स्टेट फोरम ने भी कहा- देना पड़ेगा हर्जाना
राज्य उपभोक्ता फोरम ने शिवनाथ ऑटो मोबाइल प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में फैसला सुनाया है। प्रार्थी डॉ. हर्ष कुमार साहू ने कंपनी से एसी बोलरो खरीदने के लिए पैसा दिया था। लेकिन कंपनी ने प्रार्थी को नॉन एसी गाड़ी दे दी। जिस पर उपभोक्ता फोरम ने कंपनी को 6 लाख रुपए और दो लाख रुपए मानसिक क्षतिपूर्ति और पचास हजार रुपए देने का निर्णय सुनाया था। कंपनी ने इस मामले को राज्य उपभोक्ता फोरम में दायर किया। जहां पर राज्य उपभोक्ता फोरम ने कंपनी को राहत देते हुए 6 लाख रुपए या फिर गाड़ी के अलावा 50 हजार रुपए मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में देने का निर्देश दिया है।
प्रकरण के मुताबिक धमधा निवासी प्रार्थी डॉ. हर्ष कुमार साहू ने शिवनाथ आटो मोबाइल प्राइवेट लिमिटेड को 28 सितंबर 2012 को दस हजार रुपए देकर महिंद्रा कंपनी की बोलरो एसी गाड़ी खरीदी थी। उस समय गाड़ी की कुल कीमत 6 लाख 92 हजार रुपए थी। कंपनी द्वारा गाड़ी की डिलवरी 19 अक्टूबर 2012 को करना था। प्रार्थी ने कंपनी को 28 सितंबर 2012 को 6 लाख 82 हजार 517 रुपए डीडी क्रमांक 393467 के जरिए दिया। कंपनी ने 18 अक्टूबर को प्रार्थी को गाड़ी देने कहा। लेकिन कंपनी ने गाड़ी को एसी की जगह नान एसी दे दिया। गाड़ी में एसेम्बल एसी लगी होने की वजह से गाड़ी की क्षमता में दिन ब दिन गिरावट आने लगी। कंपनी को शिकायत किए जाने पर गाड़ी की खराबी को ठीक किया जाता था।
कंपनी को आंशिक तौर पर राहत
जिला उपभोक्ता फोरम द्वारा सुनाए गए फैसले को राज्य फोरम में दायर किया गया था। राज्य उपभोक्ता फोरम ने कंपनी को राहत देने वाला फैसला सुनाया है। मयांक ठाकुर, एडवोकेट दुर्ग
राज्य ने सुनाया फैसला
राज्य उपभोक्ता फोरम ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुनाया है। उसने जिला उपभोक्ता फोरम के फैसले को बदल दिया। उसने कंपनी को गाड़ी या फिर गाड़ी का दाम 6 लाख 92 हजार 517 रुपए, 9 प्रतिशत ब्याज के साथ, मानसिक क्षतिपूर्ति के तौर पर 50 हजार रुपए देने का निर्देश दिया।
जिला फोरम का फैसला
जिला उपभोक्ता फोरम ने कंपनी को आदेश दिया कि एक माह के भीतर 6 लाख 92 हजार 517 रुपए को 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से तथा 2 लाख मानसिक क्षतिपूर्ति तथा पांच हजार वाद व्यय के रूप में देने का निर्णय सुनाया था। इसके बाद मामला राज्य उपभोक्ता फोरम में सुनवाई के लिए गया।
जांच करने पर हुआ खुलासा
प्रार्थी को अपनी गाड़ी की कार्य क्षमता पर संदेह हुआ, जिस पर परिवादी ने वाहन की जांच व अन्य रेफ्रीजेरेशन वर्कस के प्रोप्राइटर से कराया तब पता चला कि कंपनी ने बोलरो डीआई टर्बो प्लस नान एसी वाहन दिया है। गाड़ी में एसी किट कराई गई है, जो कंपनी फिटेड नहीं है। वर्तमान में गाड़ी में वाहन हीटर कनेक्शन है, जबकि एसी सिस्टम में हीटर यूनिट नहीं होता। इसी से पकड़ में आया।
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