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अस्पताल में 4 दिन से भर्ती महिला का अब तक नहीं हुआ ऑपरेशन

7 वर्ष पहले
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दुर्ग। शुक्रवार से सर्जन के हस्तक्षेप के बाद शुक्रवार से सीजेरियन डिलवरी के लिए भर्ती हुई हीरा बाई का अब तक ऑपरेशन नहीं हो पाया है। दबाव में उसे भर्ती तो कर लिया गया लेकिन उसकी बारी अब तक नहीं पाई है। क्योंकि पहले से ही सिजेरियन डिलवरी के कई मरीज पहले से ही जिला अस्पताल में भर्ती हैं। सर्जन के अभाव में उनका भी ऑपरेशन अब तक नहीं हो पाया था। हीरा बाई के पति के अनुसार उसे इंजेक्शन लगा कर रखा गया है और डॉक्टर मंगलवार को ऑपरेशन करने की बात कह रहे हैं।

इधर सीएमएचओ प्रशांत श्रीवास्तव ने बताया कि जिला अस्पताल में तीनों सर्जन के एक साथ छुट्टी पर चले जाने की जानकारी सिविल सर्जन ने दी थी। जिसके बाद मंैने डॉ वंदना भेले और एक अन्य सर्जन की ड्यूटी सप्ताह में चार दिनों के लिए लगाई है। सभी सर्जन को एक साथ अवकाश पर नहीं भेजना चाहिए। अब किस कारण से उन्हें छुट्टी दी गई है यह देखना पड़ेगा।
जानिए, क्या है पूरा मामला, क्यों मामले में डॉक्टर आपस में ही भिड़ गए
जिला अस्पताल का है बुरा हाल, नहीं कोई पैरेलल व्यवस्था : जिला अस्पताल में महिलाओं का ऑपरेशन करने वाले तीन सर्जन पदस्थ हैं डॉ छाया तिवारी, डॉ रेखा गुप्ता और डॉ उज्ज्वला देवांगन। तीनों ने ही सिविल सर्जन डॉ जेपी मेश्राम से मेडिकल ग्राउंड पर अवकाश मांगा था। जिसे सिविल सर्जन ने स्वीकृत भी कर लिया। यह नहीं सोचा की इनकी अनुपस्थिति में गर्भवती महिलाओं का ऑपरेशन कौन करेगा। अब जब तीनों सर्जन उपलब्ध नहीं है तो अस्पताल में आने वाले सीजेरियन केस को गाइनक डॉक्टरों को अटेंड करने कहा जा रहा है। लेकिन सर्जन नहीं होने के कारण उनकी सर्जरी करने की हिम्मत नहीं हो रही है और वे आत्म विश्वास के साथ ऑपरेशन नहीं कर पा रहे हैं। वहीं सर्जरी करने के अभ्यस्थ नहीं होने के कारण इनके हाथों ऑपरेशन से जच्चा और बच्चा दोनों के लिए खतरे की संभावना बना रहती है। लेकिन किया भी क्या जा सकता है क्योंकि सीएमएचओ की ओर से भेजे गए दोनों सर्जन डॉ वंदना भेले और डॉ मंजू राठौर सप्ताह में दो दो दिन ही सेवा दे सकते हैं।
बाकी दिनों में इन्हें भी अपने मूल पदस्थापना में ड्यूटी देना पड़ता है। ऐसे में सामान्य गाइनिक जैसे डॉ वृंदा माण्डगे की ही जिम्मेदारी बन जाती है कि वह सिजेरियन प्रसव करवाए। लेकिन वे इसे लेकर तैयार नहीं हैं। इसका खामियाजा गरीब मरीज को भुगतना पड़ रहा है।

बड़ा सवाल: 3 डाक्टर छुट्‌टी पर क्यों ?
सिविल सर्जन डॉ जेपी मेश्राम की प्रशासनिक कसावट पर सवाल खड़ा होने लगा है। अब फिर सिविल सर्जन ने मैटरनिटी वार्ड के तीनों सर्जन को एक साथ छुट्टी दे दी है। जिससे यहां पर सीजेरियन डिलवरी को लेकर समस्या खड़ी हो गई है। सर्जन के अनुपस्थित में अब सीजेरियन डिलवरी सामान्य स्त्री रोग विशेषज्ञ को करवाना पड़ रहा है। जिससे कभी भी जच्चा बच्चा के लिए खतरा बन सकता है। हालांकि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ प्रशांत श्रीवास्तव ने दो सर्जन की ड्यूटी जिला अस्पताल में लगवा कर व्यवस्था संभल करने का प्रयास किया। फिर भी आलम यह है कि रविवार को दोपहर में भर्ती की गई प्रसूता का अब तक ऑपरेशन नहीं हो पाया है।

'' सिविल सर्जन से जानकारी मिली थी कि मैटरनिटी वार्ड के तीनों सर्जन मेडिकल ग्राउंड पर छुट्टी में चले गए हैं। इसलिए हमने दो महिला सर्जन की ड्यूटी जिला अस्पताल में लगा दी है। दोनों अल्टरनेट डेट में दो दो दिन अपने सेवा वहां दे रहे हैं।'' डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव, सीएमएचओ।
'' डॉ वृंदा माण्डगे को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। जिसमें उनसे जवाब मांगा गया है कि उन्होंने अस्पताल आई गर्भवती महिला को क्यों वापस जाने कहा। जबकि वे स्वयं ऑपरेशन कर सकती हैं।'' डॉ. जेपी मेश्राम, सिविलसर्जन ।

(फाइल फोटो: दुर्ग जिला अस्पताल)