(मुठभेड़ के दौरान मतदान कर्मी को कवर कर नक्सलियों पर निशाना साधता जवान।)
कांकेर. मतदान दल से थोड़ी ही दूरी पर बम विस्फोट होते ही गोलीबारी शुरू हो गई। ऐसे में जवानों ने कहा कि जो जहां है, वहीं लेट जाएं। आदेश मिलते ही कुछ खेत में तो कुछ दलदल वाली सड़क पर ही लेट गए।
इस दौरान घायल जवान को कुछ साथी मौके पर मौजूद दवाइयों से इलाज मुहैया कराने लगे, तो कुछ जवान दल को प्रोटेक्शन देते हुए उनके इर्द गिर्द लेट उन्हें कवर करने लगे। आंखों के सामने इतना इतना भयानक मंजर था, लेकिन बीएसएफ की सुरक्षा से सभी आश्वस्त भी थे।
जवानों ने चुटकुले सुनाकर माहौल को खुशनुमा बना दिया
जवानों ने चुटकुले सुनाकर माहौल को खुशनुमा बना दिया, जिससे मतदान कर्मी भी लेटे लेटे ही हंसी से लोटपोट होते रहे। कुछ जवान तो यह तक कहते रहे कि नक्सलियों ने तो एक बम फोड़ा है यदि ऊपर से आदेश आ जाए तो हम अभी पूरी दिवाली मना लें, हमारे पास तो एक से एक पटाखे हैं, लेकिन उनके हाथ बंधे हैं।
यह अनुभव बेठिया में चुनाव संपन्न कराकर लौटे मतदान दल ने भास्कर के साथ साझा किए। अंतागढ़ उपचुनाव में संवेदनशील क्षेत्रों में भले ही मतदाताओं पर नक्सली दहशत हावी रहा हो, लेकिन चुनाव संपन्न कराने अंदरूनी क्षेत्र पहुंचे मतदान कर्मियों के सामने विस्फोट और गोलीबारी होने के बावजूद उन्हें नक्सली खौफ अपने कर्तव्य से नहीं डिगा सका।
मुठभेड़ में बीएसएफ जवानों द्वारा मुहैया कराई जा रही सुरक्षा और हौसला अफजाई से मतदान कर्मियों का आत्मविश्वास दोगुना हो गया। यही कारण है आंखों के सामने पहली बार इतना सब कुछ होने के बावजूद वे नक्सलियों की मांद में चुनाव कराने पहुंचे और बिना किसी डर भय के पूरी कामयाबी के साथ मतदान पूर्ण कर लौटे।
मुठभेड़ का सामना करने के बाद मुस्कान बिखरते पहुंचा मतदान दल
पूर्व में हुए चुनावों से लौटे मतदान दलों के नजारों से बिल्कुल अलग था रविवार को कांकेर पीजी कॉलेज का नजारा। दो दिन पूर्व मुठभेड़ और विस्फोट का सामना करने के बाद भी बेठिया का मतदान दल मुस्कान बिखरते कांकेर पीजी कॉलेज पहुंचा।
चेहरे पर किसी भी प्रकार का दहशत नहीं था। आते ही साथियों से मिलकर विस्फोट और मुठभेड़ के किस्से ऐसे सुनाए जैसे किसी मुसीबत से निकल कर नहीं, बल्कि फिल्म की कहानी सुना रहे हों। दल में शामिल सदस्यों ने दैनिक भास्कर से चर्चा करते हुए कहा कि वहां तो बीएसएफ के साथ पूरा दोस्ताना माहौल था। बीएसएफ के जवानों का प्रोटेक्शन और कार्रवाई देखने से ही साफ था की नक्सलियों की कोई गोली उन्हें छू नहीं पाएगी। फिर दहशत किस बात का।
दल के पीठासीन अधिकारी जोगेंद्र प्रसाद फरदिया, सदस्य हरि केशव डडसेना, प्रदीप साहू, लेख राम ध्रुव तथा उलेश्वर प्रसाद ने बताया कि जब पीवी 89 से बेठिया के लिए चले थे कि इसी समय सुबह 11.45 बजे दो सौ मीटर दूर एक विस्फोट हुआ। तेज आवाज के साथ धूल का गुबार उठने लगा और गोलियों की आवाज सुनाई देने लगी। विस्फोट की जद में सामने चल रहा एक जवान आ गया। इस दौरान जो कुछ देखा और सुना वह सब कुछ जिंदगी में पहली बार था। इस दौरान घर की याद जरूर आई, लेकिन वह भी इसलिए कि यह बता दें कि हम पूरी तरह सुरक्षित हैं, हमें लेकर कोई चिंता करें।
जवानों ने सुरक्षा ही नहीं, चाय-नाश्ता भी दिया
मतदान दल ने बताया कि मतदान कराने के दौरान जरा भी ऐसा नहीं लगा कि वे नक्सलियों के कब्जे वाले किसी जंगल में हैं। करीब आधा घंटा तक जमीन पर लेटे रहने के बाद जब स्थिति सामान्य हुई तो सभी एक-एक कर वहां से उठे और सड़कों पर पहुंचे। जवान हमें सुरक्षित वापस पीवी 89 पहुंचाना चाहते थे, लेकिन हमें उन पर विश्वास था इसलिए वहां से वापस जाने मना कर दिया।
जवान हमें सुरक्षित जगहों पर बैठा आगे रोड ओपनिंग करने लगे। इसी दौरान पीछे से बैकअप टीम आ गई और घायल जवान को बांदे के लिए रवाना किया गया। करीब 4 घंटे बाद एक बार फिर हम शाम 4 बजे बेठिया के लिए निकले। यहां से करीब 8 किमी दूर हम जंगल के रास्ते होकर वहां पहुंचे। इस दौरान बीएसएफ के जवान हमारी सुरक्षा करने के साथ-साथ हमें अपने पास मौजूद नाश्ता चाय भी देते रहे।
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