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बादलों के छंटने से किसानों ने ली राहत की सांस

7 वर्ष पहले
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बादलछंटने के बाद अब किसान राहत महसूस कर रहे हैं। इससे रुके हुए मिसाई कार्य ने फिर से रफ्तार पकड़ ली है। बीते दो-तीन दिन से आसमान में छाए बादल एवं हल्की बूंदा-बांदी से किसान चिंतित थे। विशेषकर बारिश की आशंका से किसान मिसाई कार्य नहीं कर पा रहे थे, वहीं खलिहानों में रखे धान की सुरक्षा के लिए भी वे चिंतित दिख रहे थे।

क्षेत्र के अधिकांश किसानों ने फसल कटाई पूरी कर ली है। खेतों से धान की फसल खलिहानों में डंप की जा चुकी है। किसान मौसम के उतार चढ़ाव देख आशंकित है कि यदि मिसाई के वक्त ही बारिश हो जाए, तो परेशानी बढ़ जाएगी। साथ ही धान के खराब हो जाने से हानि की आशंका भी बनी हुई है, जबकि किसानों में जल्द मिसाई कर मंडियों में धान पहुंचने की होड़ भी लगी हुई है। विनोद साहू, किरण सिंह, अविनाश अवस्थी, गोविंद सिंह सरदार, रामप्रसाद चौधरी सहित अनेक किसानों का कहना है कि बादलों के मौसम में मिंसाई करना रिस्क रहता है, वहीं इससे कीट-पतंग के प्रकोप से गौभी, बैगन सहित अनेक सब्जी फसलों में नुकसान की आशंका दिखने लगी है। साथ ही टमाटर की फसल लेने वालो को भी नुकसान होने लगा है। टमाटर के ज्यादा पकने से खपत कम हो रही है। आलम यह है कि 20 रुपए किलो में बिकने वाला टमाटर एक सप्ताह के अंदर 5 रुपए में बिकने लगा है।

धान मिसाई में व्यस्त किसान।

कटाई मिंजाई की जल्दबाजी

किसानोंको डर है, कि अगर बारिश हुई तो उनका धान भीग जाएगा और उनको धान बेचने में परेशानी आएगी। इस साल रमन सरकार के नए नियम के चलते किसानों का आधे से भी कम धान की खरीदी केन्द्रों में समर्थन मूल्य पर बिक पाएगा। शासन द्वारा कहने को तो 15 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदने की घोषणा की गई है, कुछ किसानों ने बताया कि अभी व्यापारी धान की कीमत 1000 से ऊपर नहीं ले रहे हैं। ऊपर से बार बार हो रहे बारिश की संभावना के चलते किसानो को और ज्यादा परेशानी हो रही है।