भिलाई. टोकन के बहाने आरटीओ ने ओवरलोड वाहनों को छूट दे रखी है। इसका सीधा असर पब्लिक पर पड़ रहा है। सड़कें समय से पहले टूट रही हैं। ओवरलोडेड गाड़ियां शहर की मुख्य सड़कों, सर्विस लेन और अंदरूनी गलियों में कहीं भी पार्क की जा रही है। इसके कारण हादसे हो रहे हैं। दो महीने में 30 से ज्यादा छोटी बड़े हादसे इसी कारण हुए हैं।
असीम माथुर, रीजनल ट्रांसपोर्ट इंस्पेक्टर
हर दूसरे दिन औसतन एक दुर्घटना इसी वजह से ओवरलोडवाहनों से शहर आउटर में सड़क दुर्घटना बढ़ गई है। आए दिन ट्रक और माल वाहकों के बीच में भिड़ंत हो रही है। इसमें लोगों की जान भी जा रही है। आरटीओ और पुलिस ने इस पर अंकुश लगाने के लिए कोई प्लानिंग नहीं की। ओवरलोड वाहनों पर सिर्फ दिखावे की कार्रवाई की है। पुलिस अधिकारियों ने भी इसे स्वीकार किया कि ओवरलोड वाहनों से दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है।
शहर में ट्रैफिक का दबाव बढ़ा
शहर में ट्रैफिक का दबाव है। इसकी मुख्य वजह है, हाइवे और सर्विस लेन में ओवरलोड वाहनों का आवागमन। रात में हाइवे किनारे ढाबों के सामने भारी वाहन खड़े भी रहते हैं। इन पर मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी पुलिस की है। टोकन सिस्टम के कारण हाइवे पर खड़े ओवरलोडेड वाहनों पर कार्रवाई नहीं करती। पब्लिक सर्विस लेन पर चल नहीं पा रही है।
समय से पहले टूट रहीं शहर की सड़कें
रिटायर्ड इंजीनियर एएन श्रीवास्तव के अनुसार फोरलेन, सर्विस लेन, बायपास और मोहल्ले की सड़कें अक्सर खराब मिलती है। इसके पीछे बड़ा कारण यह है कि क्षमता से अधिक वजनी वाहनों का आवागमन। सड़कों में ओवरलोड वाहन धड़ल्ले से चल रहे हैं। खुद निगम के इंजीनियर भी स्वीकार चुके हैं कि भारी वाहनों की वजह से सड़कों की लाइफ खत्म हो रही है। जो सड़क पांच साल चलनी चाहिए, वह दो साल में दम तोड़ रही है।
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