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20 घंटे तक भूखे-प्यासे एक ही जगह पर बैठे रहना पड़ा

7 वर्ष पहले
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भयंकरबाढ़ ने तबाही मचा दी थी। 20 घंटे भूखे प्यासे एक ही जगह पर बैठे रहे। जन्नत का मंजर ऐसा था कि किसी का भी दिल दहल जाए। झेलम नदी के किनारे जिस होटल में रूके थे, वहां से बचकर निकलना नामुमकिन नजर रहा था। होटल के ग्राउंड फ्लोर पर पानी भरने के बाद ऐसा लगने लगा था कि थोड़ी देर में होटल की बिल्डिंग धसक जाएगी। वहां ठहरे 20 परिवार हर पल ईश्वर को याद कर रहे थे। उसी समय सेना के जवान देवदूत बनकर आए।

श्रीनगर में भयंकर बाढ़ का प्रकोप झेलकर लौटे तिरगा दुर्ग के अशोक देशमुख च्युतक कारगिल में हाइड्रो पॉवर प्लांट में जूनियर इंजीनियर हैं। उनके लौटने से परिजनों, रिश्तेदारों मित्रों का खुशी का ठिकाना नहीं है। छह दिनों तक कोई संपर्क नहीं होने से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। अशोक के अनुसार सेना की इतनी मदद नहीं मिलती तो हालात और भयानक होते। बारिश के कारण मोबाइल नेटवर्क ध्वस्त हो गया था और बिजली भी नहीं थी। अशोक के रिश्तेदार डॉ. राजेंद्र हरमुख ने बताया कि जवान बेटा के लौटने से पूरे परिवार में दिवाली सा माहौल है। अशोक 19 सितंबर को लेह से कारगिल के लिए ड्यूटी पर रवाना होंगे।

नावमें निकले होटल से

अशोक6 सितंबर को श्रीनगर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि जब वे पहुंचे हल्की बारिश हो रही थी। उन्हें श्रीनगर से 220 किलोमीटर दूर सड़क रास्ते से कारगिल जाना था, लेकिन भूस्खलन के कारण रास्ता बंद था। मजबूरी में उन्हें श्रीनगर में झेलम नदी के किनारे होटल में रूकना पड़ा। झेलम में भयंकर बाढ़ आई हुई थी, लेकिन सभी को लगा कि पानी थमने से बाढ़ कम हो जाएगी और वे यहां से सुरक्षित निकल जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। झेलम का पानी होटल में घुसने लगा। होटल में ठहरे लोग इसके पहले कि कुछ सोच पाते फंस गए। कुछ ही मिनटों में पानी ग्राउंड फ्लोर में भर गया। किचन तबाह हो गया। लोग प्रथम तल पर चले गए। वे सब बाहर निकलने के लिए मदद की गुहार लगाने लगे। 7 सितंबर की रात ढाई बजे रेस्क्यू टीम ने नाव से सभी को बारी-बारी से बाहर निकालकर राजभवन के पास एक होटल में पहुंचाया।

10 हजार लोगों की लगी थी लाइन

राजभवन के पास 10 हजार से ज्यादा लोगों की लाइन लगी हुई थी। यहां पर एक ब्रेड नसीब हुआ। अगले दिन केला पीने का पानी दिया गया। यहां रेस्क्यू टीम की प्राथमिकता बच्चे, महिला बुजुर्गों को निकालने की था। पांच दिन बाद अशोक का नंबर आया। 11