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परिजनों की रुचि पर ध्यान दीजिए

7 वर्ष पहले
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परिवार मेंकभी-कभी हर सदस्य की इच्छा हो जाती है कि परिवार की कुछ गतिविधियां उसके अनुसार चले। कुछ सदस्य जिद पर उतर आते हैं। जो सदस्य जिद्‌दी नहीं होते, थोड़े संवेदनशील होते हैं वे भीतर ही भीतर घुटने लगते हैं कि मेरी क्यों नहीं सुनी जाती। देखिए, हर सदस्य के भीतर गुण और दुर्गुण होते हैं। एक छत के नीचे रहना है तो इनसे तालमेल बैठाना ही होगा। हम उनके व्यक्तित्व को बदल सकते हैं और ही उनके लिए हमारे व्यक्तित्व को परिवर्तित किया जा सकता है, इसलिए जब तक वंश की कोई विशेष नीति आहत हो रही हो और केवल रुचि का मामला हो तो बेकार दिल पर लें। सबकी रुचि के अनुसार जीवन जीने के रास्ते परिवार में निकालना ही होंगे, इसलिए परिवार के अन्य सदस्यों की रुचियों के प्रति जागरूक रहें और उन्हें पूरा करने में अतिरिक्त रूचि दिखाएं। इससे नजदीकियां बढ़ती है। आज-कल लोग पास-पास रहने के बाद भी साथ-साथ नहीं रह पाते। परिवार के सदस्यों को जब यह लगने लगता है कि कोई हम पर ध्यान दे रहा है तो उसे ऊर्जा मिलती है। मंच पर कलाकारों या नेताओं को आप देखिएगा वे बड़े एनर्जेटिक दिखेंगे, क्योंकि बहुत सारे लोगों का ध्यान उन पर होता है। जब हम कई लोगों की दृष्टि का केंद्र होते हैं तो हमारे भीतर अपने आप एक ऊर्जा जाती है, इसीलिए यह प्रयोग परिवार में किया जाना चाहिए। जब सदस्य को यह महसूस होता है कि मेरा भी ध्यान रखा जाता है तो यह ध्यान का विचार उसे ऊर्जावान बनाकर प्रसन्न कर देता है। पं.विजयशंकर मेहता | humarehanuman@gmail.comweb:hamarehanuman.com

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