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दुर्ग निगम

7 वर्ष पहले
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दुर्ग। नगरीय निकाय के चुनाव में इस बार अपरिचित प्रत्याशी को वोट देना पड़ जाए। ऐसी स्थिति इसलिए बन रही क्योंकि प्रत्याशियों के पास प्रचार के लिए समय बहुत कम है। हर एक मतदाता के पास जाना इस बार संभव नहीं दिख रहा। इसका मतलब प्रचार-प्रसार का पूरा दारोमदार कार्यकर्ताओं के जिम्मे होगा। खास बात यह है कि 29 नवंबर को चुनाव है और किसी भी पार्टी ने अपने अधिकृत प्रत्याशी की घोषणा अब तक नहीं की है। चुनाव में मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के मध्य ही होगा। तीसरा धड़े की भी प्रचार को लेकर कोई खास तैयारी नजर नहीं रही।
हमें चाहिए ऐसा महापौर
- जो लोगों की भावनाओं को समझे और उनके हित में तेजी से काम करवा सके।
- जो भ्रष्ट हो। दबाव में आए। जिसका समेकित विकास पर यकीन हो।
- जो निगम को करोड़ों के कर्ज से केवल उबारे बल्कि आर्थिक रूप से मजबूत बनाए।
जैसा कि अब तक के सबसे अच्छे माने जाने वाले पूर्व महापौर शंकरलाल तांम्रकार ने भास्कर संवाददाता को बताया।

की-वोटर (जीत की चॉबी) की स्कैनिंग : इस बार भी चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस को की-वोटर (जीत की चॉबी) की तलाश है। ये की वोटर निकाय चुनाव में ज्यादा कारगार साबित होते हैं। वार्ड में ऐसे लोगों का चयन किया जा रहा है, जो 40 से 50 वोटर का नेतृत्व करते हों। उन्हें जिम्मेदारी दे दी जाएगी कि ये वोटर विरोधियों को वोट डालंे। इन्हें साधने की जुगत हो रही है।
वार्डों में चुनावी सभा किसकी: निकायचुनाव में चुनावी सभा भी अहम होगी। अब तक सभा कैसी और कब करनी है? इस पर दोनों पार्टियों ने कोई निर्देश नहीं दिया है। जबकि विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस की ताबड़तोड़ चुनावी सभा हुई थी।

सामाजिक संगठनों से बैठकें: शहर के सामाजिक संगठनों की बैठकें अब तक शुरू नहीं हुई है। पिछली बार चुनाव से पहले ही बीजेपी और कांग्रेस ने साहू, यादव, मुस्लिम, इसाई और अन्य समाज के लोगों से बैठकें कर ली थी। अभी तो सिर्फ प्रत्याशी पर बात चल रही है।

युवाओं पर फोकस की जिम्मेदारी: चुनावमें युवाओं की भूमिका अहम होती है। इसलिए पिछले बार बीजेपी ने कॉलेज स्टूडेंट्स से सपोर्ट मांगने की जिम्मेदारी एबीवीपी को दी थी। वहीं कांग्रेस ने एनएसयूआई को दी थी। अब तक छात्र नेताओं से कोई चर्चा नहीं हुई है।

संगठन के कार्यकर्ता टोली में: भाजपा ने प्रचार-प्रसार के लिए संगठन के नेताओं की टोली बनाकर प्रचार किया था। हर वार्ड में टोली बनाई गई थी। इस बार भाजपा ने टोली ही नहीं बनाई। वहीं कांग्रेस ने भी शहर कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों को वार्ड की जिम्मेदारी दी थी।

हड़बड़ी में ये तरीके अपनाएंगे राजनीतिक दल
पिछले चुनाव में ये तरीके साबित हुए थे कारगर, इस बार प्लानिंग भी नहीं
सोशल साइट: प्रचार-प्रसारके लिए बीजेपी और कांग्रेस सोशल साइट को भी खूब भुनाएगी। प्रत्याशी वाट्सएप और फेसबुक के माध्यम से अपने मुद्दे जनता तक पहुंचाएगी। इसके लिए मीडिया आईटी सेल को जिम्मेदारी दी गई है।

रिश्तेदार पहुंचेंगे प्रचार के लिए: चुनावमें प्रचार-प्रसार के लिए प्रत्याशियों के रिश्तेदार भी पहुंचेंगे। इसके लिए अभी से आमंत्रण भेजे जा रहे हैं। पार्षद पद के दावेदारों ने तो नामांकन फॉर्म भरने के लिए रिश्तेदारों को भी बुला लिया है।

वाइस कॉलिंग एसएमएस: महापौर पद के प्रत्याशी वोट के लिए लोगों को वाइस कॉलिंग और एसएमएस करेंगे। यह पैटर्न पिछले चुनाव में अपनाया था। खासकर युवाओं पर इसका बेहतर असर हुआ था। इस बार दोनों पार्टियां ये तरीका अपनाएंगी।


20 मिनट तक गिनते रहे सिक्के
जिले के कांग्रेसी नेता दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके बाद शाम को केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हुई। बैठक में कांग्रेस के दुर्ग जिलाध्यक्ष हेमंत बंजारे ने नगर पंचायत, नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष के अलावा दुर्ग शहर के पार्षदों के नाम पेश किए। जिस पर चर्चा हुई। 12 दिसंबर को कांग्रेस के प्रत्याशियों के नाम पर मुहर लग जाएगी। 13 को घोषणा संभव।

बुधवार को जिला भाजपा समिति की कई दौर में बैठकें हुई। बैठक में पार्षद पद प्रत्याशी के नामों पर चर्चा हुई। कई वार्ड ऐसे है, जहां सिंगल नाम है। उसकी सूची तैयार है। जिसे मंगलवार रात में संभाग समिति के सदस्यों को सौंप दी गई है। पार्टी के सूत्र बता रहे हैं कि 13 दिसंबर को दोपहर या शाम तक सूची जारी कर दी जाएगी।

13 को नाम घोषित कर सकते हैं दोनों बड़े दल ।
चुनाव 2014: मेरा शहर, मेरी सरकार
प्रचार की तैयारियां नजर नहीं रहीं। सारा जोर प्रत्याशी तय करने में।
(बुधवार को भाजपा से दावेदार शेखर चंद्राकर नामांकन भरने पहुंचे। अमानत राशि के रूप में उन्होंने सिक्के जमा किए।)