रैल 2014 के बाद से घर में होने में होने वाले प्रसव को भी संस्थागत प्रसव दर्शाया गया।

एएनएम सावित्री यादव : उपस्वास्थ्य केंद्र में प्रसव कराकर घरों में होने वाले प्रसव को संस्थागत प्रसव दर्शाया और हितग्राहियों और मितानिनों के नाम पर चेक और प्रोत्साहन राशि जारी करवाई।

आरएमएडॉ. रश्मि बलोटे : बिनापड़ताल किए ही एएनएम के कहने पर हितग्राहियों के नाम पर जननी सुरक्षा योजना का चेक जारी कर दिया।

सुपरवाइजरराजेंद्र मिश्रा: एएनएमद्वारा दर्शाए गए प्रसव की समीक्षा नहीं की। जानने का प्रयास नहीं किया कि प्रसव संस्थागत हुआ कि नहीं। अभी प्रसूता और नवजात की स्थिति कैसी है। इस फर्जीवाड़ा से आरएमए अन्य अधिकारियों को अवगत नहीं कराया।

पुरुषकार्यकर्ता दिनेश खरे: प्रसवके दौरान अपने क्षेत्र में उपस्थित नहीं रहे। इसलिए फर्जीवाड़ा का पता नहीं चला। अगर चला भी तो तो सुपरवाइजर को इसकी जानकारी दी और नही आरएमए को।

मितानिनशांति श्रीवास अमृत साहू: दोनोंने चुपचाप एएनएम के फर्जीवाड़ा में सहयोग किया। घरों में प्रसव करवाने वाली हितग्राही महिलाओं को अपने-अपने खाते में पंजीकृत करवा लिया और संस्थागत प्रसव की प्रोत्साहन राशि प्राप्त कर ली। फर्जी हितग्राहियों को चेक भी इन्होंने वितरित किया। अगर सभी अपनी अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभाते तो इतनी बड़ी धांधली को पहले ही रोका जा सकता था।

भास्कर पड़ताल

संदीप ताम्रकार

पूरेमामले का खुलासा करने वाले एनआरएचएम के जिला परियोजना अधिकारी संदीप ताम्रकार ने कहा कि - मैं धांधली बर्दाश्त नहीं करता। चाहे इसके लिए कोई भी कीमत चुकानी पड़े। पहले भी ऐसे खुलासे किए हैं।

सिटी हीरो

डॉ प्रशांत श्रीवासतव, सीएमएचओ

{पेंड्री मामले में रिपोर्ट गई क्या। {{नहीं अभी मुझे नहीं मिली है।

{जांच अधिकारी किसी बनाया गया है। {{वहां के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. डीपी ठाकुर जांच कर रहे हैं।

{जांच की जिम्मेदारी उन्हें क्यों दी गई है। क्या वे स्वयं भी इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं। {{नहीं, बीएमओ जिम्मेदार नहीं होते। इसके लिए सेक्टर अधिकारी जिम्मेदार होते हैं क्योंकि चेक वही साइन करते हैं। बीएमओ तो सूची के आधार पर राशि जारी करवाता है।

{फिर भी उनके क्षेत्र में अगर दस महीने से फर्जीवाड़ा हो रहा है तो क्या ये उनकी प्रशासनिक असफलता नहीं है। {{निरीक्षण किया जाता है लेकिन उसमें इस तरह के मामले सामने नहीं पाते हैं।