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इधर राशियोंके आधार पर रंग बताने का प्रचलन अधिक बढ़ा

7 वर्ष पहले
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इधर राशियोंके आधार पर रंग बताने का प्रचलन अधिक बढ़ा है। रक्षा-बंधन, होली आदि पर्व -त्योहारों में ज्योतिषी बताते रहते हैं कि अमुक राशि वाले इस रंग की राखी, अबीर का इस्तेमाल करें, अमुक रंग का प्रयोग करें इसी तरह दुर्गापूजा में भी राशि के अनुसार पूजा सामग्री का निर्देश दिया जा रहा है, जो तो ज्योतिष-सम्मत है और धर्मशास्त्र -सम्मत ही। हमारे यहां देवता-विशेष के अनुसार कुछ विशेष विधियां बताई गई हैं, कि राशि के अनुसार। इन ज्योतिषियों से पूछना चाहिए कि क्या मेष राशि वाले देवी को बेलपत्र, शमीपत्र गुग्गुल का धूप अर्पित करें, क्योंकि ये शत्रुराशियों के रंगवाली हैं। इसी तरह क्या मेष राशिवाले हरी सब्जियां खाना छोड़ दें? सभी राशियों की मित्र एवं शत्रु राशियां अवश्य हैं, उन ग्रहों का एक रंग भी बताया गया है। इसका मतलब यह नहीं कि जिनके लिए शनि अशुभ हो, वे बालों को काला रखें, जिनके लिए चंद्र- शुक्र अशुभ हों, वे जल पिएं, चावल खाएं। ग्रहराज सूर्य की किरणों में ही सभी रंग हैं ,जो जीवन के लिए भी आवश्यक हैं। एकांगी दृष्टि उचित नहीं। हां , अपने दैनिक उपयोग में शत्रु राशि से सम्बंधित रंगों के कम प्रयोग करने का निर्देश किया जा सकता है, परन्तु एकदम नहीं प्रयोग करने से शरीर में कई चीजों की कमी सकती है। फिर शास्त्र-विहित पूजा, व्रत -त्योहारों में ऐसा अंधेर क्यों? हमारे धार्मिक अवसर खास -खास वस्तुओं के उपयोग से जीवन को स्वस्थ , सुखी एवं सुसंस्कृत बनाने के लिए ही बने हैं। }

राशि के अनुसार पूजा सामग्री का रंग तय करना अनुचित

मार्कंडेय शारदेय ज्योतिषाचार्य