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पेंड्री में 31 प्रसूताओं के नाम पर बनाए गए फर्जी प्रकरण

6 वर्ष पहले
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{खुलासे के बाद लीपापोती में जुटा स्वास्थ्य महकमा {किसी पर कोई कार्रवाई नहीं, नोटिस

हेल्थरिपोर्टर|दुर्ग

धमधाब्लॉक के ग्राम पेंड्री उपस्वास्थ्य केंद्र में बड़े फर्जीवाड़ा के खुलासे के बाद भी स्वास्थ्य विभाग से लेकर जिला प्रशासन मौन है। अब तक ही किसी को नोटिस जारी किया गया है, ही कार्रवाई हुई है। उल्टा मामले की लीपापोती में स्वास्थ्य विभाग जुट गया है। पूरे मामले में बीएमओ से लेकर स्वास्थ्य केंद्र पेंड्रावन उसके अंतर्गत आने वाले उप स्वास्थ्य केंद्र पेंड्री के पूरे स्टाफ की कार्यप्रणाली संदिग्ध मानी जा रही है। मामले में सीएमएचओ ने जांच की जिम्मेदारी धमधा बीएमओ डॉ. एमपी ठाकुर को सौंपी है। बीएमओ ने अपनी रिपोर्ट सीएचएमओ को सौंप दी है।

भास्कर ने पड़ताल के बाद उन 31 प्रसूता महिलाओं के नाम खोज निकाले है, जिन्हें दर्शाया तो गया संस्थागत प्रसव में, लेकिन घर में प्रसव कराया गया। बाकायदा 43,400 रुपए की राशि भी जारी कर दी गई। इस राशि का कितना किसके जेब में गया। फिलहाल यह जांच का विषय है। गौरतलब है कि इसी प्रकार 2013-14 में भी मामला सामने आया था, लेकिन मामले को दबा दिया गया। एक बार फिर जिला स्वास्थ्य विभाग मामले को लेकर चर्चा में है।

इनमितानिनों पर लगे हैं आरोप

इसफर्जीवाड़े में जिन मितानिनों के नाम सामने आए हैं। उनमें ग्राम पेंड्री की पुष्पा, संतोषी, टिकेश्वरी, सोनिया, रेखा, तीजन, भगवती, जानकी, संगीता, शांति, लक्ष्मी शामिल हैं। उक्त मितानिनों पर आरोप है कि उन्होंने प्रसव के एक से अधिक मामलों में घर में हुए प्रसव को संस्थागत प्रसव बनाकर शासकीय राशि निकाल ली।

इन महिलाओं का कराया घर में प्रसव (2014 में)

प्रसूतामहिला निवास डिलीवर तिथि भुगतान तिथि

गोदावरी पति शिव कुमार पेंड्री 11 मई 24 मई

टिकेश्वरी पति ओमप्रकाश राजपुर 16 जून 17 जून

भान बाई पति लक्ष्मण राजपुर 29 मई एक जून

गोमती पति राजेश राजपुर 24 जून 25 जून

रुखमणी पति तुम्मन अगार 30 मई 30 मई

निरूपा पति डांगेश्वर अगार 18 जून 18 जून

संगीता पति रामानंद राजपुर 22 जुलाई 22 जुलाई

लक्ष्मी पति नारद राजपुर 22 जुलाई 22 जुलाई

लीलाबाई पति मेघनाथ अगार 25 जुलाई 25 जुलाई

रूचि पति हरिवंश पेंड्री 25 जुलाई 25 जुलाई

यशोदा पति तोरन राजपुर 11 जून 12 जून

गिरजा पति रोशन अगार 16 जून 18 जून

पार्वती पति देव कुमार अगार 19 जून 20 जून

सुनीता पति कुलेश्वर अगार 14 सितंबर 17 सितंबर

गंगोत्री पति मंगत पेंड्री 17 सितंबर 17 सितंबर

मंजू पति नरेंद्र धमधा 24 सितंबर 27 सितंबर

इंदिरा पति दिलीप धमधा 26 सितंबर 27 सितंबर

सुजाता पति कुलेश्वर राजपुर 18 अक्टूबर 18 अक्टूबर

रेखा पति दिनेश गढ़रिया 30 अक्टूबर 30 अक्टूबर

पूर्णिमा पति अजय अगार 10 नवंबर 10 नवंबर

लता पति नारद अगार 19 नवंबर 19 नवंबर

पूजा पति तिहारू पगबंधी 24 नवंबर 24 नवंबर

ज्ञान बाई पति दिलीप पेंड्रावन 26 नवंबर 26 नवंबर

मोहनी पति ठाकुर राम राजपुर 5 दिसंबर 7 दिसंबर

दुलेश्वरी पति उत्तम कुमार अगार 10 दिसंबर 10 दिसंबर

रोहणी पति केवल राजपुर 14 दिसंबर 14 दिसंबर

तिलक पति अश्वनी धमधा 15 दिसंबर 15 दिसंबर

टीनू पति जीवनलाल पगबंधी 17 दिसंबर 17 दिसंबर

सुशाला पति रमेश पगबंधी 19 दिसंबर 19 दिसंबर

जांच में मिली है अनियमितता

^जांचरिपोर्ट मैंने सीएमएचओ को सौंप दी है। जांच के दौरान मैंने एएनएम, मितानिनों मितानिन ट्रेनर के भी बयान लिए गए हैं। उन्होंने घर में प्रसव को संस्थागत प्रसव बताकर राशि लेने की बात स्वीकारी है। हितग्राहियों से भी पूछा गया है, उन्होंने 1400 रुपए लेने की बात कही है। मामले में जो भी निर्णय लेना है बड़े अधिकारियों को लेना है। डॉ.एमपी ठाकुर, बीएमओ धमधा

पूरे दिन मचा रहा विभाग में हड़कंप

भास्करके खुलासे के बाद पूरे दिन स्वास्थ्य विभाग के सीएमएचओ दफ्तर में हड़कंप की स्थिति रही। कलेक्टर आर शंगीता ने भी मामले की जानकारी लेने की खबर है। सभी मामले को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं। सूत्रों की माने तो वे मामले को दबाने की फिराक में है। इधर धमधा के अलावा पाटन दुर्ग में भी इस प्रकार के फर्जीवाड़ा करने की बात सामने रही है। पूरे विभागीय कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठने लगे हैं।

जानिए... प्रसूताओं के नाम पर राशि हड़पने का पूरा सच

जननीसुरक्षा योजना के तहत संस्थागत प्रसव होने पर 1400 घर में प्रसव होने पर 500 रुपए हितग्राही को दिए जाते हैं। घर में प्रसव की स्थिति में अन्य कोई खर्च योजना के तहत वहन नहीं किया जाता, लेकिन संस्थागत प्रसव होने पर 600 रुपए मितानिन को प्रसूता को लाने-ले जाने के लिए दिए जाते हैं। इसके अलावा भोजन का भी खर्च दिया जाता है। यह खर्च पंचायत से इंसेटिव के नाम पर चेक के माध्यम से मितानिन के खाते में जमा कराया जाता है। इसके लिए मितानिन को मितानिन ट्रेनर एएनएम से सत्यापन कराना होता है। इसी सत्यापन इंसेटिव के पैसे को लेकर खेल हो रहा था।