रोजाना 30 से 40 आवेदन
कहीं टिकट के आड़े जाए नो-ड्यूज, टैक्स चुकाने पहुंच रहे दावेदार
महापौर के दावेदारों ने पहले ही मांग लिया नो-ड्यूज
पार्षदके लिए दावेदारी करने वाले कई उम्मीदवारों को निगम में नगरीय विकास कर के रूप में वर्षों से चल रही अपने बाप-दादा की बाकीयत चुकानी पड़ रही है। दरअसल ये चुनाव लड़ने के लिए निगम के नो-ड्यूज की बाध्यता के कारण हो रहा है। पार्टियां किसे टिकिट देंगी, यह तो अभी तय नहीं है। मगर दावेदारों ने नो-ड्यूज के लिए निगम को नगरीय विकास कर के रूप में एक माह में तकरीबन 20 लाख रुपए से अधिक की कमाई जरूर करवा दी है।
यह स्थिति उन दावेदारों के लिए बन रही है जो संयुक्त परिवार में पैतृक घर में निवास कर रहे हैं। कुल 60 वार्डों के दावेदारों में सबसे ज्यादा युवा वर्ग है। जिन्हें घर का पूरा टैक्स चुकाना पड़ रहा है। कई ऐसे है, जिनके नाम पर संपति नहीं है। इसलिए उन्हें जल्दी ही नो-ड्यूज मिल जाता है। सोमवार को ही उरला क्षेत्र के मौजूदा बीजेपी पार्षद के परिजन टैक्स चुकाने के लिए निगम पहुंचे थे। उनका लंबा बकाया था, इसलिए उन्हें 15 हजार रुपए के आसपास कर का भुगतान करना पड़ा। तब उन्हें नो-ड्यूज मिला।
बीजेपी और कांग्रेस के महापौर पद के लगभग सभी दावेदारों ने नगर निगम से पहले ही नो-ड्यूज मांग लिया है। अभी सिर्फ पार्षद की टिकिट मांग रहे दावेदार निगम के चक्कर काट रहे हैं। राजस्व विभाग के आरके पांडेय कहते हैं, नो-ड्यूज के लिए अलग से सेक्शन बनाया है। आवेदन लेने के बाद उनके संपति की पड़ताल की जाती है। इसके बाद उन्हें नो-ड्यूज दिया जा रहा है। कोशिश कर रहे हैं कि एक ही दिन में नो-ड्यूज दिया जाए।
नगर निगम दुर्ग के राजस्व शाखा में इन दिनों दावेदारों के परिजन कोई बेटा, पोता या पति टैक्स चुकाने के लिए चक्कर काट रहे हैं। रोजाना 30 से 40 दावेदार नो-ड्यूज के लिए आवेदन कर रहे हैं। अब तक निगम में पौने दो सौ से अधिक ने नो-ड्यूज मांगा है। उनके संपति की जांच करने के बाद एनओसी दिया जाएगा।
कोई चूक हो जाए