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जमीन व सेटअप स्वीकृति जिला और राज्य शासन के बीच फंसी

5 वर्ष पहले
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भिलाई। अब तक यह माना जा रहा था कि आईआईटी की जमीन चयनित होने के बाद दुर्ग विवि के लिए जमीन चयन में तेजी आ जाएगी। लेकिन यह मामला जिला प्रशासन और राज्य शासन के बीच अटका फंसा हुआ है। न तो जिला प्रशासन, राज्य शासन को भेजे गए अपने प्रस्ताव के बारे में कोई पूछताछ कर रहा है और न ही राज्य शासन इस दिशा में कोई निर्णय लेने में सक्रियता दिखा रहा है।

जमीन चयन का मामला हो या फिर सेटअप का, सभी प्रस्ताव उच्च शिक्षा विभाग की सहमति के लिए अटक रहा है। विश्वविद्यालय प्रबंधन हमने पत्राचार किया है, कह कर पल्ला झाड़ लेता है और उच्च शिक्षा विभाग विचार करने की बात कह कर मामले को टाल रहा है। जिला और राज्य स्तर पर सामंजस्य की कमी के कारण दुर्ग विश्वविद्यालय को अपने पूर्ण स्वरूप में नहीं आ रहा है। जिसका खामियाजा पांच जिलों के 118 कॉलेजों के विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। जो पढ़ाई रविशंकर विश्वविद्यालय के सिलेबस से कर रहे हैं, लेकिन परीक्षा दुर्ग विश्वविद्यालय से देंगे।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय संशोधन अधिनियम के तहत 24 अप्रैल 2015 को दुर्ग विवि अस्तित्व में आया था। इसके बाद 17 जुलाई को शासकीय कन्या महाविद्यालय की पुरानी बिल्डिंग में विश्वविद्यालय की स्थापना कर प्रथम कुलपति डॉ. एनके दीक्षित की नियुक्ति की गई। तब से विश्वविद्यालय यहीं संचालित हो रहा है। लेकिन शासन स्तर पर सक्रियता की कमी के कारण विश्वविद्यालय कैंपस के लिए जमीन का चयन नहीं हो पाया है।

विभागीय कामकाज के लिए सेटअप के अनुसार स्टाफ भी नहीं मिल पाया है। ऐसे में अगले सत्र की कक्षाएं भी प्रभावित रहेंगी।

जमीन के लिए प्रस्ताव जिला प्रशासन के माध्यम से भेजा है

जमीन संबंधी सभी प्रस्ताव जिला प्रशासन के माध्यम से उच्च शिक्षा विभाग को भेज दिए गए हैं। लेकिन अभी वहां से किसी पर सहमति नहीं मिली है। एग्जाम सेल, एकेडेमिक सेल सहित अन्य सेल के गठन के लिए स्टाफ की मांग की गई है। कन्या महाविद्यालयों के चार कमरों की साफ सफाई करवा कर वहां पर कार्यालयों के संचालन की व्यस्था बनाई जा रही है। डॉ एसके त्रिपाठी, कुलसचिव, दुर्ग विश्वविद्यालय

अगले सत्र से ग्रेजुएशन व पीजी दोनों की कक्षाएं

रजिस्ट्रार ने बताया कि जो कोर्स संभाग के कॉलेजों में संचालित हो रहे है। उनकी प्रथम व द्वितीय वर्ष की कक्षाएं अगले सत्र से लगाई जाएंगी। स्नातक कोर्स में प्रथम व द्वितीय वर्ष और पोस्ट ग्रेजुएशन के प्रीवियस ईयर के लिए कक्षाएं लगेंगी।

फ्लाई एश और सोलर एनर्जी का होगा उपयोग

बताया जा रहा है कि पीडब्ल्यूडी ने विश्वविद्यालय के लिए ईको फ्रेंडली भवन बनाने की योजना बनाई है। इसमें फ्लाई एश का उपयोग किया जाएगा ताकि मजबूती ज्यादा रहे। वहीं इलेक्ट्रिसिटी की जगह पर सौर ऊर्जा का उपयोग भवन में किया जाएगा।

25 करोड़ में पीडब्ल्यूडी तैयार करेगा विवि भवन

विवि के लिए जमीन का चयन नहीं हुआ है और लोक निर्माण विभाग ने भवन निर्माण के लिए संवाद में 23 दिसंबर 2015 को दुर्ग विवि के भवन के लिए आर्किटेक्ट नियुक्त करने विज्ञापन प्रकाशित किया था।

196 की जरुरत, मिले महज 4 कर्मचारी

विवि के लिए उच्च शिक्षा विभाग से 196 स्टाफ मांगा गया। लेकिन सिर्फ 4 की नियुक्ति हुई। स्थापना के बाद ही 34 स्टाफ की मांग की गई। नवंबर 2015 में फिर 162 स्टाफ की मांग उच्च शिक्षा विभाग को भेजी। जो विभाग में लंबित है।

सिलेबस रविवि का और परीक्षा दुर्ग विवि लेगा

पदभार ग्रहण करते वक्त कुलपति डॉ दीक्षित ने संभावना जताई थी कि कम से कम प्रथम वर्ष की परीक्षा इस बार दुर्ग विश्वविद्यालय लेगा। लेकिन 5 जिलों के प्रथम वर्ष के स्टूडेंट्स की परीक्षा दुर्ग विवि लगा, सिलेबस रविवि का ही होगा।

6 माह बाद मिली पहली किश्त, खरीदा फर्नीचर

विश्वविद्यालय के संचालन के शासन से दो करोड़ रुपए की प्रथम किश्त भी जनवरी में प्रबंधन को मिली। जिसके बाद फर्नीचर की खरीदी व कार्यालयों को सेट करने का काम शुरू हुआ। कॉलेज के चार कमरों को खाली कर रजिस्ट्रार सहित अन्य अधिकारियों के कार्यालय तैयार किए जा रहे हैं। वर्तमान में कुलपति सहित चारों अधिकारी कुलपति कक्ष से ही काम निबटा रहे हैं। जिससे उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

गर्ल्स कॉलेज के पुराने भवन में संचालित है विवि

दोनों विभाग एक दूसरे पर टाल रहे इसलिए जमीन चयन प्रक्रिया अटकी

विश्वविद्यालय प्रबंधन ने अंजोरा स्थित छत्तीसगढ़ कामधेनु विश्वविद्यालय की 150 एकड़ भूमि विश्वविद्यालय परिसर के लिए मांगी है। लेकिन कामधेनु प्रबंधन ने 50 एकड़ से ज्यादा जमीन देने से इनकार कर दिया है। इसलिए मामला यहीं अटक गया। इसके अलावा नेवई में सीएसवीटीयू विश्वविद्यालय के समीप की 150 एकड़ जमीन और अरसनारा की पचास एकड़ जमीन के लिए जिला प्रशासन ने राज्य शासन को प्रस्ताव भेजा। लेकिन किसी पर भी उच्च शिक्षा विभाग ने सहमति नहीं जताई। विश्वविद्यालय प्रबंधन पहल के लिए जिला प्रशासन का इंतजार कर रहा है और जिला प्रशासन राज्य शासन से अनुमति का। जबकि उच्च शिक्षा विभाग को जिला प्रशासन से और विकल्प मिलने का इंतजार है। माना जा रहा है कि जब तक उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय सीधे तौर जमीन चयन में हस्तक्षेप नहीं करेंगे, तब तक दुर्ग विश्वविद्यालय को जमीन आवंटन नहीं हो पाएगा।

जमीन संबंधी कोई प्रस्ताव मेरी जानकारी में नहीं आया

हमने संभाग के विद्यार्थियों की बेहतरी के लिए दुर्ग विश्वविद्यालय खोला। जमीन चयन की जिम्मेदारी विवि प्रबंधन और जिला प्रशासन की है। हमारी जानकारी में जमीन संबंधी कोई प्रस्ताव नहीं आया है। प्रेमप्रकाश पांडेय, उच्च शिक्षा मंत्री छग शासन।


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