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निगम में समय पर नहीं मिल रहा वेतन, कर्मियों में आक्रोश

7 वर्ष पहले
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दुर्ग। दुर्ग नगर निगम में अधिकारियों कर्मचारियों को निर्धारित समय पर वेतन नहीं मिल रहा। प्रति महीने उन्हें वेतन के लिए एकाउंट सेक्शन में चक्कर लगाना पड़ रहा है। बावजूद वेतन जारी होने की तिथि तय नहीं है। कभी वेतन महीने की दस तारीख को दिया जाता है, तो कभी 15 तारीख भी गुजरने के बाद वेतन नहीं मिल पाता। इसे लेकर निगम कर्मियों में आक्रोश है।
राज्य शासन ने सरकारी अधिकारी कर्मचारियों के वेतन जारी होने की तिथि महीने की एक तारीख तय कर दी है।
अपरिहार्य कारणों पर ही इसमें वेतन भुगतान नहीं हो सकता, लेकिन निगम में शासन का यह फरमान करीब दो साल से बेअसर है। निगम में समय पर अधिकारियों कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा है।
वर्तमान में निगम में करीब 801 अधिकारी कर्मचारी है, जिनका प्रतिमाह वेतन करीब 88 लाख रुपए जारी किया जाता है। वेतन बनाने की जिम्मेदारी एकाउंट सेक्शन की है। निगम टैक्स वसूली क्षतिपूर्ति से मिली राशि को स्थापना व्यय मद में डालता है। इस राशि से ही निगम अधिकारियों कर्मचारियों को वेतन दिया जाता है।

जल्द जारी होगा वेतन : '' कर्मचारियोंको जल्द वेतन जारी होगा। सामान्य तौर पर दस तारीख तक वेतन जारी कर दिया जाता है। ऐसा नहीं है कि किसी आर्थिक कारण से देरी होती है। वेतन बन नहीं पाता है। हमारा प्रयास रहता है, कि हम समय पर सभी को वेतन जारी कर दें। '' एसकेसुंदरानी, आयुक्तनगर निगम दुर्ग

कई बार हो चुकी है शिकायत : '' निगमकर्मियों को 15 तारीख के बाद वेतन दिया जाता है। जबकि शासन ने एक तारीख नगरीय प्रशासन ने सात तारीख तय कर रखा है। इसके बाद भी दुर्ग निगम में इसका पालन नहीं हो रहा। शिकायत करने पर आर्थिक बहानेबाजी की जाती है।’ - अमरनाथ दुबे, प्रदेश अध्यक्ष, छग स्वायत्तशासी कर्मचारी संघ

नगरीय प्रशासन के आदेशों की भी अनदेखी : राज्यशासन ने महीने की एक तारीख तो नगरीय प्रशासन ने महीने की सात तारीख तक वेतन जारी करने का फरमान जारी किया है। वर्तमान में शासन कोषालय के माध्यम से वेतन बैंक खातों में जमा कराता है। नगरीय निकाय सीधे खाते में पैसा डालते हैं। खबर है कि दुर्ग निगम में अधिकारी-कर्मचारियों को वेतन देने तक के लिए पैसे नहीं होते, इसके कारण ही लेटलतीफी का खेल चल रहा है।

लेखाधिकारी की व्यस्तता का बहाना, हकीकत कुछ और
जानकारी के मुताबिक दुर्ग निगम में हर महीने वेतन को लेकर रोना रोया जाता है। फंड नहीं होने की बात कहकर महीने की 20 तारीख तक लटकाया जाता है। इसे लेकर अधिकारी कर्मचारियों में आक्रोश है। बावजूद अब तक इसे गंभीरता से नहीं लिया गया है। पूछे जाने पर लेखाधिकारी द्वारा बिलिंग नहीं होने अन्य कार्यों में व्यस्त होने की वजह से वेतन नहीं बना पाने की बात कही जाती है। जबकि असलियत में निगम खाते में वेतन के लिए पैसे ही नहीं होते।

शासन के फरमान के बावजूद समय पर नहीं मिलता वेतन, निगम में 801 अधिकारी, कर्मचारी, प्रतिमाह वेतन 88 लाख होता है जारी, एकाउंट सेक्शन की है जिम्मेदारी।

दो साल से चल रहा है लेटलतीफी का खेल : फंड की कमी|