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छग का पानी है अमृत वितरण व्यवस्था है गंदा

6 वर्ष पहले
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रायपुर | गुणवत्ताके मामले में छत्तीसगढ़ का पानी अन्य राज्यों की तुलना में अच्छा है। केंद्रीय भूजल बोर्ड की गुणवत्ता रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। पिछले कुछ महीनों से राजधानी सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में पीलिया और अन्य जलजनित बीमारियों के कारण यहां पानी की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक लोगों को डरने की बिलकुल जरूरत नहीं है। राज्य में अमूमन सभी जगहों पर उपलब्ध भूजल पीने योग्य है। प्राकृतिक संसाधनों के मामले में छत्तीसगढ़ काफी समृद्ध है। जंगल और जमीन के बाद जल के मामले में भी छत्तीसगढ़ काफी अन्य राज्यों की तुलना में काफी अच्छा है। पानी की गुणवत्ता इस बात पर निर्भर करती है कि उसमें जरूरी तत्वों की उपलब्धता कितनी है और हानिकारक तत्व कितनी मात्रा में हैं।



खुशी की बात यह है कि हमारे पानी में हानिकारक तत्वों जैसे पानी में अंतर्देशीय और तटीय लवणता, इलेक्ट्रिक कंडक्टिविटी की उपलब्धता सहित अन्य घातक तत्वों की मात्रा बहुत कम है। आयरन और कैल्शियम जैसी उपयोगी तत्व भी उपयोगी मात्रा में हैं। इन चीजों ने छत्तीसगढ़ के पानी को अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा फायदेमंद और पेय बना दिया है।

अंतर्देशीय लवणता

आमतौर पर बंजर और उपबंजर जमीन पर उपलब्ध पानी में इसकी उपलब्धता रहती है। पानी में जिप्सम सफ्लेट की मात्रा अधिक होने पर यह हानिकारक होता है। इससे पाचन तंत्र प्रभावित होता है। छत्तीसगढ़ में नवागढ़ में थोड़ा और बेमेतरा के कुछ हिस्सों में यह पाया गया है, वह भी बहुत कम मात्रा में। भारत में राजस्थान, हरयाणा, पंजाब, गुजरात, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटका, बिहार और तमिलनाडु में इसकी अधिकता है। राजस्थान और दक्षिणी हरियाणा में सेलिनिटी की मात्रा प्रति सेंटीमीटर 10 हजार से ज्यादा है। इसने पानी को पीने के अयोग्य बना दिया है। यह एक हजार से ज्यादा नहीं होना चाहिए। देश में दो लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में यह प्रति सेंटीमीटर चार हजार से ज्यादा है।

तटीय लवणता

आमतौर पर समुद्र के आसपास के क्षेत्र में उपलब्ध ग्राउंड वाटर में तटीय लवणता होती है। इससे पानी पीने या अन्य किसी उपयोग के योग्य नहीं रहता। खासबात यह है कि तटीय क्षेत्र से दूर होने के कारण छत्तीसगढ़ के पानी में इसकी उपलब्धा नहीं है। देश में करीब 7500 किलोमीटर लंबाई तटीय क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। मुख्य रूप से गुजरात के कच्छ से कोंकण और मलाबार कोष्ट से कन्याकुमारी, दक्षिण से उत्तर-पूर्वी क्षेत्र तक यह फैला हुआ है।

राजस्थान में फ्लोराइड सबसे ज्यादा

रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान में सबसे ज्यादा जगहों के पानी में फ्लोराइड पाया गया है। यहां के सभी जिले इससे ग्रसित हैं। उड़ीसा और गुजरात के 18-18 जिलों के पानी में फ्लोराइड पाया गया है। इसके अलावा देश के 19 राज्यों के पानी में यह पाया गया है। छत्तीसगढ़ में सिर्फ दुर्ग और दंतेवाड़ा के पानी में फ्लोराइड पाया गया है। जम्मू-कश्मीर के सिर्फ एक डोडा जिला प्रभावित है। फ्लोराइड की माज्ञा 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर होना चाहिए। इसकी मात्रा ज्यादा होने से हड्‌डी गलने लगती है।

बिहार में आर्सेनिक सबसे ज्यादा

पानी में पाया जाने वाला सबसे घातक रसायन आर्सेनिक बिहार में सबसे ज्यादा जगहों पर है। यहां के 12 जिलों के पानी में यह पाया गया है। पश्चिम बंगाल के आठ और उत्तरप्रदेश के पांच जिलों के पानी में यह पाया गया है। छत्तीसगढ़ में सिर्फ राजनांदगांव के चौकी ब्लाक के कौड़ीकसा के आसपास ही पाया गया है। इसकी मात्रा 0.005 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

आयरन और नाइट्रेट

आयरन की ज्यादा मात्रा शरीर के लिए नुकसानदायक है। यह 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा नहीं होना चाहिए। भुवनेश्वर के हैंडपंप में सबसे ज्यादा 49 मिलीग्राम प्रति लीटर आयरन निकला है। असम, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ में भी यह पाया जाता है, लेकिन बहुत कम। इसी तरह मानव जनित गोबर, घुरुवा और गंदगी से निकलने वाले नाइट्रेट भी 45 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा नहीं होना चाहिए। छत्तीसगढ़ में इससे ज्यादा नहीं पाया गया है। राजस्थान के बीकानेर में सबसे ज्यादा 3080 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया है।