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धर्म रक्षा का माध्यम है श्रीमद भागवत कथा: कृष्ण वेणु
स्थानीयदुर्गा मंदिर में नवरात्र के प्रथम दिवस ज्योतिकलश की स्थापना के साथ श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया गया( हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने पहले दिन की कथा का श्रवण किया। पहले दिन महाराज ने कथा की भूमिका पर प्रकाश डाला और वर्तमान समय के इस कथा को धर्म रक्षा का प्रमुख माध्यम बताया। वर्तमान परिवेश में पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव को उन्होंने संस्कृति के लिए घातक बताया और संस्कारों के संबल के साथ वर्तमान परिवेश में फैली विकृतियों से निपटने के मार्ग भी सुझाए।
महाभारत काल का वर्णन करते हुए उन्होंने राजा परीक्षित के विपत्ति की तुलना आज की कुरीतियों कुसंस्कारों से की जिसमें उन्होंने समाज में फैली बुराइयों पर प्रकाश डाला। महाराज नवीन कृष्ण ने बताया कि जब भी धर्म की हानि होती है, तो दुनिया में पापाचार बढ़ने लगता है। जिसके उपचार के लिए विधाता ने व्यवस्था बनाई हुई है।धार्मिक आयोजनों के साथ सत्संग से धर्म संस्कृति की रक्षा होती है। रहन सहन आचार-विचार में अचानक आए परिवर्तन से निपटने के लिए उन्होंने सत्संग को बेहतर माध्यम बताया।
मातृ शक्ति खुड़िया वाहिनी ने शुरू किया भंडारा
नौदिन चलने वाले इस कार्यक्रम में मातृ शक्ति का भरपूर सहयोग समिति को मिल रहा है। स्थानीय खुड़िया वाहिनी महिला मंडल ने पूरे नौ दिनों के लिए भंडारा प्रसाद का वितरण शुरु कर दिया है। समिति के अध्यक्ष मधुसूदन भगत ने बताया कि पूरे नौ दिनों तक लगातार भंडारे का संचालन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस वर्ष लगभग 223 मनोकामना ज्योति प्रज्वलित की गई है।