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- अवैध कब्जा: 14 एकड़ का हरनाबांधा तालाब सिमटकर हुआ पांच एकड़, जिम्मेदार मौन
अवैध कब्जा: 14 एकड़ का हरनाबांधा तालाब सिमटकर हुआ पांच एकड़, जिम्मेदार मौन
...अतिक्रमण का खेल अभी भी जारी
{न निगम गंभीर जिला प्रशासन ने दिखाई रुचि।
{लगातार अनदेखी से बढ़ गया गायब होने का खतरा।
सिटीरिपोर्टर|दुर्ग
शहरके तालाबों के संरक्षण संवर्धन को लेकर निगम जिला प्रशासन तनिक भी गंभीर नहीं है। इसके कारण लगातार तालाबों को पाटा जा रहा है। यह सब प्रशासनिक अफसरों की नाक के नीचे हो रहा है। खास बात यह है कि इसे लेकर शिकायतें भी हो रही है, लेकिन गंभीरता नहीं होने की वजह से तालाब पटते जा रहे हैं।
भास्कर ने मंगलवार को दो ऐसे तालाबों की पड़ताल की और तालाब की स्थिति देखी। पाया कि दोनों तालाबों में तेजी से अतिक्रमण हो रहा है। कभी 14 एकड़ तक फैला सालों पुराना हरनाबांधा तालाब आज सिमटकर पांच एकड़ तक रह गया है। वहीं सात एकड़ के कचहरी तालाब में एक दर्जन से अधिक कब्जे हो गए हैं। दोनों ही तालाबों में लोग घर बनाकर रह रहे हैं। खास बात यह है कि कई लोगों ने तालाब की जगह पर ही पट्टा आवंटित करा लिया है।
हरनाबांधातालाब वार्ड-11: शहरके सबसे पुराने तालाबों में से एक हरनाबांधा तालाब है। आसपास के लोगों के मुताबिक 350 साल पुराना यह तालाब इतना गहरा था कि कभी हाथी स्नान किया करते थे। अब इसकी गहराई मुश्किल से दस फीट है। दो दर्जन से अधिक पक्के मकान बन चुके हैं। करीब पांच साल से लगातार तालाब पर कब्जा हो रहा है। तालाब राजस्व रिकार्ड में होने के बाद भी प्रशासनिक अनदेखी का शिकार है।
मेरी जानकारी में नहीं, ऐसा है तो जांच के बाद सख्त कार्रवाई होगी
इन्होंने की पहल
तालाबोंके संरक्षण संवर्धन पर पूर्व महापौर शंकर लाल ताम्रकार ने अपने स्तर पर प्रयास किया, वे रोक पाने में नाकाम रहे।
इन तालाबों में भी कब्जे
शहरके अधिकांश तालाबों में कमोबेश कब्जे हो रहे हैं। इन तालाबों में राजीव नगर तालाब, नया पारा तालाब, कातुलबोड़ तालाब, दीपक नगर तालाब, बांधा तालाब, बोरसी तालाब शामिल हैं।
तालाबों में अतिक्रमण की स्थिति में भू-राजस्व संहिता छत्तीसगढ़ की धारा 248 के तहत स्थानीय तहसीलदार को अधिकार है कि वह कब्जे को हटाने का आदेश दे सकता है। स्थानीय निकाय पंचायत कब्जे को हटाने की कार्रवाई कर तहसीलदार को इसकी जानकारी देंगे।
हर जरूरी कदम उठाएंगे
^तालाबको लेकर हर जरूरी कदम उठाए जाएंगे। जहां दिक्कत है, उसका समाधान तलाशा जाएगा। आयुक्त से मै स्वयं इस मसले को लेकर बात करूंगा। पार्षद के आने पर तालाबों के लिए अवश्य सांसद विधायक निधि से राशि स्वीकृत कराना मेरी प्राथमिकता रही है।\\\'\\\' अरुणवोरा, विधायक दुर्ग शहर
सालों पुराना तालाब
^तालाबसालों पुराना है। पटा रहा है, यह बात सही है। मैने अपने स्तर पर प्रयास किया है। पुराने लोगों के मुताबिक तालाब की अपनी एक अलग मानता रही है। इसे सहेजना हम जब की जिम्मेदारी है।\\\'\\\' रीताबजाज, पार्षद वार्ड-11
हमने किया प्रयास
^कचहरीतालाब को लेकर हमने अपने स्तर पर प्रयास किया है। स्थानीय लोगों के साथ मिलकर शिकायत भी हुई। बावजूद शासन स्तर पर कोई प्रयास नहीं हुआ। इतना ही नहीं कइयों ने पट्टा लेकर रजिस्ट्री भी करवा ली है। तालाब के मालिक से इसे लेकर बात की जरूरत है।\\\'\\\' शकुनढीमर, पार्षद वार्ड-39
{ हरनाबांधा कचहरी तालाब में लगातार अतिक्रमण हो रहा है। आपकी जानकारी में है। {{ नहीं मेरी जानकारी में नहीं है। यदि ऐसा हो रहा हैै तो गलत है।
{ हमने देखा है बड़ी तेजी से कब्जे हो रहे हैं। {{ मै स्वयं इसकी जानकारी लूंगा। दिखवाता हूं।
{ निजी तालाब पर क्या अतिक्रमण हो सकता है। {{ बिल्कुल नहीं। तालाब का मालिक भी कोई निर्माण नहीं करा सकता। उसका लैंड यूज चेंज करने पर प्रतिबंध लगा हुआ है।
{ क्या निगम कर्मियों के संरक्षण में इस तरह का कोई काम नहीं हो रहा है। {{ ऐसा बिल्कुल नहीं है। यदि ऐसा है तो मैं जांच कराउंगा। दोषी पर कार्रवाई भी होगी।
क्या बोलता है नियम
राज्यशासन ने पिछले करीब पांच साल पहले नियमों संशोधन करते हुए निजी तालाबों के लैंड यूज में परिवर्तन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। उसे सार्वजनिक लोगों के उपयोग के लिए आरक्षित कर दिया गया है। उस पर किसी प्रकार का अतिक्रमण भी नहीं किया जा सकता। मालिक भी चाहकर उसमें कोई निर्माण नहीं करा सकता।
तालाब पटने से क्या है नुकसान
तालाबके लगातार पटने से उसमें पानी की मात्रा लगातार कम हो रही है। भूमिगत जल का स्तर गिर रहा है। समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, कि तालाब केवल नाम के लिए रह जाएगा। आसपास के क्षेत्र में पानी को लेकर भारी किल्लत हो सकती है। वैसे भी दोनों क्षेत्र ऊंचाई में है। भूमिगत जल का स्तर नीचे हैं। तालाब में पानी नहीं होने की स्थिति में स्थिति और भी विकट हो सकती है।
कचहरी तालाब में भी हो रहा अतिक्रमण
कलेक्टोरेटके करीब तालाब करीब 70 साल पुराना है। तालाब निजी है, लेकिन वार्ड के 1500 से अधिक लोगों के लिए निस्तारी का साधन है। तालाब में एक दर्जन से अधिक पक्के मकान बन गए हैं। पहले कचरा डालकर तालाब के एक हिस्से को पाटा जाता है। इसके बाद वहां मकान बना दिए जाते हैं। इतना ही नहीं पट्टा भी जारी करवा लिया गया है। इसे लेकर स्थानीय पार्षद लोगों ने शिकायत भी की। बावजूद किसी प्रकार की जांच नहीं हुई। तालाब निजी होने की वजह से शासन स्तर पर कोई कार्य तालाब में नहीं हो पारा। तालाब के लिए करीब आठ लाख रुपए का सौंदर्यीकरण के लिए प्रस्ताव भी बना, लेकिन काम शुरू नहीं हो पाया।
डिपरापारा कचहरी वार्ड-39 के यह हैं तालाब। जहां लोगों ने धीरे-धीरे चारों तरफ कर रहे हैं कब्जा।
तस्वीर हरनाबांधा दुर्ग की तालाब का है। 40-50 साल पहले पटवारी रिकार्ड में 14 एकड़ का है। यह तालाब स्टेशन रोड तक फैला हुआ था। अब चारों तरफ हो गया है अतिक्रमण। अब बचा सिर्फ 5 एकड़।