मंजिल तक पहुंचे बिना ही बंद हो जाता है अभियान
भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा
अवैध पार्किंग, पॉलिथीन जब्ती, अतिक्रमण के खिलाफ मुहिम हो या सड़कों से अावारा मवेशियों काे पकड़ने का मामला, नगर पालिका की कोई भी मुहिम या कार्रवाई मंजिल तक पहुंचे बिना ही बंद हो जाती है। नियमित कार्रवाई न होने से लोग फिर से पुराने ढर्रे पर लौट आते हैं। पालिका जनता की समस्याओं को सुलझाने मुहिम तो चलाती है, लेकिन मॉनिटरिंग के अभाव में कुछ ही दिनों में अभियान बंद हो जाता है।
हद तो यह है कि आय बढ़ाने के लिए संपत्ति कर, जल कर जैसे शिविर तक नियमित रूप से नहीं लगाए जा रहे। शेष पेज 12 पर
स्थिति यह है कि शहर समस्याओं का गढ़ बन गया है और पालिका घाटे की दुकान। वेतन बांटने और बिजली बिल जमा करने के लिए कई बार सरकार के आगे हाथ फैलाने पड़ते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि पालिका के मुखिया सीएमओ और आला अफसर कैसे शहर का भला कर पाएंगे। शहर में यातायात व्यवस्थित करने का जिम्मा पालिका व यातायात विभाग का है। लेकिन दोनों अचानक कभी भी मुहिम छेड़ते हैं उसके बाद खानापूर्ति कर अभियान का इतिश्री कर लेते हैं। जिससे शहर के लोगों को व्यवस्थित यातायात सहित जाम से मुक्ति नहीं मिल नहीं रही है। यातायात मुहिम छेड़कर एक दिन कार्रवाई का खानापूर्ति करती है उसके बाद सब पुराने ढर्रे पर लौट आता है।
बेजाकब्जा तोड़ो अभियान का अता-पता नहीं
बेजाकब्जा तोड़ने पालिका ने 3 साल पहले कचहरी चौक से नहर पार तक अभियान चलाया ,उसके बाद फिर गहरी निद्रा में चला गया था। फिर अचानक 2014 में पालिका मई महीना में जागा और कचहरी चौक के पास ठेले व टीन टप्पर पर बेजाकब्जा हटाया गया। आखिरी बार दो माह पहले नहर किनारे अतिक्रमण हटाओ अभियान चला। पालिका बेजाकब्जा तोड़ने इस दिशा में योजनाबद्ध काम नहीं कर रही। उच्चाधिकारियों के आदेश के तुरंत बाद अचानक बीच में कार्रवाई कर पालिका कोरम पूरा कर इतिश्री कर लेती है। एेसे में जिस क्षेत्र में अतिक्रमण हटाया गया होता है वहां कुछ दिनों बाद फिर से बेजाकब्जा हो जाता है।
नोटिस देकर भूले
शहर में सबसे बड़ी दिग्गज पार्किंग की है। जिसके कारण लोग कहीं भी अपना वाहन पार्क कर देते हैं। किसी भी बैंक के पास पार्किंग का व्यवस्था नहीं है। जिससे बैंक में आए दिन अपना वाहन सड़क पर ही पार्क कर देते हैं। तीन माह पहले ही पुलिस व पालिका सभी बैंक को नोटिस देकर कार्रवाई करने की बात कही थी। लेकिन आज तक नोटिस के बाद क्या हुआ दुबारा पलटकर बैँक वालों को नहीं पूछा गया है।
पॉलिथीन जब्त करने की कार्रवाई थमी
1 जनवरी 2015 को शासन ने पॉलिथीन पर बैन लगाया तो पालिका और प्रशासन का अमला दुकानों, संस्थानों की जांच करने निकल पड़ा। दो-तीन दिनों के अंतराल में कार्रवाई कुछ दिन जैसे-तैसे चली, कुल-जमा 2 क्विंटल पॉलिथीन जब्त करने के बाद अमला फिर शांत पड़ गया। नतीजा, दुकानों में फिर से पॉलिथीन का जमा स्टॉक दोबारा चलन में आ गया है। चोरी-छिपे इसका उपयोग किया जा रहा है।
वर्सन
फोटो- 11 जेएएन 8 :
फोटो- 11 जेएएन 9 : मेन रोड में पार्किंग की जगह में पसरा सामान
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केरा रोड में बीच सड़क पर मवेशियों का झुंड
दो सेे तीन जगह पार्किग स्थल बनाया जाएगा
शहर में तीन जगह काजी हाऊस बनाना है। इसके अलावा जल्द ही काउ केचर भी खरीद लिया जाएगा। अभी मवेशी को पकड़ने सहित रखने की समस्या आ रही है। कांजी हाउस व काउ केचर आने के बाद अभियान में तेजी आएगी। दो सेे तीन जगह पार्किग स्थल बनाया जाएगा। अब जगह चयन होने के बाद पार्किंग समस्या से निजात मिल जाएगी। इसीलिए कार्रवाई नहीं की गई है। सौरभ शर्मा, सीएमओ नपा जांजगीर-नैला
आवारा मवेशी फिर सड़क पर
यातायात व्यवस्था बनाने के लिए कलेक्टर अम्बलन पी ने 20 जनवरी 14 को बैठक में उपस्थित नगर पालिका जांजगीर-नैला के अधिकारी को आवारा मवेशियों को पकडऩे की कार्रवाई 21 जनवरी से शुरू करने के निर्देश दिए थे। कलेक्टर के आदेश का नपा के अधिकारियों ने4 दिन ही पालन किया। इसके बाद आवारा मवेशियों को पकड़ने की मुहिम दम तोड़ गई। शहर में हर चौक-चौराहों पर आवारा मवेशियों का झुंड देखा जा सकता है। स्टेशन चौक, नेताजी चौक, कचहरी चौक, केरा रोड सहित व एनएच पर जगह-जगह सड़क के बीचों-बीच मवेशी एकत्र रहते हैं।
सड़क पर खड़ी हो रहीं गाड़ियां
नगर पालिका कभी कभार तीज त्यौहार में ही अवैध पार्किंग पर कार्रवाई करती है। पिछली बार दीपावली के समय अवैध पार्किंग पर कार्रवाई की गई थी। उसके बाद इस ओर मुड़ की भी नहीं देखा। इसी वजह से दुकानदार अपना सामान पार्किंग की जगह में रख देते हैं और लोग सड़क पर अपना गाड़ी खड़ी करते हैं। जिससे हमेशा जाम का नजारा आम हो गया है। इसी आए दिन छोटे मोटे हादसे शहर में हर रोज होते रहता है। दरअसल पालिका के अफसर भवन, कॉम्प्लेक्स मालिकों के खिलाफ नियमों का डंडा चलाने से बचते हैं।
पालीथीन जब्ती, अवैध पार्किंग, अतिक्रमण हटाने और मवेशी पकड़ने के लिए सख्ती जरूरी
अधूरा प्रयास