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2 साल से अटका बोरसी में दुकानों का आवंटन 4 बार बनी सूची, फिर दावा-आपत्ति, हंगामा

4 वर्ष पहले
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नगर निगम अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने को लेकर गंभीर नहीं है। 2 साल पहले बोरसी में करीब डेढ़ करोड़ रुपए खर्च कर 75 दुकानों व 104 चबूतरों का निर्माण किया गया। ताकि निगम की आय बढ़ाई जा सके, लेकिन दो साल बाद भी इन दुकानों का अलॉटमेंट नहीं हो पाया है। आवंटन को लेकर शुक्रवार को विवेकानंद सभागार में शिविर लगाया गया।

इसके लिए भी केवल 13 विस्थापितों व 104 चबूतरों के अलॉटमेंट के लिए बुलाया गया। इसकी प्रक्रिया के दौरान ही विस्थापितों ने जमकर हंगामा मचाया। उनका आरोप था कि उन्हें पहले सामने की तरफ दुकानें देने का भरोसा दिलाया गया। लेकिन निगम के अधिकारी ऐसा नहीं कर अब लॉटरी की बात कह रहे है। यह सरासर गलत है। इसी बात को लेकर करीब 2 घंटे तक विवाद हुआ। इसके बाद आवेदनकर्ताओं से दुकान नंबर 58 से 75 तक का अलॉटमेंट एक जगह पर करने की सहमति बनी और मामला शांत हुआ। इधर अब भी 62 दुकानों व 104 चबूतरे के आवंटन नहीं हो पाया है। जबकि आवंटन की प्रक्रिया 15 जून 2015 से शुरू की गई है। लेकिन अभी तक दुकानों का आवंटन नहीं हो पाया है। शिविर लगा तो विवाद हो गया।

शिविर में आ‌वेदनकर्ताओं ने आ‌वंटन के तरीके पर जताई आपत्तियां
दुकान और चबूतरों के आवंटन के लिए विवेकानंद सभागार में नगर निगम ने शिविर लगाया।

जानिए, आखिर कहां आ रही दिक्कत
दैनिक भास्कर की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि शुरू में करीब 3 हजार आवेदन आए। आवेदनों के सत्यापन के बाद दावा-आपत्ति की प्रक्रिया शुरू हुई। करीब 1 हजार आवेदनकर्ता पात्र पाए गए। इसे लेकर निगम तीन बार दावा-आपत्ति बुला चुका है। पात्रों के नाम गायब होने से पुन: आपत्ति दर्ज की जा रही। एक लाख से कम आय के शिक्षित व 18 से 40 वर्ष तक के शिक्षित बेरोजगारों को प्राथमिकता दी जानी है।

4 बार बन चुकी है सूची, हर बार गलती के कारण वापस की गई
शहरी विकास अभिकरण को निगम ने स्क्रूटनी के बाद 4 बार सूची भेजी, हर बार त्रुटि के चलते सूची वापस की गई। बोरसी में मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना के तहत इन दुकानों व चबूतरों का निर्माण किया गया है। खास बात यह है कि इन दुकानों के अलॉटमेंट की प्रक्रिया के दौरान निगम के 50 से अधिक अधिकारी व कर्मचारियों का विभाग से ट्रांसफर हो चुका है। इसके कारण यह मामला लगातार अटकता रहा है। जिससे निगम की आय भी प्रभावित हो रही है

गड़बड़ियां भी सामने आ चुकी
निगम अधिकारियों के मुताबिक बोरसी दुकान के अलॉटमेंट के दौरान त्रुटियां व गड़बड़ियां भी सामने आई। एक ही परिवार के 8 लोगों के नाम आवेदन में होना पाया गया। सास, बहू, पुत्र, भाई, बहन सभी ने आवेदन किया। आ‌वेदनों की स्क्रूटनी में यह बात जब सामने आई तो एक को छोड़ सभी के नाम हटाए गए। यह गलती नगर निगम के बजाय शहरी विकास अभिकरण ने पकड़ी।

12 जगहों पर 150 दुकानें खाली
निगम मामले में नहीं रहा कभी भी गंभीर
निगम बनाई गई दुकानों के अलॉटमेंट को लेकर कभी भी गंभीर नहीं रहा। 12 जगहों पर करीब 615 दुकानों का निर्माण किया। इसमें करीब 150 दुकानें अब भी खाली हैं। करीब 3 साल पहले निगम ने 16 लाख की लागत से 46 गुमटियां भी तैयार की। 34 गुमटियां जिला अस्पताल के सामने व 12 गुमटियां स्टेशन के सामने रखा गया। रेलवे की आपत्ति के बाद गुमटियों को हटाकर महाराजा चौक में रखा गया।

13 विस्थापितों को किया अलॉटमेंट
शुक्रवार को शिविर लगाकर अलॉटमेंट की प्रक्रिया की गई। । 13 को विस्थापितों को दुकानों का आवंटन किया गया। बोरसी में रोहित मिश्रा दुकान नंबर 61, मुकुंद यादव- 67, बालाराम सेन - 60, कमलेश साहू -66, लतखोर -65, रोहित साहू -62, ब्रजेश मिश्रा- 69, विभीषण साहू -68, गंगाराम साहू - 70, गजानंद - 59, श्याम देवांगन -50, संतोष सेन - 64, अशोक साहू- 63 नंबर की दुकान दी गई।

शिविर में हंगामे जैसी बात नहीं हुई
हंगामे जैसी बात नहीं है, पूर्व में जो बातें विस्थापितों को बताई गई थी, उसके समझ में फेर हुआ। वे सामने की तरफ से एक साथ दुकानें चाह रहे थे, जो नियमानुसार संभव नहीं था। उन्हें समझाइश के बाद दुकानें ड्रा के आधार पर दी गई। शेष दुकानों का अलॉटमेंट जल्द किया जाएगा। शिवेंद्र परिहार, प्रभारी राजस्व नगर निगम दुर्ग

जानिए, कहां कितनी दुकानें खाली

दुकानें कुल खाली
सदर नाका ग्रीन चौक 11 04

डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्कूल 17 02

धमधा नाका कांजी हाउस 12 09

धमधा नाका 12 09

बोरसी हाट 75 62

सुभाष स्कूल अग्रसेन चौक 09 05

गंजपारा कांप्लेक्स 104 18

महिला समृद्धि बाजार 180 16

मोती कांप्लेक्स 24 04

बैगापारा मिनी स्टेडियम 55 08

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