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पिता की जगह बेटा पेश, जज बोले-अरेस्ट हिम
लेबरकोर्ट में गुरुवार की दोपहर एक दिलचस्प घटना हुई। एक मामले के आरोपी की जगह दूसरा व्यक्ति कोर्ट में पेश हुआ। इतना ही नहीं आरोपी ने पेश होने के बाद कोर्ट से दस्तावेज में आरोपी ने पिता बनकर हस्ताक्षर भी कर दिया। संदेह के आधार पर कोर्ट ने उसकी पहचान कराई, तो पता चला वह आरोपी नहीं है। उसका पिता मामले में आरोपी है। मामले में न्यायाधीश एसएल मात्रे ने तत्काल पुलिस को सूचित किया। साथ ही निर्देश दिया कि कोर्ट में इस तरह की धोखाधड़ी करने वाले पर अपराध दर्ज किया जाए। खास बात यह है कि घटना दोपहर करीब एक बजे की है, लेकिन कोतवाली पुलिस घंटों आरोपी को बैठाकर रखे रही। शाम करीब साढ़े छह बजे मामले में धारा 419, 205 के तहत अपराध दर्ज हुआ। बाद में आरोपी को मुचलके पर जमानत दे दी गई।
दूसरे के नाम पर पेश होने के और भी मामले
कोर्टमें किसी दूसरे के नाम पर पेश होने की यह संभवत: पहली घटना नहीं है। लगातार इसे लेकर शिकायतें रही हैं, लेकिन किसी ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया। आरोपी, प्रार्थी गवाह की जगह किसी अन्य को कोर्ट में पेश होने को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। बावजूद उनके परीक्षण को लेकर ठोस पहल पहले नहीं हुई।
पुलिस आरोपी को कोर्ट परिसर से थाने लेकर आती हुई।
मामले में कोतवाली थाने में शाम करीब साढ़े छह बजे तक ड्यूटी इंचार्ज केआर साहू को जानकारी तक नहीं थी। जबकि आरोपी जावेद थाने में ही बैठा हुआ था। इतना ही नहीं भास्कर ने जब उनसे अपराध दर्ज होने या कोर्ट से कोई इस तरह के आदेश आने की जानकारी पूछी, तो उन्हें सीधे इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई मामला कोतवाली थाने में नहीं आया।
प्रकरण के मुताबिक मेसर्स एमके अंसारी के संचालक प्रगति नगर निवासी एमके अंसारी पर श्रम न्यायालय में मामला विचाराधीन है। आरोप है कि उन्होंने भविष्य निधि अधिनियम 1976 की धारा 29 (बी)(डी) के तहत डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट प्राप्त नहीं किया। मामले में एक्ट उल्लंघन को लेकर श्रम प्रवर्तन अधिकारी रायपुर द्वारा 30 जून 2014 को प्रकरण तैयार कर कोर्ट में प्रस्तुत किया। गुरुवार को मामले में जुर्माना राशि तय कर समझौता होना था। इस दौरान आरोपी एमके अंसारी को कोर्ट में पेश होना था। लेकिन उनकी जगह उनका पुत्र जावेद अंसारी कोर्ट में पेश हुआ। जावेद ने अपने आपको को एमके अंसारी बताया और उनके नाम पर न्यायालयीन दस्तावेज पर हस्ताक्षर भी किया। इससे कोर्ट को शक हुआ।
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