सुविधाओं के अभाव में कैसे पढ़ें-बढ़ें
स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने, छात्रों के स्वास्थ्य व खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए प्रशासन ने कई योजनाएं चलाई हैं। वहीं मैदानी हकीकत इससे अलग है। शासकीय स्कूलों में कहीं नवनिर्मित भवनों की स्थिति खराब होती जा रही हैं तो कहीं खेल मैदान ही नहीं हैं। जिन स्कूलों में खेल मैदान है वहां स्पर्धा आयोजित करना संभव नहीं है।
शासन से शिक्षा स्तर को सुधारने प्रयासरत है। इसके बाद भी स्तर गिरता जा रहा है। किसी स्कूल का भवन खस्ताहाल है तो कहीं शिक्षक नहीं है। खेल मैदान तो कुछ ही स्कूलों में है उनका भी हाल-बेहाल है। लाइब्रेरी व लैब का तो हाल-बेहाल है।
स्कूल में लाइब्रेरी नहीं: शिक्षा का अनिवार्य अधिकार अधिनियम के तहत स्कूल में लाइब्रेरी स्थापित करना हंै। शासन के आदेश के मुताबिक ब्लॉक के हर स्कूल में लाइब्रेरी की स्थापना की जानी थी। बावजूद इसके स्कूल में लाइब्रेरी शुरू करने के लिए अलग से भवन नहीं हुई हैं।
विज्ञान लैब के लिए
अलग से भवन नहीं
स्कूल में गणित व विज्ञान के शिक्षक ही नहीं हैं
शासन ने गणित-विज्ञान विषय को महत्व देते हुए इस साल हाई, हायर सेकेण्डरी स्कूलों में पहला-दूसरा पीरियड इसी विषय के लगाने का निर्देश जारी किया है। इस स्कूल में तो इन विषयों के शिक्षक ही नहीं हैं। स्कूल में 6-12वीं तक की कक्षा लगती हैं। 298 बच्चे पढ़ते हैं। हायर सेकेण्डरी में एक्सपर्ट टीचर होने चाहिए, पर यहां एक-एक टीचर दो-से तीन विषय पढ़ाते हैं। यहां तक कि खुद प्राचार्य भी बच्चों को पढ़ाने में लगे हुए हैं।
प्रबंधन ने की पुराने भवन की मरम्मत की मांग
स्कूल प्रबंधन ने पुराने भवन की मरम्मत की मांग की हैं, जिससे लाइब्रेरी व लैब को उस भवन में संचालित किया जा सके, जिससे छात्र-छात्राओं को इसका लाभ मिल सके। विद्यालय में शिक्षकों की कमी के वजह से एक शिक्षक कई विषयों को पढ़ा रहें हैं यहा तक कि स्वंय मैं खुद गणित पढ़ा रहा हूं, शिक्षकों की भरपाई हो जाने से अध्यापन और सरल व सुलभ होगा। एमपी मिश्रा, प्राचार्य, शाउमा विद्यालय, चित्ताझोर, पोड़ी।
विज्ञान के प्रैक्टिकल के लिए अलग से लैब के लिए उपयुक्त जगह नहीं होने से स्कूल को उपलब्ध कराई गई विज्ञान सामग्री एक ही कक्ष में रख दी गई हैं। भौतिक, रसायन, व जीव विज्ञान तीनों लैब की सामग्री एक ही कक्ष में रखी हैं, जिससे प्रेक्टिकल करने में छात्र-छात्राओं को परेशानी होती हैं। ऐसे ही चित्ताझोर, पोड़ी स्थित शासकीय उमा विघालय में खेल मैदान पर पिछले छह माह से भी अधिक समय से टूटे हुए भवनों का मलबा पड़ा हुआ हंै। निगम ने नए भवन के निर्माण के समय पूराने भवन का टूटा हुआ मलबा खेल मैदान में डाल दिया था। बच्चे यहां मलबे के ढेर पास खेलने आ जाते हैं। ऐसे में यदि कोई बच्चा हादसे का शिकार होता है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? इस मामले में स्कूल प्रबंधन से बात की तो उनका कहना है कि मलबा हटाने के लिए कई बार अधिकारियों व जनप्रतिनिधिओं का ध्यान इस ओर आकर्षित किया गया, लेकिन आश्वासन ही मिला।