सुबह छह बजे, राजेंद्र पार्क
दुर्ग केराजेंद्र पार्क में मॉर्निंग वॉक पर निकले बुजुर्ग ने युवा साथी से कहा- क्यों इस बार वोट दोगे? युवा सतर्क था। कहा- क्यों नहीं, वोट देना हम सबका अधिकार है। उससे कहीं ज्यादा देश के लिए जिम्मेदारी भी। आप देंगे? युवा ने प्रतिप्रश्न किया। क्यों नहीं... मैं तो हमेशा देता हूं। युवा ने फिर पूछा- किसे देंगे? बुजुर्ग ने थोड़ी देर के लिए चुप्पी साध ली। फिर संभलते हुए कहा- थोड़ा माहौल बनने दो। अभी तो चुनावी समर की शुरुवात ही हुई है। नीलू और चंद्रिका जब समझ में जाएंगी तब तय करेंगे। किसको वोट देना है। युवा ने आगे पूछा- आप ऐसा क्यों कह रहे हैं? बुजुर्ग ने गंभीर होकर कहा- अरे बेटा, अभी तुम इतने अनुभवी नहीं हो। मेरे बाल पक गए हैं। ये बाल मैंने धूप में नहीं पकाए हैं। यह सब देखते-देखते। इनके दांत दिखाने के कुछ होते हैं। खाने के कुछ और। ये नेता हर बार वोट लेते समय लुभावनी बातें ही करते हैं। फिर बाद में बदल जाते हैं। युवा ने लंबी सांस लेकर बुजुर्ग को ऐसे देखा जैसे वह उससे सहमत हो चुका हो। चलो दादा- कल मिलते हैं इसी समय। फिर कुछ और बातें बताना...
हम भी वहीं मौजूद थे