बालोद. यह एक सरकारी शिक्षक के जुनून की कहानी है। नाम है राधेलाल साहू। उम्र 51 साल। बालोद की ग्राम कोहंगाटोला के स्कूल में संस्कृत पढ़ाते हैं। पर एक खासियत उन्हें औरों से जुदा करती है और वो है खेल और प्रतिभावान गरीब खिलाडिय़ों के प्रति उनका लगाव।
लगाव भी ऐसा कि अपने वेतन के 35 हजार रुपए में से हर दो माह में 10-12 हजार रुपए खिलाडिय़ों की जरूरतों पर खर्च कर देते हैं। अगर जरूरत ज्यादा हुई तो उसके लिए हर कदम उठाने को भी तैयार। राधेलाल का यह जुनून रंग भी लाने लगा है। अब तक उनकी मदद से 30 बच्चे नेशनल गेम्स खेल चुके हैं। कुछ ने पदक भी जीता है। एक खिलाड़ी की तो नौकरी भी लग गई।
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खबर: ब्रजेश पांडेय