युवाओं में सहनशीलता की कमी बड़ी समस्या

4 वर्ष पहले
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वर्तमान समय में खर्चीले विवाह का प्रचलन बढ़ता ही जा रहा है। जनसामान्य को इससे दूर रहने होगा। आज कल पसंदगी का मापदंड सौंदर्य, हाइट और वाइट हो गया है। जहां पर तीनों चीज की वैवाहिक जीवन में उपलब्धता है, वहां फाइट निश्चित है। लड़कियों व लड़कों में सहनशीलता की कमी हो गई है।

इससे जैन समाज ही नहीं कोई भी समाज अछूता नहीं है। यह बात आनंद मधुकर रतन भवन में चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान शुक्रवार को महासती डाॅ. हेमप्रभा ने कहीं। उन्होंने वर्तमान विवाह में संस्कार पर विचार रखे। डाॅ. हेम प्रभा ने वैवाहिक जीवन के कई रोचक उदाहरण धर्मसभा में व्यक्त किए। उन्होंने बताया विवाह के बाद प|ी बोलती है, पति सुनता है। विवाह के कुछ दिनों के बाद पति बोलता, प|ी सुनती है। एक समय के बाद पति और प|ी बोलते हैं और पड़ोसी सुनता है। वैवाहिक जीवन के प्रारंभ में जीवन मीठा-मीठा लगता है, बाद में वही जीवन कसैला और बेस्वाद का हो जाता है। यदि वैवाहिक जीवन सुख-समृद्धि के साथ बीतता है, तब तो ठीक है। और नहीं तो नारी सब पे भारी कहावत चरितार्थ हो जाती है।

शुक्रवार को मधुकर भवन में धर्मचर्चा के दौरान उपस्थित समाज की महिलाएं।

आसुरी व आध्यात्म जीवन के बारे में दी जानकारी
धर्मसभा को डाॅ.सुप्रभा ने संबोधित करते आसुरी जीवन और आध्यात्म जीवन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा प्रत्येक आदमी अपने आपको धार्मिक मानता है। लेकिन सर्वे किया जाय तो सही रूप में धार्मिक व्यक्तियों की संख्या नगण्य है। इसलिए अपने अंतर्मन में धार्मिकता लानी होगी। उन्होंने सम, सम्वेग, निरवेग, अनुकंपा और आस्था का मानव जीवन में महत्व समझाया। धर्म सभा में जैन समाज के महिलाएं व पुरुष उपस्थित रहे। सभा के बाद श्रद्धालुओं के गौतम प्रसादी की व्यवस्था चंदनमल भेरूलाल बागमार परिवार ने की।

चातुर्मास
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