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किसानों ने कोचिए-व्यापारियों को बेचा धान

7 वर्ष पहले
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धान खरीदी केंद्र में अब तक नहीं हो सका इंतजाम

अधूरी व्यवस्था के बीच हो रही धान खरीदी

मालखरौदा में पहुंच रहे किसान

15 क्विं. धान खरीदी का फैसला किसान हित में

शासन के पहले लिए गए फैसले ने किया धान बेचने को मजबूर।

भास्करन्यूज | सक्ती

क्षेत्रमें धान-कटाई मिंजाई का कार्य करीब माहभर पहले से शुरू हो गया था। राज्य सरकार द्वारा किसानों से सिर्फ 10 क्विंटल धान खरीदे जाने की घोषणा के बाद से अधिकांश किसान अपना धान कोचियों और स्थानीय व्यापारियों के पास जाकर बेच चुके हैं। अब अचानक समर्थन मूल्य में प्रति एकड़ 15 क्विंटल धान खरीदे जाने की घोषणा की गई, जो अधिकांश किसानों के लिए किसी काम की नहीं।

किसानों का कहना है कि राज्य सरकार की इस दोहरी नीति से उनमें आक्रोश है। धान खरीदी केन्द्रों में धान बेचने पहुंचे अधिकांश किसानों का कहना है कि सवा माह पहले क्षेत्र में खरीफ सीजन की तैयार धान फसलों की कटाई-मिंजाई का कार्य शुरू हुआ था। अधिकांश किसान कटाई-मिंजाई कार्य पूरा कर गांव के कोचियों व्यापारियों के पास धान बेच चुके हैं। अब खरीदी केन्द्रों में समर्थन मूल्य में धान बेचने के लिए उनके पास सिर्फ निर्धारित रकबा के मुताबिक धान बचा हुआ है। प्रति एकड़ 10 क्विंटल के हिसाब से अधिकांश किसानों ने धान बचाकर रखा है, जिसे वे समर्थन मूल्य में बेचेंगे। किसानों का कहना है कि राज्य सरकार यदि यह घोषणा धान कटाई-मिंजाई से पहले करती तो अपना पूरा उत्पादन खरीदी केन्द्रों में समर्थन मूल्य पर बेच पाते।

खरीदी केंद्र में घेरा तक नहीं

धान खरीदी केंद्र में धान बेचने के लिए किसानों की भीड़।

मालखरौदा| सेवासहकारी समिति बड़ेसीपत में धान की आवक शुरू हो गई है। किसानों ने 4 दिसम्बर से धान बेचना शुरू किया है। किसान अपने -अपने घरों में रखे धान को सोसायटी में लाकर तौल करा रहे हैं। गुरुवार को समिति अध्यक्ष अमृत लाल साहू, उपाध्यक्ष भोलाराम कुर्रे, घनश्याम साहू, सीता बाई जाटवर, दाता राम कुर्रे, देवचरण कुर्रे, श्यामलाल यादव, लाखाराम, गनपत सिंह की मौजूदगी में धान खरीदी की बोहनी हुई।