तीन साल में नहीं लगा वाटर कूलर इस गर्मी में भी प्यासे रहेंगे यात्री
मुसाफिरों को रेलवे स्टेशनों में ठंडा पानी देने की योजना अफसरशाही के भेंट चढ़ गई है। रेल प्रशासन ने वर्ष 2012-13 के बजट में उसलापुर, अंबिकापुर, गेवरा रोड, पेंड्रा रोड जैसे बिलासपुर मंडल के 25 स्टेशनों का चयन किया और सभी स्टेशनों में एक-एक वाटर कूलर लगाने 12.64 लाख रुपए की मंजूरी दी। लेकिन 3 साल बाद भी महज 3 स्टेशनों में ही वाटर कूलर लगाए जा सके हैं। योजना पर इलेक्ट्रिकल और इंजीनियरिंग विभाग रस्साकशी भारी पड़ गया है। हालात ऐसे हैं कि इस गर्मी में भी यात्री टंंकी के उबलते पानी से हलक तर करने को मजबूर होंगे।
बिलासपुर की तरह छोटे स्टेशनों के भी यात्रियों को पीने का ठंडा पानी मिले, इसके लिए वाटर कूलर लगाने की योजना बनी। तात्कालिक डीआरएम ने अपने फंड (माइनर वर्क) से 12.64 लाख रुपए मंजूर किए। इस राशि से 25 स्टेशनों के सबसे ज्यादा भीड़ वाले प्लेटफार्म में वाटर कूलर लगना था। उम्मीद थी कि वाटर कूलर 2013 के अंत तक लग जाएंगे और यात्रियों को गर्मी में ठंडा पानी मिलने लगेगा। पीने के पानी जैसी प्राथमिक जरूरत को लेकर भी अफसरों का रवैया गैर संजीदगी भरा है। वाटर कूलर लगाने के लिए टेंडर की प्रक्रिया में ही डेढ़ साल लग गए। दिसंबर 2014 में टेंडर हुआ, अगले 6 महीने में वाटर कूलर लगाने का दावा किया गया। साल 2015 बीत गया लेकिन वाटर कूलर नहीं लगे। योजना से जुड़े अफसरों का दावा है कि उसलापुर, अंबिकापुर और मनेंद्रगढ़ स्टेशन में वाटर कूलर लगा दिए गए हैं। शेष स्टेशनों के लिए तकनीकी खामियों को दूर किया जा रहा है।
यहां लगना था वाटर कूलर: उसलापुर, अंबिकापुर, मनेंद्रगढ़, शहडोल, अंबिकापुर, पेंड्रा, उमरिया, खरसिया, अनूपपुर, सक्ती, अमलाई, बुढ़ार, नैला, बीरसिंगपुर, ब्रिजराजनगर, चिरमिरी, बिजूरी, कोतमा, गेवरारोड, बैकुंठपुर, विश्रामपुर, करगीरोड, जैरामनगर, बाराद्वार और नरौजाबाद।
मार्च तक लगवा लेंगे
वाटर कूलर लगाने में तकनीकी कारणों से देरी हुई है। मुसाफिरों को इस गर्मी में ठंडा पानी मिले, इसके लिए वाटर कूलर मार्च तक लगवा दिए जाएंगे।’’ -रश्मि गौतम, सीनियर डीसीएम, बिलासपुर
टेंडर होने के 14 महीने बाद भी नहीं मिली सुविधा
दो विभागों में खिंचतान
वाटर कूलर खरीदी और इंस्टॉलेशन का काम इलेक्ट्रिकल विभाग का है, लेकिन वाटर कूलर को सुरक्षित रखने लोहे की जाली का ड्राइंग इंजीनियरिंग विभाग को बनाना है। इंजीनियरिंग विभाग ने लोहेे की जाली का जो ड्राइंग दिया वह इलेक्ट्रिकल विभाग और ठेकेदार के हिसाब से हैवी था। ड्राइंग में बदलाव के लिए कागजी घोड़ा दौड़ाया गया और योजना वहीं के वहीं ठहर गई।
यात्रियों को मिलती राहत
वाटर कूलर लग गए होते तो 25 छोटे-बड़े स्टेशनों से ट्रेनों में रोज चढ़ने-उतरने वाले 40 हजार यात्रियों को लाभ होता। यात्रियों के ये आंकड़े 2013 के सर्वे रिपोर्ट के आधार पर हैं। वर्तमान में यात्रियों की संख्या 50 हजार से ज्यादा हो गई है। इसमें उसलापुर, अंबिकापुर और मनेंद्रगढ़ स्टेशन के मुसाफिरों को वाटर कूलर लग जाने के कारण शामिल नहीं किया गया है।