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निर्देश के बावजूद नहीं हटाए गए कब्जे

5 वर्ष पहले
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विस्थापन को लेकर निगम की तैयारी
गोकुलनगर से अतिक्रमण हटाने में नगर निगम अब तक नाकाम रहा है। खास बात यह है कि 15 जनवरी को महापौर चंद्रिका चंद्राकर ने गोकुल नगर का औचक निरीक्षण भी किया। कब्जा देखकर उन्होंने नाराजगी भी जताई। नोटिस जारी कर तीन दिनों के अंदर कब्जा हटाने संबंधित व्यक्ति को कहा। बावजूद अब तक कब्जा बरकरार है। स्थानीय पार्षद सुरेंद्र सिंह राजपूत ने आरोप लगाया है कि निगम अधिकारियों के संरक्षण में कब्जे का खेल क्षेत्र में चल रहा है।

15 जनवरी को महापौर ने गोकुल नगर में निरीक्षण करने पहुंची थी। उस समय किशन लाल अरोरा नामक व्यक्ति बड़े स्तर पर रिक्त जगह पर अतिक्रमण कर व्यावसायिक उपयोग करते मिला। महापौर ने मौके पर ही उन्हें नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। तीन दिनों में अतिक्रमण हटाने नोटिस भी जारी किया गया। इतना ही नहीं व्यावसायिक दर पर शुल्क जमा करने कहा गया। बावजूद अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई निगम ने नहीं की। आज भी गोकुल नगर में छड़, ट्रैक्टर से लेकर अन्य सामान फैले हुए हैं।

संबंधित व्यक्ति ने कब्जा हटाने के लिए समय मांगा था, हमने समय भी दिया। इसके बाद मैं जानकारी नहीं ले पाई। आपके बताए मुताबिक मैं पुन: इस मामले में जानकारी लेती हूं। निगम की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। कब्जा तो हटाना ही होगा। चंद्रिका चंद्राकर, महापौर नगर निगम दुर्ग

निगम को चाहिए कि गोकुल नगर से कब्जा जल्द हटाए। लगातार स्थानीय लोगों की इसे लेकर आपत्तियां आ रही हैं। इस बारे में निगम अधिकारियों को भी अवगत कराया, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। सुरेंद्र सिंह राजपूत, स्थानीय पार्षद

ये गोकुल नगर प्रोजेक्ट
राज्य शासन ने 2007 के करीब गोकुल नगर योजना की शुरुआत की। इसके तहत दुर्ग निगम गोकुल नगर बसाने के नाम पर करीब एक करोड़ रुपए खर्च किया। इसमें दस दुकानें व चिकित्सकीय सुविधा के लिए भवन का निर्माण किया गया। बिजली सहित अन्य सुविधाएं दी गई। शहर के 67 खटाल संचालकों को जगह आवंटित की गई।

निगम ने जल्द ही शहर में संचालित सभी खटालों को हटाने की तैयारी की है। सभी को गोकुल नगर में विस्थापित किया जाना है। ताकि शहर को स्वच्छ रखा जा सके। हालांकि गोकुल नगर में निगम पेयजल व बिजली की पर्याप्त व्यवस्था नहीं कर पाया है। इसके कारण डेयरी व खटाल संचालक गोकुल नगर जाने से कतरा रहे हैं। निगम ने दावा किया है कि जल्द ही वहां समुचित व्यवस्था की जाएगी।

महापौर ने निरीक्षण के बाद तीन दिन में कब्जा हटाने के निर्देश दिए थे।

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