जिद्द ने अनपढ़ महिला को बनाया व्यवसायी
जिद करो
दुनिया बदलो
दुरस्थ अंचलों में भी शिक्षा के प्रति लगाव लोगों में आने लगा है संसाधन विहीन क्षेत्र होने के बावजूद कुछ करने की जिद ने ना केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधारी बल्कि उनके बच्चे भी शिक्षित होने के लिए अब प्रयासरत है।
भेलवा गांव की निरक्षर फुलेकरिया आर्थिक स्थिति में शुरू में ठीक नहीं थी पर वर्तमान में वह मौसमी उपज बेचकर 7-8 लाख रुपए सालाना कमा भी रही है और अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा भी दिला रही है। आजीविका के लिए रोज मजदूरी खोजने वाली फुलकेरिया अब स्वयं तो संपन्न हो रही है, साथ ही दूसरों को भी रोजगार दे रही है। हालांकि इसके लिए उसे जीवन में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए अडिग रही। कभी स्कूल का मुंह नहीं देख पाने वाली फुलकेरिया अपने अपने बच्चों को अच्छे से अच्छे शिक्षा दिलाना चाहती है। फुलकेरिया का पति भी निरक्षर है। उस वक्त बेहद गरीबी में उसका एवं उसके पति का जीवनयापन होता था। तब वह यह सोचकर निराश हो जाती थी कि अगर वह पढ़ी-लिखी रहती, तो अवश्य कुछ करती। इससे परिवार का लालन-पालन अच्छे ढंग से होता। शेष पेज 12
यही सोच ने कुछ करने एवं सीखने के लिए फुलकेरिया को प्रेरित किया और उसने कुछ कर दिखाने की जिद ठान ली। उधारी के थोड़े से रुपए से गल्ला व्यवसाय शुरू किया। पढ़े-लिखे बच्चों से पढ़ना लिखना थोड़ा बहुत सीखा। महिला समूह गठन के बाद बैंक से लोन निकाले। इसमें महिलाओं ने अलग-अलग धंधा करने के लिए अपने सामर्थ्य के अनुसार समूह से कर्ज लिया। फुलकेरिया ने 2008 में 9 हजार रुपए लेकर काम शुरू किया। इसके बाद उसने 2011 में 1.28 लाख रुपए कर्ज लिए। अब फुलकेरिया अपने व्यवसाय में पूरी तरह पारंगत हो चुकी थी। वह आज इमली, महुआ, डोरी, बेर,धानकी बिक्री सहित हर सीजन के गल्ला व्यापार कर रही है। वह साल में लाखों का टर्नओवर कर 7-8 लाख रुपए आसानी से कमा लेती है। अपने व्यापार के काम को फुलकेरिया स्वयं निपटाती हैं। एक समय तंगहाली में जी रही फुलकेरिया अब गांव के दूसरे करीब 50-60 मजदूरों को रोजगार दे रही है। कार्य में अधिकता के समय वह गांव के मजदूरों से कार्य कराती है। इसके कारण दर्जनों मजदूरों को साल में करीब 50 दिन से ज्यादा का रोजगार मिल जाता है। अपनी मेहनत और लगन से वह गांव ही नहीं बल्कि आसपास की महिलाओं के लिए एक मिसाल बन चुकी है।
बच्चों को दे रही अच्छी शिक्षा
फुलकेरिया की एक पुत्री अल्पना 9 वीं कक्षा में पढ़ रही है। छोटी लड़की अंशु पंडरीपानी इंग्लिश मीडियम स्कूल में 4 थी कक्षा में शिक्षा ग्रहण कर रही है। फुलकेरिया अपने बड़े लड़के अनुज मिंज को इंजीनियरिंग पढ़ा रही थी। फुलकेरिया बताती है कि बेटे की मौत से वह टूट सी गई थी। अपने लाल एवं बुढ़ापे की लाठी के चले जाने से वह सदमे में थी। पर दो बच्चियों के भविष्य को देखते हुए उसने सोचा कि जो करना है अब उसे ही करना है। उसने हिम्मत जुटाई और पूरी मेहनत और लगन से अपने काम में जुट गई। जिसका सकारात्मक परिणाम सबके सामने है।
हौसला