पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • सहमति से तलाक में भी देना होगा भरण पोषण

सहमति से तलाक में भी देना होगा भरण-पोषण

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
बिलासपुर| सहमतिसे तलाक की डिक्री मंजूर होने के बावजूद प|ी को भरण-पोषण का अधिकार होता है। जस्टिस संजय के. अग्रवाल की बेंच ने कहा है कि हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13(ख) के तहत सहमति से विवाह विच्छेद होना भरण-पोषण देने से इनकार करने का आधार नहीं बन सकता। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए भरण-पोषण की राशि को बढ़ा दिया है।

केस के मुताबिक दुर्ग में रहने वाली किरण गौतम की शादी ऋषिकेश सिंह उर्फ टीआर सिंह से हुई। शादी के कुछ दिनों बाद पति और उसके परिवार वालों पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने की वजह से वह पति से अलग अपने परिजनों के साथ रहने लगी। 25 मई 2002 को दुर्ग कोर्ट ने विवाह विच्छेद की डिक्री मंजूर कर ली। इसके बाद उसने पति से भरण-पोषण के लिए फैमिली कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत किया। 3 मई 2008 को फैमिली कोर्ट ने आंशिक रूप से राहत देते हुए 2000 रुपए हर माह भरण-पोषण के तौर पर देने का आदेश दिया। इसके खिलाफ दोनों पक्षों ने हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन दाखिल की थी। मामले की सुनवाई जस्टिस संजय के. अग्रवाल की सिंगल बेंच में हुई। पति की ओर से कहा गया कि सहमति से विवाह विच्छेद की डिक्री पारित की गई है। महिला 2004 से वकालत का व्यवसाय कर रही है, लिहाजा वह भरण-पोषण की हकदार नहीं है। महिला की ओर से फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए पति की आय को देखते हुए राशि बढ़ाने की मांग की गई। हाईकोर्ट ने पति के भिलाई स्टील प्लांट में सीनियर टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत होने और वेतन के आधार पर भरण-पोषण की राशि को बढ़ाकर 3000 रुपए हर माह करते हुए पति द्वारा दाखिल क्रिमिनल रिवीजन को खारिज कर दिया है।

तीन साल का एरियर्स भी देना होगा

हाईकोर्ट ने 1 जनवरी 2011 को बढ़ी हुई भरण-पोषण की राशि मंजूर की है। पति को आदेश जारी होने के 45 दिनों के भीतर एरियर्स की राशि देने का आदेश दिया है।

सुको के फैसले का हवाला

सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोहताश सिंह विरुद्ध रामेंद्री अन्य के मामले में दिए गए फैसले का हवाला आदेश में दिया गया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 125(1) की व्याख्या करते हुए कहा है कि फैमिली कोर्ट द्वारा पारित डिक्री के आधार पर तलाकशुदा महिला भरण-पोषण पाने के लिए प|ी की हैसियत का सीमित उपयोग कर सकती है।