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पर्यटन के क्षेत्र में चिरमिरी की उपेक्षा हुई

7 वर्ष पहले
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पर्यटनकी अपार संभावनाओं के बाद भी क्षेत्र के विकास की ओर ध्यान नहीं दिया गया है। यदि पर्यटन को बढ़ावा देने का जरा सा भी प्रयास किया जाता तो आज चिरमिरी की जनसंख्या घटने की बजाए बढ़ जाता। ऐसा होने पर चिरमिरी नगर निगम के अस्तित्व पर संकट नहीं आता। पर अब समय गया है कि प्रशासनिक अिधकारियों, जनप्रतिनिधियों सामाजिक संगठनों के सदस्यों को मिलकर क्षेत्र को पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करना होगा। ऐसा होने पर नगर निगम के अस्तित्व को जो संकट हो वह स्वयं दूर हो जाएगा।

चिरमिरी क्षेत्र में शुरू से ही पर्यटन क्षेत्र की अपार संभावनाएं हैं। पर इसे हमेशा कोयला उत्खनन क्षेत्र के ही रूप में देखा गया। यही कारण है कि कभी किसी ने यहां पर्यटन क्षेत्र को बढ़ाने का प्रयास तक नहीं किया। बीच-बीच में स्थानीय नागरिक क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने की मांग करते रहे पर किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। अब स्थिति यह है कि कई कोयला खदानों के बंद होने के कारण अब चिरमिरी की जनसंख्या घटने लगी है। इसके कारण चिरमिरी नगर निगम के अस्तित्व पर ही बन आया है।

रोप-वेका उपयोग किया जा सकता है-सन् 1970के दशक में निजी कोल माइंस इंडस्ट्रीज द्वारा गेल्हापानी नार्थ चिरमिरी से रेलवे स्टेशन तक कोयला परिवहन के लिए रोप-वे का उपयोग किया जाता था। इसका कारण था कि चिरमिरी पहाड़ी क्षेत्र है और उस समय क्षेत्र की सड़कें विकसित नहीं थी। इसी के साथ अन्य विषम परिस्थितियों को देखते हुए कोयला परिवहन के लिए यह सबसे अच्छा माध्यम था। समय बीतने के साथ ही क्षेत्र में सड़कों का निर्माण होता गया। इसके बाद कोयला परिवहन सड़क मार्ग से किया जाने लगा। इसी के साथ ही रोप-वे का इस्तेमाल बंद हो गया। रोप-वे चलने के दिनों की याद आज पांच दशक बाद भी क्षेत्र में अवशेष के रूप में बचा हुआ है।

सिर्फ आश्वासन ही दिया गया

निगमस्थापना के बाद से कांग्रेस हो या भाजपा दोनों ने ही चिरमिरी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की बातें कही पर किया कुछ नहीं। अब स्थानीय लोगों की आंखें खुल गई है और वे क्षेत्र को पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की मांग करने लगे हैं। लोगों के अनुसार रोप-वे को पब्लिक ट्रांसपोर्ट के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे आवागमन के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। रोप-वे के उपयोग से कई स्थानों कीे दूरी कम की जा सकती है। क्षेत्