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दो दिवसीय केंद्रीय गुरु सभा का हुआ समापन
दुर्ग|मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़केन्द्रीय गुरु सभा के 27 वें वार्षिक समागम का तीसरा सत्र रविवार को हुआ। दो दिवसीय कार्यक्रम में शामिल होने हैदराबाद से आए सरदार नानक सिंह निशतर ने सिख धर्म के अन्य धर्मों से अंतरसंबंधों का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि सिख धर्म का बुनियादी सिद्धांत सभी धर्मों को जोड़ना हैं। हम अपने सिद्धांत पर चल कर ही अन्य धर्मों में अपनी सम्मानजनक स्थिति को पुर्ननिर्मित कर सकते हैं। देहरादून से आए सरदार दविन्दर सिंह बिन्द्रा ने गुरु सिख एजुकेशन सोसायटी के निर्माण करने से लेकर गरीब बच्चों की उच्च शिक्षा में सार्थक योगदान देने तक की यात्रा का ब्यौरा दिया। आने वाले 25 वर्षो में 100 प्रतिशत शिक्षित समाज के निमार्ण के उद्देश्य की पूर्ति का उल्लेख किया। डॉ हरभजन सिंह ने कर्मकांड पर चर्चा करते हुए कहा कि हम जहां सनातनी कर्मकांडों से मुक्त हो रहे हैं वहीं अपने लिए नए कर्मकांडों का निर्माण भी कर रहे हैं। साथ ही कर्मकांड के विरोध को कठिन कार्य बताया। उन्होंने कहा कि संसार में एक ही धर्म है और वो है मानव धर्म। वास्तव में जिसे हम धर्म मानते है वह मार्ग और पंथ है। अमृतसर से आए ज्ञानी केवल सिंह ने भी संबोधित किया।