दुर्ग। प्रदेश में दुर्ग जिले के स्कूली बच्चे सबसे ज्यादा प्रताड़ित हो रहे हैं। ऐसा हम नहीं, छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग में दर्ज शिकायतें बता रही हैं। इस साल दुर्ग संभाग से 24 शिकायतें आयोग को गई है। यह शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के नियमों का खुला उल्लंघन है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने के बावजूद संभाग के प्राइवेट स्कूलों में अधिनियम की सजा का भय नहीं रह गया है।
प्राइवेट स्कूल प्रबंधन तो आरटीई नियमों का पालन कर रहा है और ही वहां कार्यरत शिक्षक बच्चों को प्रताड़ित करने की आदत छोड़ रहे हैं।
इसका ताजा उदाहरण बीते शुक्रवार को फिर देखने को मिली, जब चंदखुरी के एक प्राइवेट स्कूल में चौथी के छात्र की पिटाई कर उसे स्कूल से निकालने की बात कही गई।
जबकि आरटीई की धारा 17 के अनुसार 6 वर्ष से 14 साल की आयु के किसी भी विद्यार्थी को मानसिक या फिर शारीरिक प्रताड़ना देना अपराध की श्रेणी में आता है। शिकायत होने पर बाल संरक्षण आयोग और शिक्षा विभाग दोषी व्यक्ति या स्कूल के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं। छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग में दर्ज शिकायतों के आधार पर बाल प्रताड़ना की सबसे ज्यादा शिकायतें दुर्ग संभाग से दर्ज की गई हैं।
छत्तीसगढ़ में सितंबर 2013 से अब तक 108 शिकायतें बाल सरंक्षण आयोग में दर्ज हुई हैं। जिसमें 6 से 14 साल के बच्चों को उनके स्कूल में शिक्षक, प्राचार्य या प्रबंधन द्वारा, फीस, पढ़ाई या फिर किसी अन्य कारण से प्रताड़ित किया गया है। इसमें से 35 मामले वर्ष 2013-14 सितंबर से मार्च महीने के बीच के हैं। वहीं वित्तीय वर्ष 2014-15 के अप्रैल से नवंबर तक पूरे प्रदेश में 66 मामले दर्ज हुए हैं। इनकी संख्या अभी और बढ़ सकती है।
चिंताजनक है तस्वीर : ''स्कूली बच्चों को प्रताड़ित करने का मामला गंभीर है। दुर्ग से सबसे ज्यादा शिकायतों का होना के जिम्मेदार लोगों पर सवाल खड़ा कर रही है। बच्चों के अपने अधिकार हैं। अगर वे प्रताड़ित होते हें तो इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। जिम्मेदारों को ध्यान देना होगा।'' बीपी सिंह, सीनियरएडवोकेट, हाईकोर्ट ।
दूसरे नंबर पर रायपुर संभाग : अगर संभाग के स्तर पर देखा जाए तो छत्तीसगढ़ के सभी पांच संभाग में से नवनिर्मित दुर्ग संभाग में इस साल सबसे ज्यादा शिकायतें बाल संरक्षण आयोग के पास आई हैं। इस संभाग में एजुकेशन हब दुर्ग-भिलाई होने के कारण सबसे ज्यादा प्राइवेट स्कूल यहीं पर हैं। जिनमें बच्चों को प्रताड़ित करने की 24 शिकायतें आयोग के पास इस साल चुकी हैं। पिछले वर्ष भी दुर्ग संभाग से 12 शिकायतें आयोग को मिली थीं।
इसी प्रकार इस साल रायपुर संभाग से 19, बिलासपुर संभाग से 11, सरगुजा संभाग से 7 और बस्तर संभाग से 6 शिकायतें मिली हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि आदिवासी बाहुल क्षेत्र बस्तर या फिर सरगुजा संभाग में कम बच्चे प्रताड़ना के शिकार होते हैं।
- चंदखुरी में बच्चे की पिटाई का मामला सामने आने के बाद भास्कर की पड़ताल, बाल संरक्षण आयोग में सबसे ज्यादा शिकायत दुर्ग से।