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सस्ते के चक्कर में जान से खिलवाड़

7 वर्ष पहले
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जांजगीर। शासन द्वारा हेलमेट अनिवार्य कर दिए जाने से लोग हेलमेट तो लगा रहे हैं, लेकिन आईएसआई मार्क का खरीदकर कामचलाऊ हेलमेट खरीद रहे हैं। जिससे उनके जान को अभी भी खतरा बना हुआ है। दुर्घटना होने पर ऐसे हेलमेट से कभी भी जान जा सकती है। लेकिन इसमें लोग लापरवाही बरत रहे है।

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि हैलमेट पहनने वाले भी लापरवाही बरत रहे हैं। आप सोचेंगे भला कैसे... दरअसल, कुछ लोग कार्रवाई के डर से कामचलाऊ हैलमेट लगा रहे हैं। कोई हाॅर्स राइडर वाला तो कोई निजी संयंत्रों का हैलमेट लगाकर बाइक चला रहा है। अधिकांश लोग सस्ते के चक्कर में बिना आईएसआई मॉर्क लोकल हैलमेट सिर पर रख फर्राटे भर रहे हैं। लोकल हेलमेट 200 रुपए तक में मिल रहा है जबकि ब्रांडेड हैलमेट की कीमत कम से कम 1 हजार रुपए है। विशेषज्ञों का कहना है कि लोकल हेलमेट लगाना खतरनाक है। इस तरह के हैलमेट जिंदगी नहीं बचा सकते। उधर, पुलिस के पास अमला होने के बाद भी वह लोगों को जागरूक करने अभियान नहीं चला रही है। हैलमेट की क्वालिटी को लेकर लोग जागरूक नहीं हैं। दुकान या सड़क पर बिकने वाले हैलमेट में से कौन सा बेहतर है इसकी जानकारी उन्हें नहीं। कुछ तो ऐसे हैं जो केवल औपचारिकता के लिए खरीदते हैं। लोकल क्वालिटी के हैलमेट को अधिक तवज्जो दे रहे हैं, जबकि वे सुरक्षित नहीं हैं। हैलमेट व्यवसायी ने बताया कि आईएसआई मार्क के हैलमेट की तुलना में लोकल माल की खपत दोगुनी है। लोग सोचते हैं ब्रांडेड की कीमत में दो बार लोकल खरीद सकते हैं।

ज्यादातर मौत हेलमेट नहीं पहनने सेजिले में सड़क हादसों में जितनी भी मौतें हुई है। अधिकांश सिर की चोटों से हुई है। 70 प्रतिशत लोगों की मौत हेलमेट नहीं पहनने के कारण हुई है। कहीं दोपहिया वाहन में तीन-तीन लोग सवारी कर रहे है तो कहीं युवा वर्ग जरूरत से अधिक गति से वाहन चला रहे हैं।

सभी के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करने का निर्देश एसपी ने दि हैं।

हेलमेट कानून अनिवार्य

भारतीय कानून के मुताबि मोटर व्हीकल एक्ट-1988 की धारा 129 के अनुसार दुपहिया वाहन चलाते वक्त हेलमेट पहनना जरूरी है। कानून में पगड़ीधारी सिख समुदाय के लोगों को छूट दी गई है। मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 177 में हेलमेट नहीं पहनने पर 200 रुपए जुर्मा ने का प्रावधान है। अगर वही व्यक्ति दोबारा पकड़ा जाए तो उसे अधिकतम 500 रुपए जुर्माना देना होगा।

पुलिस