मनुष्य जीवन कष्टप्रद पर करे लोक-कल्याण: प्राची
सारंगढ़ ब्लाक मुख्यालय से 9 किलोमीटर दूरी पर स्थित ग्राम मौहाढ़ोढा में सात दिवसीय भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ का समापन गुरुवार शाम को हुई। समापन दिवस पर बाल विदुषि प्राची देवी ने लोक कल्याण एवं भागवत पुराण की उत्पत्ति पर प्रकाश डालते राजा परिक्षित के जीवन में घटित घटना पर कहा कि जब राजा परिक्षित शिकार करने गए थे उस समय उन्हे बहुत जोरो से प्यास लगी हुई थी। वे पानी पीने को लेकर श्रृंगी ऋषि के आश्रम पहुंचे पर श्रृंगी ऋषि तपस्या में बैठे हुए थे।
आश्रम में कोई आदर सत्कार नहीं होने पर राजा ने मृत सांप को ऋषि के गले में डाल दिया। अचानक उनके पुत्र सामिक वहां पहुंचे पिता के गले में मृत सांप को देखकर क्रोधित हो गये और उन्होंने राजा श्राप दिया कि सात दिवस के अंदर तक्षक नामक सांप के काटने से तुम्हारी मृत्यु होगी। जब श्राप के बारे ऋषि को पता चला तो उन्हें राजा के ऊपर बड़ी दया आई उन्होंने ने राजा से कहा कि श्राप तो हो ही गया है इससे मुक्ति का उपाय कर लो। उन्होंने राजा को गंगा तट पर भागवत कथा का श्रवण करने को कहा। कथा के दौरान देवतागण अमृत लेकर आये। उन्होंने राजन से कहा भागवत कथा हमें दे दें और आप अमृत को ग्रहण करे पर राजन ने कहा ये अमृत सिर्फ मेरे काम आयेगा लेकिन भागवत रूपी अमृत पुरे विश्व का कल्याण के काम आएगा। इसी प्रकार मनुष्य अपनी निजी स्वार्थ को त्याग कर लोक कल्याण को लेकर काम करे तो पुरे विश्व में शांति होगी। इंसान को जान लेना चाहिए कि इस मृत्यु लोक में उसकी मृत्यु तो सुनिश्चित है इंसान मृत्यु के बाद न तो उसके साथ,जमीन, जायजाद, घर परिवार कोई साथ नहीं जाता जाता है तो मनुष्य का अच्छे कर्म, धर्म ही साथ होता है इस कारण लोगों को लोक कल्याण कारी काम करना चाहिए।
भागवत का रसपान करने बड़ी संख्या में शरीक हुए श्रद्वालु।
आज के बच्चे नहीं करते वृद्घों का सम्मान
उन्होंने कहा कि मनुष्य जन्म मिलना बहुत गर्व की बात होती है माना कि मनुष्य जीवन कष्टप्रद है पर आज इंसान पर अहंकार हावी होते जा रहा है इंसान को कभी अहंकार नहीं करना चाहिए यही असफलता का कारण बनता है। इंसान पवित्र भाव के साथ सरलता और सहजता से कार्य करे है तो हर क्षेत्र में सफलता मिलती है। आज के समाज में वृद्घों की हालत दिन ब दिन गंभीर होती जा रही है। आज अधिकांशत: उनके बच्चे ही वृद्ध माता पिता को हेय की दृष्टि से देखते है। जिन माता पिता ने उन्हें जन्म दिया। अपने पुरे जीवन भर अपने बच्चों को खून पसीने से सींचते हैं वही बच्चे वृद्घ होने पर कई प्रकार उन्हें दुख पहुंचाते है। उन्हें यह नहीं मालूम होता है कि उनके माता पिता उनकी हर जिद को अपने किसी भी प्रकार के शौक को मारकर पुरा करते है। बच्चों को सोचना चाहिए कि उनके माता पिता उनके लिए कितना कष्ट झेलते हैं। बच्चों को सोचना चाहिए कि माता पिता से बड़ा कोई भगवान नहीं और न ही कोई ज्ञान है उनका सम्मान हमेशा करना चाहिए।
कभी न करे किसी जीव की हत्या
मनुष्य को मांस कभी नहीं खाना चाहिए प्रकृति की देन है कि आज हमारे देश में कई प्रकार अनाज,फल,हरी सब्जी का भंडार है जो सेहत के लिए अमृत के समान है पर भी आज मनुष्य मांस को लेकर लालायित रहता है। यही मनुष्य जब किसी की मृत्यु हो जाती है तो छूत मानता है और स्नान करता है। और किसी भी जीव की हत्या कर बड़े शौक से खाता है। तब उसे छूत कभी याद नहीं आती है। इंसान को कभी जीव हत्या नहीं करना चाहिए।
प्रवचन